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US PERM Ban Applications पर रोक: TCS, Infosys, Wipro समेत 8 कंपनियों पर अमेरिकी कार्रवाई, भारतीय IT कर्मचारियों के Green Card का क्या होगा?
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे भारतीय IT professionals के लिए 9 अक्टूबर 2026 की यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। US PERM Ban अमेरिकी प्रशासन ने TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़ी Permanent Labor Certification यानी PERM applications पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद इन कंपनियों के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास यानी Green Card पाने की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
US PERM Ban Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी श्रम विभाग नई और लंबित PERM applications को स्वीकार या प्रोसेस नहीं करेगा।
हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों में काम करने वाले सभी भारतीय कर्मचारियों के H-1B वीजा रद्द हो गए हैं या उन्हें तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा। फिलहाल मुख्य असर employer-sponsored Green Card प्रक्रिया पर पड़ रहा है। US PERM Ban इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि रोक कितने समय तक जारी रहती है, संबंधित कर्मचारी किस चरण में हैं और अमेरिकी प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
इस लेख में जानिए PERM क्या है, किन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, TCS ने क्या कहा, भारतीय कर्मचारियों और H-1B वीजा धारकों पर क्या असर पड़ सकता है और अमेरिका में नौकरी या Green Card की योजना बना रहे लोगों को अब किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
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US PERM Applications पर रोक: क्या है पूरा मामला?
8 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और श्रम विभाग के अधिकारियों ने कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। US PERM Ban इसके बाद 9 अक्टूबर को इस कार्रवाई और भारतीय IT कंपनियों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर विस्तृत रिपोर्टें सामने आईं।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए उपलब्ध इमिग्रेशन कार्यक्रमों का दुरुपयोग किया और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार अवसरों तथा वेतन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। ये प्रशासन के आरोप हैं; इन्हें संबंधित कंपनियों के खिलाफ अंतिम रूप से साबित हुए निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए।
PERM अमेरिकी रोजगार-आधारित इमिग्रेशन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण चरण है। US PERM Ban इसके माध्यम से नियोक्ता को सामान्यतः यह प्रमाणित करना होता है कि किसी विशेष पद पर विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करने से योग्य अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों या रोजगार के अवसरों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

अमेरिकी श्रम विभाग के इस कदम से प्रभावित कंपनियों के लिए नई PERM applications दाखिल करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में बाधा पैदा हुई है। US PERM Ban इससे उन कर्मचारियों की Green Card योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं जो अपने नियोक्ता के माध्यम से स्थायी निवास प्राप्त करना चाहते हैं।
किन 8 कंपनियों पर लगी PERM रोक US PERM Ban?
अमेरिकी प्रशासन की घोषणा में आठ प्रमुख कंपनियों के नाम सामने आए हैं।
| कंपनी | देश/मुख्यालय का संदर्भ | संभावित असर |
|---|---|---|
| Tata Consultancy Services (TCS) | भारत | Employer-sponsored Green Card प्रक्रिया में अनिश्चितता |
| Infosys | भारत | नई और लंबित PERM applications प्रभावित |
| Wipro | भारत | स्थायी निवास की प्रक्रिया में रुकावट |
| HCLTech | भारत | पात्र कर्मचारियों की Green Card योजनाओं पर असर |
| Cognizant | अमेरिका में मुख्यालय वाली IT सेवा कंपनी | PERM प्रक्रिया प्रभावित |
| Capgemini | फ्रांस | Employer-sponsored immigration प्रक्रिया प्रभावित |
| Microsoft | अमेरिका | संबंधित PERM applications पर रोक |
| Adobe | अमेरिका | संबंधित PERM applications पर रोक |
इन कंपनियों का नाम अमेरिकी प्रशासन की घोषित कार्रवाई में शामिल है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन कंपनियों के सभी कर्मचारी, सभी वीजा श्रेणियां या सभी इमिग्रेशन आवेदन स्वतः रद्द कर दिए गए हैं। कार्रवाई का केंद्र PERM कार्यक्रम में इन नियोक्ताओं की भागीदारी है।
PERM क्या है और अमेरिका के Green Card में इसकी क्या भूमिका है?
