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NEPAL FLOOD : नेपाल में जलप्रलय! 160 मौतें, 750+ लापता 26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

Nepal Flood: 26 अगस्त की भयानक बाढ़ में 160 मौतें और 750+ लोग लापता हैं। जानें रसुवा में कैसे आई बाढ़, कितना नुकसान हुआ और भारत में क्यों अलर्ट है।

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Nepal Flood: 26 अगस्त की भयानक बाढ़ में 160 मौतें और 750+ लोग लापता हैं। जानें रसुवा में कैसे आई बाढ़, कितना नुकसान हुआ और भारत में क्यों अलर्ट है।

नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़: अब तक क्या-क्या हुआ? 157+ मौतें, सैकड़ों लापता, तबाह हुए गांव, सड़कें और हाइड्रो प्रोजेक्ट

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। चीन-तिब्बत सीमा के पास शुरू हुई तेज बाढ़ और मलबे के सैलाब ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग समेत कई इलाकों को प्रभावित किया। घर, बाजार, पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं इसकी चपेट में आईं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और राहत-बचाव अभियान जारी है।

27 अगस्त 2026 की सुबह तक उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में 157 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि अलग-अलग सरकारी/मीडिया अपडेट में लापता लोगों की संख्या 750 के आसपास या उससे अधिक बताई जा रही है। नेपाल से जुड़े आंकड़े लगातार बदल रहे हैं क्योंकि कई प्रभावित इलाकों में संपर्क और सड़क व्यवस्था अभी भी बाधित है।

Live Update: यह रिपोर्ट 27 अगस्त 2026 को उपलब्ध ताजा जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े आगे बदल सकते हैं।

26 अगस्त की सुबह आखिर हुआ क्या था?

26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे स्थानीय समय के आसपास नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी अचानक बेहद उफान पर आ गई। बाढ़ का पानी तिब्बत की दिशा से आया और देखते ही देखते तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी क्षेत्र में भारी तबाही मच गई। (aajtak.in, )

सबसे भयावह बात यह थी कि यह सामान्य बारिश से आने वाली धीमी बाढ़ नहीं थी। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और चट्टानें आईं, जिसने रास्ते में आने वाली कई संरचनाओं को बहा दिया।

नेपाल के साथ-साथ तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में भी भारी नुकसान हुआ।

अभी नेपाल में स्थिति क्या है? — Live Data

स्थिति27 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी
नेपाल में पुष्टि हुई मौतें157
नेपाल में लापताकरीब 750 या अधिक
लापता भारतीय133
नेपाल में प्रभावित प्रमुख क्षेत्ररसुवा, नुवाकोट, धादिंग समेत downstream इलाके
नेपाल सेना के हेलीकॉप्टर14 तैनात
प्रभावित हाइड्रो/पावर प्रोजेक्ट13 परियोजनाएं, 748 MW क्षमता
क्षतिग्रस्त सड़केंकरीब 40 किमी
क्षतिग्रस्त मोटरेबल पुलकम से कम 19
तिब्बत में पुष्टि हुई मौतें3
तिब्बत में लापता265 — शुरुआती/अलग अपडेट
भारतीय राहत सामग्री10 टन

आंकड़ों में अलग-अलग अपडेट के कारण अंतर दिखाई दे रहा है। उदाहरण के लिए नेपाल टूरिज्म बोर्ड की शुरुआती सूची में 403 यात्रियों के लापता होने की बात थी, जबकि बाद में लापता लोगों की व्यापक सूची काफी बढ़ी। इसलिए 403, 750+ और अन्य आंकड़ों को जोड़कर कुल संख्या निकालना सही नहीं होगा—ये अलग-अलग समय और अलग-अलग सूचियों के अपडेट हैं। 

NEPAL FLOOD 2026
NEPAL FLOOD 2026

मौतों का आंकड़ा कैसे बढ़ता गया?

26 अगस्त की दोपहर तक शुरुआती रिपोर्टों में केवल कुछ मौतों की पुष्टि हुई थी। शाम तक नेपाल पुलिस ने 95 शव मिलने की जानकारी दी थी। इसके बाद रात और 27 अगस्त की सुबह तक आंकड़ा बढ़कर 157 तक पहुंच गया। ) nepalpolice.gov.np)

नेपाल पुलिस की शुरुआती जिलेवार जानकारी में नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा, तनहुँ और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों में शव मिलने की जानकारी दी गई थी। इसका मतलब था कि बाढ़ का असर केवल सीमा के पास रसुवा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पानी का विनाशकारी प्रभाव downstream क्षेत्रों तक पहुंचा। (nepalpolice.gov.np)

रसुवा में सबसे ज्यादा तबाही क्यों हुई?

