
NEET PG 2025 Cut Off पर्सेंटाइल में अचानक की गई भारी कटौती ने पूरे देश के मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के बीच उबाल ला दिया है।
इस फैसले को लेकर चिकित्सक संगठनों का कहना है कि यह कदम मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, मेरिट सिस्टम और मरीजों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता है।
डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्रालय से स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि NEET PG 2025 कट-ऑफ पर्सेंटाइल को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा आने वाले दिनों में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।

NEET PG 2025 Cut Off पर्सेंटाइल-क्या है पूरा मामला? क्यों बना विवाद?
NEET PG भारत की सबसे प्रतिष्ठित पोस्टग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के आधार पर देश के मेडिकल कॉलेजों में एमडी, एमएस और डिप्लोमा सीटों पर दाखिला मिलता है।
लेकिन NEET PG 2025 के लिए कट-ऑफ पर्सेंटाइल में जिस तरह से अचानक और बड़े स्तर पर कमी की गई, उसने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जहां पहले सामान्य वर्ग के लिए अपेक्षाकृत ऊंची पर्सेंटाइल जरूरी होती थी, वहीं अब इसे बेहद न्यूनतम स्तर तक लाया गया है। कुछ वर्गों के लिए तो स्थिति यह बन गई है कि शून्य पर्सेंटाइल पर भी काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति मिल रही है।
नीट पीजी 2025 की काउंसलिंग के दो राउंड पूरे होने के बावजूद देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 18,000 से अधिक पीजी सीटें खाली रह गई थीं।
इन खाली सीटों को भरने और शैक्षणिक संसाधनों की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्रालय ने कटऑफ पर्सेंटाइल में भारी कमी करने का निर्देश दिया।
NBEMS द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, अब संशोधित कटऑफ के बाद पात्रता के मानक इतने गिर गए हैं कि नकारात्मक अंक (Negative Marks) पाने वाले उम्मीदवार भी विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की दौड़ में शामिल हो सकेंगे।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह “मेरिट” के साथ एक क्रूर मजाक है और इससे भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
संशोधित कटऑफ स्कोर और पर्सेंटाइल (Revised NEET PG 2025 Cutoff)
नीचे दी गई तालिका में आप देख सकते हैं कि किस तरह कटऑफ को कम किया गया है:
| कैटेगरी | पुरानी कटऑफ (Percentile) | नई कटऑफ (Percentile) | नया स्कोर (800 में से) |
| जनरल / EWS | 50th Percentile | 7th Percentile | 103 |
| जनरल (PwBD) | 45th Percentile | 5th Percentile | 90 |
| SC / ST / OBC | 40th Percentile | 0th Percentile | -40 (माइनस 40) |
इस बदलाव का सबसे विवादास्पद हिस्सा आरक्षित श्रेणियों के लिए ‘शून्य पर्सेंटाइल’ और -40 अंक का स्कोर है। इसका मतलब है कि जिस छात्र ने परीक्षा में भाग लिया और जिसके नंबर माइनस में भी आए हैं, वह भी अब काउंसलिंग के माध्यम से एमडी (MD) या एमएस (MS) की सीट पाने के योग्य हो गया है।
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डॉक्टरों का कड़ा विरोध: “यह मेरिट की हत्या है”

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) ने इस निर्णय की कड़ी निंदा की है।
डॉक्टरों का तर्क है कि विशेषज्ञ डॉक्टर (Specialist Doctors) सीधे मरीजों की जान से जुड़े होते हैं। यदि प्रवेश के मानक ही इतने कम कर दिए जाएंगे, तो इससे देश का Health System ढांचा चरमरा जाएगा।
देशभर के रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल शिक्षक इस फैसले को लेकर खासे नाराज़ हैं। उनका कहना है कि:
NEET PG का उद्देश्य योग्य और सक्षम विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करना है
कट-ऑफ को अत्यधिक कम करना मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय है
इससे यह संदेश जाता है कि क्वालिटी से ज्यादा सीट भरना प्राथमिकता बन गई है
डॉक्टरों का मानना है कि पोस्टग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई में प्रवेश पाने वाला छात्र आगे चलकर सर्जन, फिजिशियन, एनेस्थेटिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट बनेगा। ऐसे में कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को प्रवेश देना सीधे तौर पर भविष्य के मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
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FAIMA की चेतावनी: “राष्ट्रव्यापी आंदोलन को रहेंगे तैयार”
फाईमा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कहा है कि “नकारात्मक अंकों वाले उम्मीदवारों को विशेषज्ञ शिक्षा के लिए पात्र बनाना अमानवीय और अतार्किक है।” संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि मंत्रालय इस अधिसूचना को वापस नहीं लेता है, तो वे सभी राज्यों के रेजिडेंट डॉक्टर संगठनों के साथ बैठक कर विरोध प्रदर्शन की तारीख का ऐलान करेंगे।