PERM का पूरा नाम Permanent Labor Certification है। यह अमेरिकी Department of Labor यानी श्रम विभाग की एक प्रक्रिया है, जो कई employer-sponsored employment-based Green Card मामलों में महत्वपूर्ण होती है।
US PERM Ban आसान भाषा में समझें तो जब कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहती है और उसके लिए रोजगार-आधारित Green Card प्रायोजित करती है, तो सामान्यतः उसे पहले यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला या विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों की वेतन और कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
इस प्रक्रिया में नियोक्ता को निर्धारित भर्ती प्रक्रिया और अन्य श्रम नियमों का पालन करना होता है। आवेदन स्वीकृत होने पर मामला आगे रोजगार-आधारित इमिग्रेशन के अगले चरणों तक पहुंच सकता है।
हालांकि, हर Green Card श्रेणी में PERM जरूरी नहीं होता। कुछ रोजगार-आधारित श्रेणियों में अलग नियम और छूट लागू होती हैं।
PERM और Green Card का संबंध कैसे काम करता है?
अमेरिका में रोजगार के आधार पर स्थायी निवास प्राप्त करने की सामान्य प्रक्रिया को इस तरह समझा जा सकता है:
- नियोक्ता का प्रायोजन: कंपनी कर्मचारी को स्थायी पद के लिए प्रायोजित करने का निर्णय लेती है।
- PERM प्रक्रिया: जहां आवश्यक हो, नियोक्ता अमेरिकी श्रम विभाग के समक्ष Labor Certification के लिए आवेदन करता है।
- I-140 Petition: PERM स्वीकृत होने के बाद सामान्यतः नियोक्ता USCIS के पास Immigrant Petition for Alien Workers यानी Form I-140 दाखिल कर सकता है।
- वीजा उपलब्धता: कर्मचारी की श्रेणी और प्राथमिकता तिथि के अनुसार उपलब्ध Immigrant Visa Number का इंतजार करना पड़ सकता है।
- अंतिम Green Card प्रक्रिया: पात्रता और परिस्थितियों के अनुसार अमेरिका में Adjustment of Status या विदेश में Consular Processing के माध्यम से आगे बढ़ा जा सकता है।

यह एक सामान्य रूपरेखा है। हर मामले में क्रम, पात्रता और आवश्यक दस्तावेज अलग हो सकते हैं।
PERM पर रोक का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि जिन कर्मचारियों के मामले में यह चरण आवश्यक है, वे नियोक्ता के लिए इस प्रक्रिया को सामान्य तरीके से आगे बढ़ाने में असमर्थ हो सकते हैं।
TCS ने PERM रोक पर क्या कहा?
इस खबर में TCS का बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। Reuters की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Tata Consultancy Services ने कहा कि अमेरिकी PERM कार्यक्रम में लगी रोक से उसकी workforce strategy या client engagements पर कोई महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके PERM applications की संख्या एकल अंकों में रही है। TCS ने यह भी दोहराया कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी की अमेरिकी भर्ती रणनीति में स्थानीय कर्मचारियों और campus recruitment की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस बयान से संकेत मिलता है कि TCS अपनी अमेरिकी भर्ती के लिए PERM पर बहुत अधिक निर्भर नहीं है। लेकिन कंपनी की समग्र workforce strategy पर सीमित असर होने की बात और किसी व्यक्तिगत कर्मचारी की Green Card प्रक्रिया पर असर होने की बात दो अलग विषय हैं।
इसलिए TCS के कर्मचारियों को कंपनी के व्यापक बयान को अपनी व्यक्तिगत इमिग्रेशन स्थिति की गारंटी नहीं मानना चाहिए।
Infosys, Wipro और HCLTech के कर्मचारियों पर क्या असर होगा?