रसुवा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास स्थित पहाड़ी जिला है और यहां भोटेकोशी नदी तथा उससे जुड़ी घाटियां बेहद संकरी हैं।

तिमुरे और रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में सड़क, बाजार, वाहन, कस्टम और दूसरी सुविधाएं नदी के करीब थीं। अचानक आए तेज पानी और मलबे ने इन इलाकों को सीधे प्रभावित किया।

AajTak की रिपोर्ट के अनुसार तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में गांव, बाजार और पुल तक बह गए। स्थानीय अधिकारियों ने भारी जन-धन नुकसान की आशंका जताई।

NEPAL FLOOD 2026
NEPAL FLOOD 2026
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बाढ़ में गांव, बाजार और घर कैसे तबाह हुए?

बाढ़ अपने साथ सिर्फ पानी नहीं लाई थी। उसमें मिट्टी, चट्टानें, पेड़ और भारी मलबा शामिल था।

कई जगह पानी का बहाव इतना तेज था कि लोगों को सुरक्षित निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिला। घरों और दुकानों में मलबा भर गया। कई वाहन पानी के साथ बह गए और कई इमारतों के निचले हिस्से पूरी तरह दब गए।

NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में नुवाकोट और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में घरों के बह जाने और परिवारों के बिछड़ने की तस्वीरें सामने आईं।

40 किलोमीटर सड़कें और कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त

नेपाल के Department of Roads के प्रारंभिक आकलन के अनुसार कम से कम 19 मोटरेबल पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुईं।

एक महत्वपूर्ण मार्ग—बेत्रावती से रसुवागढ़ी सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क—के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की जानकारी भी सामने आई। इससे चीन-नेपाल सीमा तक पहुंचने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बाधित हुआ। (kathmandupost.com)

इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान

बुनियादी ढांचाप्रारंभिक नुकसान
सड़ककरीब 40 किमी
बेत्रावती-रसुवागढ़ी मार्गकरीब 42 किमी प्रभावित
मोटरेबल पुलकम से कम 19
बाजार/बस्तियांकई इलाके गंभीर रूप से प्रभावित
बिजली/टेलीकॉमकई क्षेत्रों में बाधित

ये आंकड़े प्रारंभिक हैं और वास्तविक नुकसान का सर्वे पूरा होने के बाद बढ़ सकते हैं। (kathmandupost.com)

नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर को भी बड़ा झटका

नेपाल की अर्थव्यवस्था में जलविद्युत का बड़ा महत्व है और बाढ़ ने इस सेक्टर को भी नुकसान पहुंचाया है।

AajTak ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रारंभिक विवरण के हवाले से बताया कि कुल 13 बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुईं, जिनकी कुल क्षमता करीब 748 मेगावाट है। इनमें 8 चालू और 5 निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल थीं।

प्रभावित बिजली परियोजनाओं का प्रारंभिक डेटा

श्रेणीसंख्या/क्षमता
कुल प्रभावित परियोजनाएं13
चालू परियोजनाएं8
निर्माणाधीन परियोजनाएं5
कुल प्रभावित क्षमता748 MW
चालू परियोजनाओं की क्षमता354 MW
निर्माणाधीन परियोजनाओं की क्षमता394 MW

प्रभावित परियोजनाओं में अपर त्रिशूली-1, रसुवागढ़ी, रसुवा-भोटेकोशी, सान्जेन, चिलिमे और लांगटांग खोला जैसी परियोजनाओं के नाम सामने आए हैं।

बाढ़ से पहले स्थानीय स्तर पर भारी बारिश हुई थी?

यह घटना इसलिए भी असामान्य रही क्योंकि रसुवा में उस समय बहुत भारी स्थानीय बारिश नहीं हुई थी

AajTak के अनुसार रसुवा में पिछले 24 घंटे में बारिश करीब 7 मिमी से अधिक नहीं थी। इससे यह सवाल उठा कि इतनी बड़ी मात्रा में पानी अचानक कहां से आया। रिपोर्ट में तिब्बत की ओर किसी ग्लेशियल घटना की आशंका जताई गई।

यही वजह है कि शुरुआती घंटों में इस आपदा को समझना मुश्किल रहा।

ग्लेशियर, भूस्खलन या भूकंप—आखिर बाढ़ आई कैसे?

