
BRICS Summit 2026 में क्या होगा? 11 देश, भारत की बड़ी जिम्मेदारी और दुनिया की नजर
BRICS Summit 2026 इस समय भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला 18वां BRICS Summit ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया व्यापार, ऊर्जा, सप्लाई चेन, युद्धों, बदलते वैश्विक गठजोड़ और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है। भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उसके सामने सिर्फ सम्मेलन की मेजबानी नहीं, बल्कि 11 देशों के बीच सहमति बनाकर ठोस नतीजे निकालने की चुनौती भी है।
भारत ने अपनी 2026 BRICS Chairship के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है, जिसे “Humanity First” के विजन से जोड़ा गया है। 2026 इसलिए भी खास है क्योंकि BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है—11 देशों की इस बैठक से भारत को क्या मिलेगा? क्या व्यापार और निवेश बढ़ाने पर कोई बड़ा फैसला होगा? क्या डॉलर के विकल्प पर चर्चा आगे बढ़ेगी? क्या चीन और भारत के रिश्तों में नई गर्माहट दिखाई देगी? और क्या BRICS दुनिया की Global Governance व्यवस्था में बदलाव की मांग को और मजबूत करेगा?
आइए जानते हैं BRICS Summit 2026 से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी।
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BRICS Summit 2026: एक नजर में पूरी जानकारी
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| सम्मेलन | 18th BRICS Summit |
| तारीख | 12–13 सितंबर 2026 |
| मेजबान देश | भारत |
| आयोजन स्थल | भारत मंडपम, नई दिल्ली |
| BRICS Chair | भारत |
| सदस्य देश | 11 |
| 2026 की थीम | Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability |
| विजन | Humanity First |
| भारत की अध्यक्षता | चौथी बार |
| खास मौका | BRICS की स्थापना के 20 वर्ष |
| प्रमुख क्षेत्र | व्यापार, वित्त, ऊर्जा, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और Global Governance |
भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS Chair रह चुका है।
BRICS Summit क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें Brazil, Russia, India और China शामिल थे।
बाद में South Africa के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।
इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और Egypt, Ethiopia, Iran, Indonesia, Saudi Arabia और UAE इसके सदस्य बने। इस तरह वर्तमान में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य हैं। (BRICS)
BRICS के 11 सदस्य देश
| क्रम | देश | क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1 | Brazil | दक्षिण अमेरिका |
| 2 | Russia | यूरोप/एशिया |
| 3 | India | एशिया |
| 4 | China | एशिया |
| 5 | South Africa | अफ्रीका |
| 6 | Egypt | अफ्रीका |
| 7 | Ethiopia | अफ्रीका |
| 8 | Iran | पश्चिम एशिया |
| 9 | Indonesia | दक्षिण-पूर्व एशिया |
| 10 | Saudi Arabia | पश्चिम एशिया |
| 11 | UAE | पश्चिम एशिया |
ध्यान देने वाली बात: BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा Partner Countries और Outreach Invitees भी BRICS की विभिन्न बैठकों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए सम्मेलन में केवल 11 देशों की मौजूदगी तक कार्यक्रम सीमित नहीं है। भारत की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 2026 Summit में Member और Partner Countries के साथ Outreach Invitees भी शामिल होंगे।
BRICS Summit 2026 भारत के लिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। भारत के लिए BRICS Summit 2026 केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है। यह भारत को एक साथ कई मोर्चों पर अपनी कूटनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताएं आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
1. Global South में भारत की भूमिका मजबूत होगी
भारत लंबे समय से Global South की आवाज को मजबूत करने की बात करता रहा है। BRICS ऐसा मंच है जहां एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं एक साथ आती हैं।
भारत इस मंच के जरिए विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूती से उठा सकता है।
2. चीन और रूस के साथ संवाद का मंच
BRICS में चीन और रूस दोनों भारत के साथ एक ही मंच पर मौजूद हैं।
ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, भारत के लिए यह मंच रणनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन जाता है।
खासकर PM Modi और Xi Jinping की संभावित मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हैं। Reuters के अनुसार Xi Jinping की प्रस्तावित भारत यात्रा सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी और दोनों नेताओं की मुलाकात भारत-चीन संबंधों में कूटनीतिक गर्माहट का संकेत दे सकती है, हालांकि आर्थिक और रणनीतिक मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