FORDA का पक्ष: “निजी कॉलेजों को फायदा पहुँचाने की कोशिश”
फोर्डा का आरोप है कि NEET PG 2025 Cut Off से उन निजी मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुँचाने के लिए उठाया गया है जिनकी महंगी सीटें खाली रह जाती हैं। कटऑफ को शून्य करने से वे उम्मीदवार भी दाखिला ले पाएंगे जिनके पास पैसा है लेकिन मेरिट नहीं। इससे चिकित्सा शिक्षा का व्यवसायीकरण और बढ़ेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय की सफाई: “सीटों का सदुपयोग है जरूरी”
दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि नीट पीजी देने वाला हर उम्मीदवार पहले से ही एक क्वालिफाइड MBBS डॉक्टर है। उन्होंने अपनी साढे पांच साल की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी की है। नीट पीजी केवल सीटों के आवंटन का एक तंत्र है। मंत्रालय का तर्क है कि 18,000 पीजी सीटों का खाली रहना राष्ट्रीय नुकसान है, क्योंकि ये विशेषज्ञ डॉक्टर भविष्य में अस्पतालों की कमी को पूरा करेंगे।
क्या सिर्फ सीटें भरने के लिए मानकों से समझौता?
सरकारी पक्ष का तर्क है कि बड़ी संख्या में PG मेडिकल सीटें खाली रह जाती हैं, जिससे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।
लेकिन डॉक्टर संगठनों का कहना है कि:
सीटें खाली रहना सिस्टम की विफलता है, छात्रों की नहीं
समाधान कट-ऑफ गिराना नहीं, बल्कि बेहतर प्लानिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार होना चाहिए
मेडिकल शिक्षा को सिर्फ नंबर गेम नहीं बनाया जा सकता
उनका यह भी कहना है कि अगर आज कट-ऑफ शून्य तक पहुंचा दी गई, तो कल मेडिकल प्रोफेशन की साख पर गहरा असर पड़ेगा।
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रेजिडेंट डॉक्टर क्यों सबसे ज्यादा नाराज़?
रेजिडेंट डॉक्टर वही युवा डॉक्टर होते हैं जो अस्पतालों की रीढ़ माने जाते हैं।
दिन-रात ड्यूटी, इमरजेंसी सेवाएं और मरीजों की सीधी जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है।

रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है:
वे खुद कठिन परीक्षा पास करके इस सिस्टम में आए हैं
उन्हें ऐसे जूनियर डॉक्टरों के साथ काम करना पड़ेगा जिनकी अकादमिक तैयारी कमजोर होगी
इससे टीमवर्क, पेशेंट सेफ्टी और क्लीनिकल डिसीजन-मेकिंग प्रभावित होगी
यही वजह है कि रेजिडेंट डॉक्टर इस फैसले के खिलाफ सबसे आगे खड़े दिखाई दे रहे हैं।
NEET PG 2025 Cut Off के लिए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी क्यों?
डॉक्टर संगठनों ने साफ कहा है कि अगर कट-ऑफ पर्सेंटाइल के फैसले पर पुनर्विचार नहीं हुआ, तो वे:
अस्पतालों में प्रतीकात्मक विरोध
मेडिकल कॉलेजों में कार्य बहिष्कार
और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन शुरू कर सकते हैं
उनका दावा है कि यह सिर्फ छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा सवाल है।
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मरीजों पर क्या पड़ेगा असर?
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है – आम मरीज का क्या होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि नीट पीजी महज एक परीक्षा नहीं है, बल्कि यह यह सुनिश्चित करने का पैमाना है कि एक डॉक्टर में विशेषज्ञता हासिल करने की क्षमता है या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार:
एकेडमिक संकट: मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों का स्तर गिरने से शिक्षण और प्रशिक्षण की प्रक्रिया कमजोर होगी। कमजोर अकादमिक आधार वाले डॉक्टरों से गलत डायग्नोसिस का खतरा बढ़ सकता है
उपचार की गुणवत्ता: सर्जिकल और क्रिटिकल केयर क्षेत्रों में जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। यदि न्यूनतम योग्यता वाला उम्मीदवार न्यूरोसर्जरी या कार्डियोलॉजी जैसे संवेदनशील विषयों में प्रवेश पाता है, तो उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा में की गई छोटी-सी गलती भी लाखों जिंदगियों को प्रभावित कर सकती है।
ग्रामीण और सरकारी अस्पतालों में इसका असर सबसे पहले दिखेगा
- अंतरराष्ट्रीय छवि: भारत के डॉक्टरों की दुनिया भर में धाक है। इस तरह के फैसलों से भारतीय मेडिकल डिग्री की अंतरराष्ट्रीय साख पर सवाल उठ सकते हैं।
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सोशल मीडिया पर भी उठ रही तेज आवाज
NEET PG 2025 Cut Off विवाद अब सिर्फ मीटिंग रूम तक सीमित नहीं है।
सोशल मीडिया पर:
मेडिकल छात्र अपनी सालों की मेहनत की बात कर रहे हैं
युवा डॉक्टर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं
आम लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या डॉक्टर बनना अब इतना आसान होना चाहिए?