यह इस पूरी आपदा का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप की संभावना सामने आई थी। USGS के डेटा में 26 अगस्त को नेपाल के पास 5.2 magnitude की seismic event दर्ज हुई थी। (usgs.gov)

लेकिन बाद के विश्लेषण में तस्वीर अधिक जटिल सामने आई। Reuters के अनुसार satellite imagery और विशेषज्ञों के विश्लेषण से संकेत मिला कि ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिससे बर्फ, चट्टान और मलबे का विशाल avalanche बना। यह मलबा नदी तंत्र में पहुंचा और अचानक बाढ़ का रूप ले गया।

इसलिए फिलहाल इसे केवल “भूकंप से आई बाढ़” कहना सही नहीं होगा।

संभावित घटनाक्रम

ग्लेशियर/बर्फ का हिस्सा टूटा → भारी मलबा और चट्टान नीचे गिरे → नदी में अचानक भारी मात्रा में सामग्री पहुंची → पानी और मलबे का तेज surge बना → भोटेकोशी और आगे त्रिशूली नदी प्रणाली में विनाशकारी बाढ़ आई।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि घटना में जलवायु परिवर्तन और तेजी से गर्म होते हिमालय की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन तत्काल trigger और दीर्घकालिक climate factors को अलग-अलग समझना जरूरी है।

133 भारतीय भी लापता, कई यात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा पर थे

नेपाल की बाढ़ ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक और तीर्थयात्री प्रभावित क्षेत्र में मौजूद थे।

ताजा भारतीय रिपोर्टों में 133 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के रास्ते पर थे।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की यात्रियों वाली शुरुआती सूची और बाद की व्यापक लापता सूची में अंतर है। इसलिए किसी एक शुरुआती सूची को अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं है।

किन देशों के लोग लापता हैं?

उपलब्ध रिपोर्टों में भारत के अलावा कई देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

देशरिपोर्ट किया गया लापता आंकड़ा*
भारत133/142 के अलग-अलग अपडेट
अमेरिका47
ऑस्ट्रेलिया34
ब्रिटेन33
कनाडा24
मलेशियाकई यात्री
दक्षिण कोरियाहाइड्रोपावर कर्मचारी
यूक्रेन53 की रिपोर्ट
अन्यकई देशों के नागरिक

*ये अलग-अलग समय के आधिकारिक/मीडिया अपडेट हैं और सभी आंकड़े एक ही सूची के नहीं हैं। इसलिए इन्हें जोड़कर कुल संख्या निकालना उचित नहीं है।

28 नेपाली पुलिसकर्मी भी संपर्क से बाहर

नेपाल पुलिस के अनुसार रसुवा क्षेत्र में तैनात 28 पुलिसकर्मी भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। पुलिस ने प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, शव प्रबंधन और राहत के लिए अलग-अलग टीमें लगाई हैं। (nepalpolice.gov.np)

नेपाल सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और सेना के कई कर्मियों के भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी। (radionepalonline.com)

राहत और बचाव अभियान कैसे चल रहा है?

नेपाल सेना ने हेलीकॉप्टरों और आपदा राहत टीमों को लगाया है। NDTV के ताजा अपडेट में 14 हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल की जानकारी दी गई है।

लेकिन राहत अभियान के सामने कई बड़ी मुश्किलें हैं:

  • कई सड़कें और पुल बह गए हैं।
  • कुछ इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था बाधित है।
  • भारी मलबे के कारण जमीन से पहुंचना कठिन है।
  • कुछ जगह हेलीकॉप्टरों को उतरने में भी दिक्कत हो रही है।
  • नदियों में पानी और मलबे का खतरा अभी बना हुआ है।

नेपाल पुलिस ने निचले इलाकों में लोगों को नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। (nepalpolice.gov.np)

नेपाल सरकार ने क्या कदम उठाए?

नेपाल सरकार ने राहत और बचाव को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए रेस्क्यू, मेडिकल उपचार और राहत को प्राथमिकता देने तथा बाधित सड़कों, दूरसंचार और बिजली व्यवस्था को बहाल करने के निर्देश दिए हैं। (radionepalonline.com)

सरकार ने प्रभावित स्थानीय स्तरों को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने और मृतकों के परिवारों को कानून के अनुसार आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय लिया है। (radionepalonline.com)

भारत ने नेपाल की मदद के लिए क्या किया?