BRICS Summit 2026 में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष BRICS एजेंडा को केवल राजनीतिक मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय विकास और व्यावहारिक सहयोग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रमुख मुद्दों की सूची
| मुद्दा | BRICS में इसका महत्व |
|---|---|
| Global Governance | अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार |
| Trade | सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाना |
| Investment | निवेश के नए अवसर |
| Energy Security | ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करना |
| Food Security | खाद्य आपूर्ति और कृषि सहयोग |
| Supply Chains | मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन |
| Technology | टेक्नोलॉजी और Innovation |
| AI | Artificial Intelligence में सहयोग |
| Green Energy | स्वच्छ ऊर्जा और Sustainable Development |
| Health | स्वास्थ्य व्यवस्था और सहयोग |
| Disaster Resilience | आपदा से निपटने की क्षमता |
| Digital Economy | डिजिटल भुगतान और डिजिटल सहयोग |
| Finance | वित्तीय सहयोग |
| Local Currencies | स्थानीय मुद्राओं में व्यापार |
| Startups | Startup और Innovation Ecosystem |
भारत की BRICS Chairship के दौरान तीन व्यापक स्तंभों—Political & Security, Economic & Financial और Cultural & People-to-People Exchanges—के तहत 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय engagements 25 से अधिक भारतीय शहरों में आयोजित किए जा चुके हैं।
1. Global Governance में सुधार पर बड़ा जोर
BRICS देशों का एक महत्वपूर्ण साझा मुद्दा है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका और प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए।
इसमें खास तौर पर:
- United Nations
- International Monetary Fund
- World Bank
- World Trade Organization
जैसी संस्थाओं में सुधार की मांग शामिल है।
भारत का जोर ऐसी व्यवस्था पर है जिसमें Global South की आवाज को अधिक महत्व मिले।
यही कारण है कि BRICS Summit 2026 को केवल आर्थिक सम्मेलन के बजाय वैश्विक शक्ति-संतुलन के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
2. Trade और Investment: भारत का बड़ा आर्थिक दांव
भारत के लिए BRICS का सबसे व्यावहारिक फायदा व्यापार और निवेश में हो सकता है।
BRICS में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश शामिल हैं। इसलिए अगर सदस्य देशों के बीच व्यापार प्रक्रिया आसान होती है तो भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
Federation of Indian Export Organisations ने भी Summit से व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, बाजार पहुंच और resilient supply chains में ठोस परिणाम निकालने पर जोर दिया है। BRICS Summit
भारत को संभावित फायदे
| क्षेत्र | भारत के लिए संभावित फायदा |
|---|---|
| Export | नए बाजार |
| Import | वैकल्पिक सप्लायर |
| Investment | विदेशी पूंजी |
| Manufacturing | नई Supply Chains |
| Technology | तकनीकी सहयोग |
| Energy | ऊर्जा सुरक्षा |
| Agriculture | कृषि व्यापार |
| Services | IT और Professional Services |
| Startups | नए निवेशक और बाजार |
3. Supply Chain: भारत के लिए क्यों अहम?
कोविड के बाद दुनिया ने देखा कि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता सप्लाई चेन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
युद्ध, प्रतिबंध, समुद्री मार्गों में व्यवधान और व्यापारिक तनाव ने इस चुनौती को और बढ़ाया है।
इसलिए BRICS के भीतर Resilient Supply Chains एक बड़ा विषय बन सकता है।
भारत के लिए इसका अर्थ है:
Manufacturing + Logistics + Technology + Energy + Trade को ज्यादा सुरक्षित और diversified बनाना।
4. Energy Security पर क्यों रहेगी नजर?
BRICS Summit में दुनिया के कई बड़े ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता देश शामिल हैं।
इस वजह से:
- Crude Oil
- Natural Gas
- Renewable Energy
- Green Hydrogen
- Energy Transition
- Energy Security
जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
भारत दुनिया की बड़ी ऊर्जा उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाओं में है। इसलिए ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई की स्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
BRICS के भीतर बेहतर ऊर्जा सहयोग भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
5. क्या BRICS में डॉलर का विकल्प आएगा?