यह मुद्दा धीरे-धीरे नेशनल डिबेट का रूप लेता जा रहा है।
NEET PG 2025 काउंसलिंग के अगले चरण पर प्रभाव
इस संशोधित कटऑफ के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जल्द ही राउंड 3 (मॉप-अप राउंड) के लिए नया शेड्यूल जारी करेगी।
फ्रेश रजिस्ट्रेशन: नए पात्र उम्मीदवारों को फिर से पंजीकरण करने का मौका मिलेगा।
सीट मैट्रिक्स: रिक्त सीटों की नई सूची जारी की जाएगी।
चॉइस फिलिंग: उम्मीदवारों को नए सिरे से अपनी पसंद भरने का अवसर मिलेगा।
NEET PG 2025 Cut Off का समाधान क्या हो सकता है?
डॉक्टर संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं:
कट-ऑफ को शून्य तक लाने के बजाय मॉडरेट स्तर पर रखा जाए
खाली सीटों के लिए अलग स्ट्रेटेजी और अतिरिक्त काउंसलिंग राउंड हों
मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और फैकल्टी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए
लॉन्ग-टर्म हेल्थ पॉलिसी बनाई जाए, न कि तात्कालिक फैसले
उनका कहना है कि गुणवत्ता और संख्या के बीच संतुलन ही एकमात्र रास्ता है।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या नीट पीजी 2025 की कटऑफ वास्तव में 0 हो गई है? हाँ, आरक्षित श्रेणियों (SC/ST/OBC) के लिए संशोधित कटऑफ अब 0 पर्सेंटाइल कर दी गई है।
2. -40 अंक वाले छात्र कैसे पास हो सकते हैं? चूँकि कटऑफ 0 पर्सेंटाइल है, इसलिए -40 अंक (जो कि न्यूनतम संभावित स्कोर के करीब है) पाने वाले छात्र भी अब काउंसलिंग के लिए योग्य माने जाएंगे।
3. क्या इस फैसले से नीट पीजी की रैंक बदल जाएगी? नहीं, NBEMS ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों की पुरानी रैंक में कोई बदलाव नहीं होगा, केवल पात्रता के मानकों को बदला गया है।
4. डॉक्टर इस फैसले का विरोध क्यों कर रहे हैं? डॉक्टरों का मानना है कि इससे मेडिकल शिक्षा के स्तर में गिरावट आएगी और बिना मेरिट वाले लोग विशेषज्ञ डॉक्टर बन जाएंगे।
5. क्या स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैसला वापस लेने के संकेत दिए हैं? फिलहाल मंत्रालय अपने फैसले पर कायम है, लेकिन डॉक्टरों के बढ़ते दबाव और प्रस्तावित आंदोलन के बाद स्थिति बदल सकती है।
6. क्या यह नियम हर साल के लिए है? नहीं, यह अधिसूचना विशेष रूप से शैक्षणिक सत्र 2025-26 की खाली सीटों को भरने के लिए जारी की गई है।
7. जनरल कैटेगरी के लिए नई कटऑफ क्या है? सामान्य श्रेणी (General) के लिए कटऑफ 50वें पर्सेंटाइल से घटाकर 7वां पर्सेंटाइल (103 अंक) कर दी गई है।
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निष्कर्ष: फैसला जो भविष्य तय करेगा
NEET PG 2025 Cut Off पर्सेंटाइल में की गई कटौती सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह भारत की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा फैसला है।
अगर समय रहते संतुलित निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका असर आने वाले वर्षों तक दिखाई देगा। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार डॉक्टरों की चिंताओं को कितनी गंभीरता से लेती है।
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क्या आपको लगता है कि पीजी सीटों को भरने के लिए कटऑफ को शून्य करना सही फैसला है? या इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है?
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