Infosys, Wipro और HCLTech अमेरिका में बड़ी संख्या में टेक्नोलॉजी सेवाएं देने वाली कंपनियां हैं। इनके कर्मचारी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा इंजीनियरिंग, कंसल्टिंग, साइबर सिक्योरिटी और अन्य तकनीकी भूमिकाओं में काम करते हैं।
इन कंपनियों से जुड़े उन कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उनके नियोक्ता के माध्यम से Green Card का रास्ता पहले की तरह आगे बढ़ पाएगा।
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यदि कर्मचारी की रोजगार-आधारित Green Card श्रेणी में PERM आवश्यक है और संबंधित नियोक्ता पर रोक लागू है, तो नई application दाखिल करने या लंबित आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में बाधा आ सकती है।
इसका संभावित प्रभाव तीन स्तरों पर देखा जा सकता है:
- नई Green Card प्रक्रिया शुरू करने वाले कर्मचारी: उन्हें PERM प्रक्रिया शुरू करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
- पहले से PERM प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी: उनके मामले की आगे की प्रगति रुक सकती है या अनिश्चित हो सकती है।
- Green Card प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच चुके कर्मचारी: उनके मामले का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि PERM की स्थिति क्या है, I-140 दाखिल या स्वीकृत हुआ है या नहीं और अन्य लागू नियम क्या हैं।
हर कर्मचारी का मामला अलग होगा। केवल कंपनी का नाम देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी व्यक्ति का पूरा Green Card आवेदन रद्द हो गया है।
क्या H-1B वीजा भी बंद हो जाएगा?
नहीं, PERM पर रोक लगने का अर्थ अपने आप H-1B वीजा का रद्द होना नहीं है।
H-1B एक गैर-आप्रवासी वर्क वीजा है, जिसका उपयोग अमेरिकी नियोक्ता कुछ विशेष व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करते हैं। दूसरी ओर, PERM रोजगार-आधारित स्थायी निवास प्रक्रिया का श्रम प्रमाणन चरण है।
दोनों की कानूनी भूमिका अलग है।
यदि किसी कर्मचारी के पास वैध H-1B स्टेटस है, तो केवल इस PERM कार्रवाई के कारण उसका स्टेटस अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। कर्मचारी को अपने वीजा, I-94, नियोक्ता, रोजगार और अन्य इमिग्रेशन शर्तों का पालन करना होगा।

हालांकि, जिन कर्मचारियों की दीर्घकालीन योजना H-1B से आगे बढ़कर Green Card प्राप्त करने की है, उनके लिए यह कदम गंभीर अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
ध्यान दें: वीजा की वैधता, अमेरिका में रहने की अधिकृत अवधि और इमिग्रेशन स्टेटस अलग-अलग कानूनी पहलू हैं। किसी विशेष मामले में इनका आकलन व्यक्तिगत दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
किन भारतीय कर्मचारियों को सबसे ज्यादा चिंता हो सकती है?