यह सवाल BRICS Summit 2026 से पहले सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दों में से एक है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
BRICS की Common Currency और Local Currency Trade एक ही चीज नहीं हैं।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का मतलब यह हो सकता है कि दो देश कुछ व्यापारिक लेनदेन अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में करें।
वहीं एक Common BRICS Currency का मतलब अलग और कहीं अधिक बड़ा वित्तीय ढांचा होगा।
फिलहाल इसे किसी निश्चित फैसले के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
रूस की ओर से भी हाल में यह कहा गया है कि वह “de-dollarisation” को लक्ष्य के रूप में आगे नहीं बढ़ा रहा और स्वीकार्य भुगतान तरीकों के लिए खुला है।
इसलिए Summit में payment mechanisms और national currencies में trade पर चर्चा को Common Currency से अलग समझना जरूरी है।
6. Digital Payment और Financial Cooperation
भारत की अपनी Digital Public Infrastructure और UPI जैसी व्यवस्थाओं ने वैश्विक स्तर पर काफी ध्यान खींचा है।
BRICS के भीतर Digital Economy और cross-border payment systems पर सहयोग भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।
भारत के लिए संभावित प्राथमिकताएं हो सकती हैं:
- तेज Cross-Border Payments
- कम Transaction Cost
- Digital Financial Inclusion
- CBDC Cooperation
- Payment Connectivity
- FinTech Innovation
हालांकि किसी भी नई व्यवस्था का वास्तविक असर उसके implementation पर निर्भर करेगा।
7. AI और Technology पर भारत का फोकस
Artificial Intelligence अब केवल Technology का मुद्दा नहीं रहा।
यह:
- रोजगार
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- रक्षा
- व्यापार
- साइबर सुरक्षा
- सरकारी सेवाओं
तक असर डाल रहा है।
भारत BRICS के भीतर AI और Innovation Cooperation को बढ़ावा देकर Global South के लिए technology access और responsible AI जैसे मुद्दों को आगे रख सकता है।
8. Startup और Innovation भी रहेगा अहम
BRICS Summit 2026 में भारत Startup और Innovation को भी अपनी प्राथमिकताओं से जोड़ रहा है।
भारत का Startup Ecosystem पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ा है और BRICS के अन्य देशों के साथ:
- Startup Funding
- Innovation Exchange
- Incubation
- Technology Partnerships
- Research Collaboration
जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
Economic Times के अनुसार भारत Summit में startups, innovation, resilient supply chains और green energy जैसे क्षेत्रों में practical outcomes को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
9. Climate और Green Energy
BRICS Summit भारत की BRICS Chairship में Sustainability भी प्रमुख शब्द है।
इसका मतलब है कि चर्चा केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होगी, बल्कि:
Green Finance + Renewable Energy + Climate Resilience + Sustainable Development
पर भी जोर रहेगा।
विकासशील देशों के लिए बड़ी चुनौती यह है कि आर्थिक विकास और Climate Goals के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
भारत BRICS के मंच से इसी संतुलन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
10. Food और Health Security
हाल के वर्षों में खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों वैश्विक चिंता के बड़े मुद्दे बने हैं।
BRICS देशों के बीच सहयोग इन क्षेत्रों में:
- कृषि तकनीक
- Food Supply Chains
- Nutrition
- Public Health
- Medicines
- Pandemic Preparedness
तक फैल सकता है।
भारत के लिए यह क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बड़ी आबादी के लिए Affordable Healthcare और Food Security दोनों बड़े विकासात्मक मुद्दे हैं।
BRICS Summit 2026 में चीन और भारत की मुलाकात क्यों महत्वपूर्ण?
BRICS की सबसे दिलचस्प कूटनीतिक तस्वीरों में से एक PM Narendra Modi और Xi Jinping की संभावित आमने-सामने बातचीत हो सकती है।
दोनों देशों के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है। हालांकि हाल के समय में संवाद बढ़ने के संकेत मिले हैं।
Reuters के मुताबिक Xi Jinping की भारत यात्रा सात साल बाद होने वाली है और दोनों नेताओं की मुलाकात रिश्तों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक अविश्वास जैसी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।
भारत-चीन बातचीत में संभावित मुद्दे
| मुद्दा | महत्व |
|---|---|
| Bilateral Relations | रिश्तों में स्थिरता |
| Trade | बड़ा व्यापारिक संबंध |
| Investment | चीनी निवेश और भारतीय नियम |
| Technology | तकनीकी सहयोग |
| Supply Chains | Manufacturing dependency |
| Regional Security | एशिया की रणनीतिक स्थिति |
| BRICS Cooperation | समूह में सहमति |
इसलिए BRICS Summit में मोदी-शी बातचीत केवल दो देशों की बैठक नहीं होगी; इसका असर पूरे BRICS समूह की दिशा पर भी पड़ सकता है।
Putin और BRICS: रूस के लिए क्यों अहम है Summit?