भारत ने भी तुरंत राहत और बचाव के लिए कदम उठाए हैं।

भारत ने नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाओं की पहली खेप भेजी। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बात कर भारत की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिया।

भारत की ओर से नेपाल में प्रभावित भारतीयों के लिए हेल्पलाइन भी जारी की गई है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट

नेपाल से निकलने वाली नदियों का सीधा संबंध भारत के उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से है। इसलिए नेपाल की इस आपदा का असर सीमा पार भी चिंता का विषय बन गया।

बिहार में गंडक नदी के जलस्तर को लेकर प्रशासन अलर्ट हुआ और वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोलने की जानकारी सामने आई।

NDTV के अनुसार नेपाल से आए पानी के कारण गंडक बैराज पर जलप्रवाह बढ़ा और प्रशासन को सतर्क किया गया।

भारत सरकार ने बिहार और उत्तर प्रदेश के साथ समन्वय बढ़ाया है और निचले इलाकों में सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत में किन इलाकों पर नजर?

क्षेत्रस्थिति
बिहारहाई अलर्ट/निगरानी
पश्चिमी चंपारणगंडक नदी के कारण विशेष निगरानी
मुजफ्फरपुरनिगरानी और तैयारी
उत्तर प्रदेशनेपाल सीमा से लगे इलाकों में सतर्कता
कुशीनगरNDRF/प्रशासनिक तैयारी
गंडक बैराजजलप्रवाह बढ़ने के कारण निगरानी

यहां सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि नेपाल में अचानक बढ़ा पानी नीचे की ओर आने पर नदी का जलस्तर तेजी से प्रभावित कर सकता है।

नेपाल में बाढ़ से बैंक और टेलीकॉम नेटवर्क भी प्रभावित

तबाही सिर्फ सड़क, पुल और घरों तक सीमित नहीं रही। AajTak ने बताया कि बाढ़ से बिजली उत्पादन, बैंकिंग और टेलीकॉम नेटवर्क पर भी असर पड़ा है।

इसका सीधा असर राहत कार्य पर पड़ता है क्योंकि किसी इलाके में मोबाइल नेटवर्क या बिजली बंद होने पर लापता लोगों से संपर्क करना और उनकी लोकेशन पता करना मुश्किल हो जाता है।

अभी सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

इस समय सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि लापता लोगों तक पहुंचना है।

बड़ी संख्या में लोग ऐसे इलाकों में थे जहां सड़कें और पुल बाढ़ में बह चुके हैं। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था बाधित है। ऐसे में सेना और पुलिस को हेलीकॉप्टर के जरिए लोगों तक पहुंचना पड़ रहा है।

दूसरी चुनौती यह है कि नदी और पहाड़ी क्षेत्रों में दोबारा मलबा या पानी आने का खतरा बना रह सकता है। विशेषज्ञों ने ऐसे इलाकों में सावधानी बरतने की जरूरत बताई है।

26 अगस्त से 27 अगस्त तक पूरी घटना की टाइमलाइन

समय/दिनघटना
26 अगस्त सुबहतिब्बत सीमा की दिशा से भोटेकोशी में अचानक तेज बाढ़
करीब 9 बजेरसुवा के तिमुरे/स्याफ्रुबेसी क्षेत्र में भारी तबाही
दोपहरशुरुआती मौतों और लापता लोगों की खबरें
दोपहर बाद100+ यात्रियों सहित सैकड़ों लोगों के संपर्क में न होने की जानकारी
शामनेपाल पुलिस ने 95 शव मिलने की जानकारी दी
शामभारत ने नेपाल की मदद की घोषणा की
शाम/रातबिहार-यूपी में हाई अलर्ट
रातभारत से 10 टन राहत सामग्री भेजी गई
रातमृतकों का आंकड़ा 150 के करीब पहुंचा
27 अगस्त सुबहनेपाल में 157 मौतों की पुष्टि; लापता लोगों की संख्या 750+ तक पहुंचने की रिपोर्ट
27 अगस्तहेलीकॉप्टरों और सुरक्षा बलों से खोज-बचाव अभियान जारी

यह timeline अलग-अलग समय पर जारी हुए अपडेटों को क्रम में रखती है; शुरुआती आंकड़े बाद में अपडेट हुए हैं।

क्या नेपाल में अभी खतरा टला है?

नहीं। राहत अभियान जारी है और प्रभावित नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने को कहा गया है।

नेपाल पुलिस ने विशेष रूप से लोगों से नदी, नाले और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में न जाने तथा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। (nepalpolice.gov.np)

इसका मतलब है कि अभी इस आपदा को केवल “26 अगस्त की घटना” मानकर खत्म नहीं किया जा सकता। इसका असर आने वाले दिनों में सड़क, बिजली, संचार, पर्यटन, व्यापार और नदी-जलस्तर पर भी दिखाई दे सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल: क्या यह सिर्फ एक बाढ़ थी?