PERM रोक का प्रभाव सभी कर्मचारियों पर एक जैसा नहीं होगा। विशेष रूप से उन लोगों को अपनी स्थिति समझने की जरूरत है जिनकी स्थायी निवास योजना इस प्रक्रिया पर निर्भर है।
1. जिनकी Green Card प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई
यदि किसी कर्मचारी के नियोक्ता ने अभी तक PERM application दाखिल नहीं की है और उसके मामले में यह प्रक्रिया आवश्यक है, तो नई application दाखिल करने में रोक के कारण देरी हो सकती है।
2. जिनका PERM आवेदन लंबित है
जिन कर्मचारियों के आवेदन पहले ही दाखिल हो चुके हैं, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी प्रशासन की घोषणा लंबित आवेदनों के प्रसंस्करण को भी प्रभावित करती है।
ऐसे कर्मचारियों को अपने नियोक्ता और इमिग्रेशन वकील से आवेदन की वर्तमान स्थिति और अगले संभावित कदमों की जानकारी लेनी चाहिए।
3. जिनका H-1B स्टेटस छह साल की सीमा के करीब है
H-1B स्टेटस पर सामान्यतः छह साल की सीमा लागू होती है, हालांकि कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त समय मिल सकता है।
कुछ पात्र कर्मचारियों के लिए लंबित PERM, दाखिल I-140 या अन्य निर्धारित शर्तें H-1B स्टेटस बढ़ाने की पात्रता में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए जिन कर्मचारियों का H-1B समय समाप्त होने के करीब है, उन्हें जल्द व्यक्तिगत कानूनी सलाह लेनी चाहिए।
यह मानना गलत होगा कि हर ऐसे कर्मचारी को अमेरिका छोड़ना ही पड़ेगा। लेकिन उनके मामले में समय पर योजना बनाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
4. जिनके पास पहले से स्वीकृत I-140 है
यदि किसी कर्मचारी का I-140 पहले ही स्वीकृत हो चुका है, तो उसकी स्थिति केवल उस कर्मचारी जैसी नहीं है जिसका PERM अभी दाखिल ही नहीं हुआ।
फिर भी, I-140 की स्वीकृति अपने आप Green Card नहीं देती। आगे की प्रक्रिया प्राथमिकता तिथि, वीजा उपलब्धता, रोजगार और अन्य लागू इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करती है।
ऐसे कर्मचारियों को यह पता करना चाहिए कि अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई उनके विशेष मामले के किस चरण को प्रभावित करती है।
क्या पहले से दाखिल PERM Applications रद्द हो जाएंगी?
इस सवाल का जवाब सावधानी से समझना जरूरी है।
Reuters और अन्य समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी श्रम विभाग प्रभावित कंपनियों से जुड़ी नई और लंबित PERM applications को स्वीकार या प्रोसेस नहीं करेगा। इसका अर्थ है कि लंबित मामलों को आगे बढ़ाने में रुकावट आ सकती है।
लेकिन किसी आवेदन के रुकने, अस्वीकृत होने और कानूनी रूप से रद्द होने में अंतर होता है। प्रभावित कर्मचारियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि उनका आवेदन स्वतः रद्द हो गया है या पहले से प्राप्त सभी स्वीकृतियां अमान्य हो गई हैं।
व्यक्तिगत मामले में निम्नलिखित बातों की पुष्टि करना जरूरी है:
- PERM आवेदन दाखिल हुआ है या नहीं।
- आवेदन लंबित है, स्वीकृत है या किसी अन्य स्थिति में है।
- I-140 Petition दाखिल हुई है या स्वीकृत हो चुकी है।
- कर्मचारी की Priority Date क्या है।
- मौजूदा H-1B स्टेटस और अधिकृत रहने की अवधि कब तक है।
- किसी वैकल्पिक इमिग्रेशन श्रेणी के लिए पात्रता मौजूद है या नहीं।
महत्वपूर्ण: जब तक संबंधित अमेरिकी विभाग विस्तृत निर्देश जारी नहीं करता, हर लंबित आवेदन के अंतिम परिणाम के बारे में निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
अमेरिका में नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले का प्रभाव केवल उन भारतीयों तक सीमित नहीं है जो पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं। यह उन पेशेवरों की योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है जो भविष्य में अमेरिकी IT कंपनियों के माध्यम से नौकरी और स्थायी निवास प्राप्त करना चाहते हैं।
हालांकि, PERM पर रोक और अमेरिका में नौकरी मिलने की संभावना एक ही बात नहीं हैं।
अमेरिकी कंपनियों में नौकरी के अवसर
PERM कार्यक्रम मुख्य रूप से रोजगार-आधारित स्थायी निवास से जुड़ा है। यह अपने आप सभी अमेरिकी IT नौकरियों या सभी वर्क वीजा आवेदनों पर प्रतिबंध नहीं लगाता।
इसलिए भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, AI विशेषज्ञ और अन्य तकनीकी पेशेवरों के लिए अमेरिकी नौकरी बाजार पूरी तरह बंद हो गया है, ऐसा कहना गलत होगा।
लेकिन यदि कोई उम्मीदवार किसी प्रभावित कंपनी में नौकरी के साथ भविष्य में employer-sponsored Green Card की योजना बना रहा है, तो उसे कंपनी की वर्तमान sponsorship policy के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।
भारत से सीधे अमेरिका जाने वाले उम्मीदवार
भारत में काम कर रहे पेशेवरों को नौकरी स्वीकार करने से पहले कुछ सवाल पूछने चाहिए:
- क्या कंपनी संबंधित वर्क वीजा को प्रायोजित करती है?