रूस BRICS का संस्थापक सदस्य है और समूह के भीतर उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
पश्चिमी देशों के साथ रूस के तनाव और वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों के बीच BRICS रूस के लिए एक महत्वपूर्ण diplomatic और economic platform बना हुआ है।
भारत के लिए रूस के साथ संबंध भी लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखते हैं।
इसलिए नई दिल्ली में होने वाली बैठक में भारत को एक तरफ रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को संभालना होगा, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी देशों के साथ अपनी बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी संतुलित करना होगा।
BRICS Summit 2026 में भारत की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत की भूमिका आसान नहीं है।
एक तरफ BRICS में:
- China
- Russia
- Iran
जैसे देश हैं।
दूसरी तरफ भारत के अमेरिका, यूरोप, जापान और अन्य साझेदारों के साथ भी मजबूत संबंध हैं।
इसलिए भारत BRICS को किसी एक देश या किसी एक geopolitical camp के खिलाफ मंच में बदलने के बजाय practical cooperation platform के रूप में रखना चाहता है।
यही रणनीतिक संतुलन भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा हो सकता है।
BRICS में भारत बनाम चीन: कौन किस एजेंडे पर?
| मुद्दा | भारत की संभावित प्राथमिकता | चीन की संभावित प्राथमिकता |
|---|---|---|
| BRICS Expansion | संतुलित विस्तार | व्यापक विस्तार |
| Global Governance | सुधार और प्रतिनिधित्व | multipolar व्यवस्था |
| Trade | बाजार पहुंच | व्यापार विस्तार |
| Currency | व्यावहारिक payment systems | डॉलर निर्भरता कम करने पर अधिक चर्चा |
| Technology | Innovation और Digital Public Infrastructure | Technology partnerships |
| Supply Chain | Diversification | Regional manufacturing networks |
| BRICS Role | Cooperation platform | मजबूत Global South grouping |
यह अंतर बताता है कि Summit में हर मुद्दे पर सभी 11 देशों की राय एक जैसी होना जरूरी नहीं है।
BRICS की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
BRICS की ताकत सिर्फ सदस्य देशों की संख्या नहीं है।
इसका महत्व इस बात में है कि यह दुनिया के कई महत्वपूर्ण:
- ऊर्जा उत्पादक
- बड़े उपभोक्ता बाजार
- विनिर्माण केंद्र
- कृषि उत्पादक
- तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं
को एक मंच पर लाता है।
2025 की BRICS सामग्री के अनुसार 11 सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं; BRICS Brazil ने 39% वैश्विक अर्थव्यवस्था और 24% अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आंकड़े का उल्लेख किया था। (BRICS)
BRICS की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
इतने बड़े समूह की सबसे बड़ी चुनौती है—सहमति बनाना।
11 देशों की आर्थिक जरूरतें और विदेश नीति हमेशा एक जैसी नहीं होतीं।
प्रमुख चुनौतियां
- भारत-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
- रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव
- Iran से जुड़े geopolitical मुद्दे
- Common Currency पर मतभेद
- BRICS Expansion को लेकर अलग-अलग राय
- अलग-अलग आर्थिक संरचनाएं
- सदस्य देशों के बीच व्यापार असंतुलन
इसलिए Summit का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कितने मुद्दे उठाए जाएंगे, बल्कि यह है कि कितने मुद्दों पर वास्तविक सहमति और implementation plan बन पाएगा।
भारत को BRICS Summit 2026 से क्या फायदा हो सकता है?
संभावित फायदे
| क्षेत्र | संभावित लाभ |
|---|---|
| विदेश नीति | Global South में नेतृत्व |
| व्यापार | नए Export Markets |
| निवेश | विदेशी निवेश के अवसर |
| ऊर्जा | बेहतर Energy Partnerships |
| Manufacturing | Supply Chain Diversification |
| Technology | Innovation Cooperation |
| Startups | Funding और Market Access |
| Digital Economy | Cross-border payment cooperation |
| Agriculture | Food Security partnerships |
| Diplomacy | China-Russia सहित प्रमुख देशों से संवाद |
Federation of Indian Export Organisations ने भी BRICS को भारतीय कारोबार के लिए exports, investment, technology partnerships, market access और payment mechanisms में अवसर के रूप में रेखांकित किया है।
आम भारतीय पर क्या असर पड़ सकता है?