असल में यह बहु-स्तरीय हिमालयी आपदा थी।

पहले ग्लेशियर/भूस्खलन जैसी घटना हुई, फिर भारी मात्रा में मलबा नदी में पहुंचा और उसके बाद अचानक बाढ़ ने नदी के नीचे बसे क्षेत्रों को अपनी चपेट में लिया।

इसलिए इसे केवल “भारी बारिश से आई बाढ़” कहना इस घटना की पूरी तस्वीर नहीं बताता। उपलब्ध satellite और विशेषज्ञ विश्लेषण ग्लेशियल collapse और ice-rock avalanche की ओर इशारा करते हैं।

आगे क्या होगा?

अब अगले चरण में तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण होंगी:

पहला—लापता लोगों की तलाश।
सेना, पुलिस और हेलीकॉप्टरों के जरिए उन इलाकों में पहुंचने की कोशिश की जाएगी जहां सड़क संपर्क टूट गया है।

दूसरा—इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन।
कितनी सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और इमारतें पूरी तरह नष्ट हुईं, इसका विस्तृत सर्वे जरूरी होगा।

तीसरा—भारत और नेपाल में नदी सुरक्षा।
नेपाल से आने वाले पानी के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश में जलस्तर पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

अभी तक की सबसे बड़ी तस्वीर

26 अगस्त की नेपाल बाढ़ ने कुछ ही घंटों में एक बड़े क्षेत्र का स्वरूप बदल दिया।

  • 157 नेपाल में मौतें पुष्टि हो चुकी थीं।
  • 750+ लोगों के लापता होने की ताजा रिपोर्टें थीं।
  • 133 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई।
  • 19 पुल और करीब 40 किमी सड़क क्षतिग्रस्त होने का प्रारंभिक आकलन है।
  • 13 पावर प्रोजेक्ट्स/748 MW क्षमता प्रभावित बताई गई।
  • 14 हेलीकॉप्टर राहत-बचाव में लगाए गए।
  • भारत ने 10 टन राहत सामग्री और दवाएं भेजीं।
  • बिहार और उत्तर प्रदेश को हाई अलर्ट पर रखा गया।
  • तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में भी मौतें और बड़ी संख्या में लापता लोगों की खबर है। (

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मृतकों और लापता लोगों का अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। अलग-अलग एजेंसियों की सूचियां लगातार अपडेट हो रही हैं और कई प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी रेस्क्यू टीमों की पहुंच पूरी तरह नहीं हो पाई है।

ताजा स्रोत

नोट: इस लेख में दिए गए आंकड़े 27 अगस्त 2026 को उपलब्ध ताजा रिपोर्टों पर आधारित हैं। चूंकि नेपाल में खोज एवं बचाव अभियान अभी जारी है, इसलिए मृतकों, लापता लोगों और नुकसान के आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है। अलग-अलग समय पर जारी सूचियों में अंतर होने के कारण लापता लोगों के आंकड़ों को जोड़कर कोई एक संयुक्त संख्या नहीं बनाई गई है।

FAQ Schema

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को क्या हुआ?

26 अगस्त 2026 को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक तेज फ्लैश फ्लड आई, जिससे घरों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ।

नेपाल बाढ़ में कितनी मौतें हुई हैं?

27 अगस्त की सुबह उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में मौतों का आंकड़ा 160 तक पहुंच गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी होने के कारण आंकड़ा आगे बदल सकता है।

नेपाल बाढ़ में कितने लोग लापता हैं?

ताजा रिपोर्टों में 750 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है, हालांकि अलग-अलग समय की आधिकारिक सूचियों में संख्या अलग हो सकती है।

नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय लापता हैं?

विभिन्न अपडेट में 133 से अधिक भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। NDTV के एक अपडेट में 142 भारतीयों समेत 403 लोगों के लापता होने की जानकारी भी दी गई थी, इसलिए आंकड़ा लगातार अपडेट हो रहा है।

नेपाल में बाढ़ की वजह क्या बताई जा रही है?

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार बाढ़ तिब्बत की दिशा से आई और भोटेकोशी नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ा। NDTV ने satellite imagery के आधार पर glacier collapse को संभावित trigger बताया है।

क्या नेपाल बाढ़ का असर भारत पर भी पड़ सकता है?

हां। नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में निगरानी और अलर्ट बढ़ाया गया है। Aaj Tak के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर पर प्रशासन नजर रख रहा है।

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