- क्या कंपनी नई PERM applications दाखिल कर सकती है?
- क्या कंपनी की Green Card sponsorship policy में बदलाव हुआ है?
- क्या नौकरी की पेशकश केवल अस्थायी रोजगार के लिए है या दीर्घकालीन प्रायोजन भी शामिल है?
- यदि इमिग्रेशन प्रक्रिया में देरी होती है, तो कंपनी की नीति क्या होगी?
इन सवालों के जवाब उम्मीदवार को अपनी नौकरी और भविष्य की योजना बेहतर तरीके से बनाने में मदद कर सकते हैं।
क्या अमेरिकी कंपनियां अब स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाएंगी?
अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार अवसरों की रक्षा करना बताया गया है। ऐसे में प्रभावित कंपनियां अपनी भर्ती रणनीति, स्थानीय नियुक्तियों और इमिग्रेशन अनुपालन की समीक्षा कर सकती हैं।
TCS ने पहले ही कहा है कि उसकी अमेरिकी workforce strategy स्थानीय भर्ती और campus recruitment पर केंद्रित है। कंपनी अगले पांच वर्षों में 15,000 अतिरिक्त अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती की योजना भी बता चुकी है।
हालांकि, यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सभी प्रभावित कंपनियां एक ही रणनीति अपनाएंगी।
संभावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं:
- अमेरिका में स्थानीय उम्मीदवारों की भर्ती पर अधिक जोर।
- इमिग्रेशन दस्तावेजों और भर्ती प्रक्रियाओं की अधिक जांच।
- Green Card sponsorship से संबंधित आंतरिक नीतियों की समीक्षा।
- कर्मचारियों को अमेरिका भेजने के बजाय कुछ भूमिकाओं को भारत या अन्य देशों में संचालित करना।
- नौकरी और परियोजना की जरूरत के अनुसार अलग-अलग वर्क वीजा विकल्पों पर विचार।
ये संभावित व्यावसायिक प्रतिक्रियाएं हैं, सभी कंपनियों द्वारा घोषित निर्णय नहीं।
क्या PERM के अलावा दूसरे वीजा विकल्प उपलब्ध हैं?