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आम आदमी से क्या लेना-देना है?
सीधा असर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है, लेकिन लंबे समय में BRICS के फैसलों का प्रभाव कई क्षेत्रों में पड़ सकता है।
संभावित प्रभाव
Petrol-Diesel:
ऊर्जा सहयोग और वैश्विक तेल बाजार की दिशा का असर भारत की Energy Bill पर पड़ सकता है।
महंगाई:
Energy और Food Supply Chains में स्थिरता आने से Inflationary Pressure कम करने में मदद मिल सकती है।
नौकरी:
नई Manufacturing और Investment Partnerships से रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
Export:
भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
Digital Payments:
Cross-border payment systems बेहतर होने पर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन आसान हो सकते हैं।
Technology:
AI और डिजिटल सहयोग से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
BRICS Summit 2026 का संभावित कार्यक्रम
18वां BRICS Leaders’ Summit 12 और 13 सितंबर को Bharat Mandapam में होगा। उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार दो दिनों में Leaders’ Sessions, closed-door discussions, innovation showcase और अन्य diplomatic engagements शामिल हैं।
| तारीख | प्रमुख गतिविधि |
|---|---|
| 12 सितंबर | Leaders’ engagements और प्रमुख सत्र |
| 12 सितंबर | Closed-door discussions |
| 12 सितंबर | Family Photo |
| 12 सितंबर | Innovation Showcase |
| 12 सितंबर | अन्य सांस्कृतिक/आधिकारिक कार्यक्रम |
| 13 सितंबर | Partner Countries और Outreach engagements |
| 13 सितंबर | Global और Regional Issues पर चर्चा |
| 13 सितंबर | निष्कर्ष और आगे की दिशा |
कार्यक्रम में बदलाव संभव हैं, इसलिए अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
भारत की BRICS Chairship में 350 से ज्यादा बैठकें
BRICS Summit 2026 केवल दो दिनों का कार्यक्रम नहीं है।
भारत ने पूरे वर्ष BRICS Chairship के दौरान 350 से अधिक meetings और high-level engagements आयोजित किए हैं। ये कार्यक्रम 25 से अधिक शहरों में हुए और राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय तथा cultural/people-to-people cooperation के तीन व्यापक स्तंभों पर केंद्रित रहे।
यानी सितंबर का Leaders’ Summit पूरे वर्ष चले BRICS कार्यक्रम का culmination है।
BRICS Summit 2026 की थीम का क्या मतलब है?
भारत ने थीम रखी है:
“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
इसका सरल अर्थ है—
Resilience
मुश्किल परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था और समाज को मजबूत बनाना।
Innovation
Technology, AI और नए विचारों को बढ़ावा देना।
Cooperation
BRICS देशों के बीच ज्यादा व्यावहारिक सहयोग।
Sustainability
विकास के साथ पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों का ध्यान रखना।
और इन सभी के केंद्र में है:
Humanity First
भारत ने अपनी Chairship को people-centric approach से जोड़ने की कोशिश की है।
क्या BRICS एक नया Global Power Centre बन रहा है?
यह कहना जल्दबाजी होगी कि BRICS किसी एक पश्चिमी संस्था का विकल्प बन चुका है।
लेकिन इतना जरूर है कि BRICS का विस्तार इसे पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली मंच बनाता है।
इसका महत्व खास तौर पर तीन कारणों से बढ़ता है:
पहला—Economic Weight
कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं एक मंच पर हैं।
दूसरा—Energy
कई प्रमुख Energy Producers और Consumers इसमें शामिल हैं।
तीसरा—Global South
एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण अमेरिका के देशों की भागीदारी बढ़ी है।
इसलिए आने वाले वर्षों में BRICS की भूमिका Global Governance में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
BRICS Summit 2026: भारत के सामने 5 बड़े लक्ष्य
अगर भारत इस Summit से ठोस परिणाम निकालना चाहता है, तो पांच लक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं:
1. Trade को बढ़ाना
भारतीय कंपनियों के लिए बाजार पहुंच आसान करना।
2. Investment आकर्षित करना
Manufacturing, Infrastructure और Technology में निवेश बढ़ाना।
3. Supply Chains मजबूत करना
China-centric dependency सहित विभिन्न जोखिमों को कम करना।
4. Financial Cooperation
Local Currency Trade और Cross-Border Payment को practical बनाना।
5. Global Governance Reform
UN और international financial institutions में developing countries की भूमिका बढ़ाना।
क्या BRICS Summit 2026 कोई बड़ा ऐतिहासिक फैसला दे सकता है?
संभावना जरूर है, लेकिन किसी संभावित घोषणा को पहले से निश्चित फैसला बताना सही नहीं होगा।
विशेष रूप से इन मुद्दों पर नजर रहेगी:
- Global Governance Reform
- Trade Facilitation
- Local Currency Payments
- Financial Cooperation
- Energy Security
- Supply Chains
- AI Cooperation
- Green Finance
- Startup Cooperation
- Global South की भूमिका
Summit की सफलता इस बात से तय होगी कि इनमें से कितने विषय घोषणाओं से आगे बढ़कर implementation तक पहुंचते हैं।
निष्कर्ष: BRICS Summit 2026 पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
BRICS Summit 2026 भारत के लिए एक बड़ा diplomatic test है।
नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को होने वाला यह Summit ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रही है—भूराजनीतिक तनाव, ऊर्जा असुरक्षा, व्यापारिक अनिश्चितता, बदलती supply chains और Global Governance में सुधार की मांग।
भारत के सामने मौका है कि वह BRICS को केवल बयानबाजी का मंच नहीं, बल्कि Trade, Technology, Energy, Finance और Sustainable Development में practical cooperation का platform बनाने की दिशा में आगे ले जाए।
सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि 11 सदस्य देशों के बीच कितनी सहमति बनती है और भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान कितने ठोस परिणाम हासिल कर पाता है।
और सबसे दिलचस्प बात यह है कि PM Modi, Xi Jinping और Vladimir Putin जैसे नेताओं की मौजूदगी इस Summit को सिर्फ आर्थिक बैठक नहीं रहने देगी—यह बदलती Global Power Politics का भी एक बड़ा मंच बन सकता है।
❓ FAQ: BRICS Summit 2026
1. BRICS Summit 2026 कब होगा?
BRICS Summit 2026 का 18वां Leaders’ Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा।
2. BRICS Summit 2026 की मेजबानी कौन कर रहा है?
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और Summit की मेजबानी नई दिल्ली में करेगा।
3. BRICS में कितने सदस्य देश हैं?
वर्तमान में BRICS के 11 सदस्य देश हैं—Brazil, Russia, India, China, South Africa, Egypt, Ethiopia, Iran, Indonesia, Saudi Arabia और UAE। (BRICS)
4. BRICS Summit 2026 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत को Global South में अपनी भूमिका मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने, ऊर्जा एवं सप्लाई चेन सहयोग को आगे बढ़ाने और Global Governance Reform जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का अवसर देता है।
5. BRICS Summit 2026 की थीम क्या है?
भारत की 2026 BRICS Chairship की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जिसे “Humanity First” के विजन से जोड़ा गया है।
6. क्या BRICS Common Currency लॉन्च करेगा?
Common BRICS Currency को लेकर चर्चा होती रही है, लेकिन इसे Summit में होने वाला निश्चित फैसला मानना उचित नहीं है। Local Currency Trade और Cross-Border Payment Cooperation अलग विषय हैं।
7. BRICS Summit में भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा क्या हो सकता है?
भारत के लिए Trade, Investment, Technology, Energy Security, Supply Chains और Global South में diplomatic influence प्रमुख संभावित फायदे हैं।
8. क्या Modi और Xi Jinping की मुलाकात महत्वपूर्ण होगी?
हां। भारत-चीन संबंधों में हालिया संवाद के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात को काफी महत्व दिया जा रहा है। Reuters के अनुसार Xi Jinping की प्रस्तावित भारत यात्रा सात वर्षों में उनकी पहली यात्रा होगी।
9. BRICS Summit 2026 में कौन-कौन से मुद्दे उठ सकते हैं?
Trade, Finance, Energy Security, Food Security, Supply Chains, AI, Technology, Health, Climate, Disaster Resilience और Global Governance Reform प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
10. 2026 में भारत कितनी बार BRICS Chair बना है?
2026 भारत की चौथी BRICS Chairship है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS Chair रह चुका है।
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