कुछ परिस्थितियों में अन्य इमिग्रेशन श्रेणियां उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन कोई भी विकल्प सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध नहीं होता।
H-1B Visa
H-1B कुछ विशेष व्यवसायों में विदेशी पेशेवरों को काम करने की अनुमति देता है। PERM पर रोक लगने से H-1B वीजा अपने आप समाप्त नहीं होता। हालांकि, वीजा की पात्रता, वैधता और विस्तार के लिए अलग नियम लागू होते हैं।
L-1 Visa
L-1 वीजा कुछ पात्र कर्मचारियों को किसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के विदेशी कार्यालय से उसके अमेरिकी कार्यालय में स्थानांतरित करने की सुविधा देता है।
L-1A श्रेणी कुछ पात्र प्रबंधकों और अधिकारियों के लिए उपलब्ध होती है। कुछ मामलों में यह EB-1C रोजगार-आधारित Green Card श्रेणी से संबंधित हो सकती है, जिसमें सामान्यतः PERM की आवश्यकता नहीं होती।
लेकिन L-1A सभी सॉफ्टवेयर इंजीनियरों या H-1B कर्मचारियों के लिए सामान्य विकल्प नहीं है। नौकरी की भूमिका, कंपनी में रोजगार का इतिहास और अन्य कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
अन्य रोजगार-आधारित Green Card श्रेणियां
कुछ रोजगार-आधारित श्रेणियों में PERM की आवश्यकता नहीं होती या अलग नियम लागू होते हैं। उदाहरण के लिए, पात्रता के आधार पर EB-1 की कुछ श्रेणियां और EB-2 National Interest Waiver अलग प्रक्रियाओं के तहत आ सकती हैं।
लेकिन किसी श्रेणी का नाम उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं कि हर कर्मचारी उसके लिए पात्र है। उम्मीदवार को अपनी योग्यता, पेशेवर उपलब्धियों और वर्तमान इमिग्रेशन स्थिति के आधार पर विकल्पों का मूल्यांकन करना चाहिए।
भारत की IT इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत की बड़ी IT कंपनियों के लिए अमेरिका महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है। इन कंपनियों को अमेरिकी ग्राहकों के लिए सॉफ्टवेयर विकास, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, डेटा और अन्य तकनीकी सेवाएं प्रदान करनी होती हैं।
PERM कार्यक्रम पर रोक का सीधा संबंध रोजगार-आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से है। फिर भी, यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है, तो कंपनियों की वैश्विक प्रतिभा रणनीति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
संभावित प्रभावों में शामिल हैं:
1. भर्ती रणनीति में बदलाव: कंपनियां स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती को प्राथमिकता दे सकती हैं।
2. कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती: कुछ विदेशी कर्मचारी स्थायी निवास की अनिश्चितता के कारण दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं।
3. लागत और अनुपालन: इमिग्रेशन मामलों की समीक्षा और वैकल्पिक भर्ती व्यवस्था पर अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ सकते हैं।
4. परियोजनाओं की योजना: कंपनियां कुछ भूमिकाओं के स्थान, स्टाफिंग और दीर्घकालीन नियुक्तियों की समीक्षा कर सकती हैं।
5. भारतीय पेशेवरों के करियर विकल्प: अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे कर्मचारियों को अन्य देशों या भारत में अवसरों पर भी विचार करना पड़ सकता है।
इन संभावित प्रभावों की वास्तविक सीमा इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी प्रशासन आगे क्या निर्णय लेता है और कंपनियां किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।
क्या इस फैसले से अमेरिका में भारतीयों का Green Card बैकलॉग और बढ़ सकता है?
भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार-आधारित Green Card प्रक्रिया पहले से ही लंबी हो सकती है। इसमें उपलब्ध वीजा संख्या, आवेदन की श्रेणी, Priority Date और अन्य कानूनी कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
PERM पर रोक इस प्रक्रिया में एक अतिरिक्त बाधा पैदा कर सकती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनके नियोक्ता को नया Labor Certification दाखिल करना है या जिनका आवेदन लंबित है।
हालांकि, दो अलग स्थितियों में अंतर करना जरूरी है:
- PERM प्रक्रिया में रुकावट: प्रभावित नियोक्ता के आवेदन पर आगे कार्रवाई नहीं हो पाती।
- Green Card वीजा बैकलॉग: संबंधित श्रेणी में वीजा उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है।
PERM रोक से हर भारतीय आवेदक की Priority Date बदल जाएगी या सभी मामलों का बैकलॉग समान रूप से बढ़ जाएगा, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
भारतीय कर्मचारियों को अब क्या करना चाहिए?
यदि आप TCS, Infosys, Wipro, HCLTech या किसी अन्य प्रभावित कंपनी में काम करते हैं और अमेरिका में स्थायी निवास की योजना बना रहे हैं, तो घबराने के बजाय अपने मामले की स्थिति स्पष्ट करें।
1. HR और इमिग्रेशन टीम से संपर्क करें
अपनी कंपनी से लिखित रूप में पूछें कि PERM संबंधी रोक का आपके आवेदन पर क्या प्रभाव पड़ता है और कंपनी आगे क्या प्रक्रिया अपनाने की योजना बना रही है।
2. सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें
अपने H-1B दस्तावेज, I-94, PERM से संबंधित रिकॉर्ड, I-140 की स्थिति, Priority Date और कंपनी से प्राप्त इमिग्रेशन संबंधी पत्रों की प्रतियां सुरक्षित रखें।
3. H-1B की समयसीमा जांचें
अपने अधिकृत स्टेटस और रहने की अवधि की जांच करें। यदि छह साल की सामान्य सीमा करीब है, तो संभावित विस्तार या अन्य पात्र विकल्पों के बारे में समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें।
4. बिना सलाह नौकरी न छोड़ें
नौकरी बदलने, देश छोड़ने या किसी वैकल्पिक वीजा श्रेणी में जाने से पहले अपने व्यक्तिगत मामले पर योग्य अमेरिकी इमिग्रेशन वकील से सलाह लें। केवल समाचार रिपोर्ट के आधार पर कोई बड़ा निर्णय न लें।
5. आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें
अमेरिकी Department of Labor, USCIS और संबंधित कंपनी की घोषणाओं को प्राथमिकता दें। नई जानकारी आने पर ही अपने मामले की स्थिति के अनुसार अगला कदम तय करें।
आगे क्या होगा? अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम पर नजर
इस समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि PERM पर रोक कितने समय तक जारी रहेगी और प्रभावित कंपनियों के आवेदनों को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
आने वाले समय में कर्मचारियों और कंपनियों के लिए इन मुद्दों पर स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी:
- क्या रोक की अवधि या दायरा बदलेगा?
- लंबित PERM applications को किस तरह संभाला जाएगा?
- क्या प्रभावित कंपनियों को अतिरिक्त दस्तावेज देने होंगे?
- क्या कंपनियां अपनी Green Card sponsorship policies बदलेंगी?
- क्या अमेरिकी प्रशासन अन्य नियोक्ताओं या इमिग्रेशन श्रेणियों की भी समीक्षा करेगा?
इन सवालों के जवाब सामने आने तक कर्मचारियों को अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट या इस दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि सभी भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरी या Green Card का रास्ता बंद हो गया है।
निष्कर्ष: भारतीय IT कर्मचारियों के लिए बड़ा संकेत, लेकिन H-1B पर स्वतः प्रतिबंध नहीं
अमेरिका का PERM कार्यक्रम संबंधी कदम TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe से जुड़े रोजगार-आधारित Green Card मामलों में महत्वपूर्ण अनिश्चितता पैदा करता है।
इसका सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनकी स्थायी निवास प्रक्रिया के लिए PERM जरूरी है और जो प्रभावित नियोक्ताओं के माध्यम से आवेदन करना चाहते हैं।
TCS ने कहा है कि उसकी समग्र workforce strategy पर महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। फिर भी, किसी कंपनी की भर्ती रणनीति और किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत इमिग्रेशन प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं।
भारतीय पेशेवरों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि PERM पर रोक को H-1B वीजा रद्द होने के बराबर न समझें। अपनी वर्तमान स्थिति, आवेदन के चरण और समयसीमा की जांच करें और व्यक्तिगत कानूनी सलाह के आधार पर आगे की योजना बनाएं।
यह खबर आने वाले दिनों में भारतीय IT कर्मचारियों, NRI समुदाय और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।
अस्वीकरण: यह लेख समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह व्यक्तिगत कानूनी या इमिग्रेशन सलाह नहीं है। किसी आवेदन, वीजा या Green Card से जुड़ा निर्णय लेने से पहले योग्य अमेरिकी इमिग्रेशन वकील से परामर्श करें।
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