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Navratri 2026 Ghatasthapana Muhurat शारदीय नवरात्रि 2026: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री की पूरी लिस्ट
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और घरों तथा मंदिरों में कलश स्थापना यानी घटस्थापना के साथ नौ दिनों के पूजन का शुभारंभ होता है।
भक्तों के लिए सबसे जरूरी सवाल हैं—कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है, दिल्ली-मुंबई समेत अलग-अलग शहरों में पूजा का सही समय क्या रहेगा, राहुकाल कब लगेगा और घटस्थापना के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी?
दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग विवरण के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है।
Ghatasthapana 2026 : शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, विधि और जरूरी नियम कलश स्थापना विधि ?
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। हालांकि, इस वर्ष चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग से जुड़ी विशेष स्थिति भी है, इसलिए पूजा का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग को ध्यान में रखना जरूरी है।
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शारदीय नवरात्रि 2026: मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व | शारदीय नवरात्रि |
| नवरात्रि का पहला दिन | 11 अक्टूबर 2026, रविवार |
| पहले दिन पूजित देवी | मां शैलपुत्री |
| प्रमुख पूजा | कलश स्थापना और घटस्थापना |
| दिल्ली में मुख्य घटस्थापना मुहूर्त | सुबह 6:19 से 10:12 बजे |
| दिल्ली में अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे |
| विजयादशमी | 20 अक्टूबर 2026 |
कलश स्थापना 2026: शहर के अनुसार शुभ मुहूर्त
घटस्थापना का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता। सूर्योदय, स्थानीय मध्याह्न और अन्य पंचांग गणनाओं के कारण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में शुभ मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के अनुसार समय देखना बेहतर है।
नीचे 11 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के लिए घटस्थापना और अभिजीत मुहूर्त दिए गए हैं। सभी समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं।
| शहर | कलश स्थापना का मुख्य मुहूर्त | अभिजीत मुहूर्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | सुबह 6:19–10:12 | 11:44 AM–12:31 PM |
| मुंबई | सुबह 6:31–10:27 | 12:01–12:48 PM |
| कोलकाता | सुबह 5:32–9:26 | 10:59–11:46 AM |
| चेन्नई | सुबह 5:59–9:57 | 11:31 AM–12:19 PM |
| बेंगलुरु | सुबह 6:10–10:07 | 11:42 AM–12:30 PM |
| हैदराबाद | सुबह 6:08–10:05 | 11:39 AM–12:26 PM |
| अहमदाबाद | सुबह 6:35–10:29 | 12:03–12:50 PM |
| पुणे | सुबह 6:28–10:23 | 11:57 AM–12:44 PM |
| जयपुर | सुबह 6:25–10:17 | 11:50 AM–12:36 PM |
| लखनऊ | सुबह 6:04–9:56 | 11:29 AM–12:16 PM |
| पटना | सुबह 5:46–9:39 | 11:12–11:59 AM |
| वाराणसी | सुबह 5:55–9:48 | 11:21 AM–12:08 PM |
| चंडीगढ़ | सुबह 6:23–10:14 | 11:46 AM–12:32 PM |
| भोपाल | सुबह 6:16–10:10 | 11:43 AM–12:30 PM |
| इंदौर | सुबह 6:22–10:16 | 11:49 AM–12:36 PM |
| नागपुर | सुबह 6:08–10:03 | 11:36 AM–12:23 PM |
महत्वपूर्ण: इन शहरवार समयों को प्रकाशित करने से पहले स्थानीय पंचांग से सत्यापित कर लें। अलग-अलग पंचांगों में गणना और मुहूर्त की सीमा अलग हो सकती है।
11 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय: शहरवार लिस्ट
हिंदू पंचांग की परंपरा में राहुकाल को नए शुभ कार्य आरंभ करने के लिए अनुपयुक्त समय माना जाता है। रविवार को राहुकाल दिन के अंतिम हिस्से में आता है, लेकिन इसका सटीक समय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार शहर-दर-शहर बदलता है।
| शहर | राहुकाल |
|---|---|
| दिल्ली (NCR) | शाम 4:28–5:55 बजे |
| मुंबई | शाम 4:50–6:18 बजे |
| कोलकाता | दोपहर 3:46–शाम 5:14 बजे |
| चेन्नई | शाम 4:23–5:52 बजे |
| बेंगलुरु | शाम 4:33–6:02 बजे |
| हैदराबाद | शाम 4:28–5:57 बजे |
| अहमदाबाद | शाम 4:49–6:17 बजे |
| पुणे | शाम 4:46–6:14 बजे |
| जयपुर | शाम 4:35–6:02 बजे |
| लखनऊ | शाम 4:14–5:42 बजे |
| चंडीगढ़ | शाम 4:29–5:55 बजे |
| इंदौर | शाम 4:36–6:04 बजे |
| वाराणसी | शाम 4:07–5:34 बजे |
| नागपुर | शाम 4:24–5:52 बजे |
ध्यान दें: राहुकाल के समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित है। कलश स्थापना के लिए सुबह का मुख्य मुहूर्त प्राथमिकता से देखें। अभिजीत मुहूर्त को वैकल्पिक समय मानने से पहले उस दिन की तिथि, नक्षत्र और योग की स्थिति भी जांचें।

इस साल घटस्थापना के मुहूर्त में क्या है खास?
11 अक्टूबर 2026 को मुख्य घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि में पड़ रहा है। हालांकि, इस समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की स्थिति भी बन रही है। पारंपरिक पंचांग में इन स्थितियों को घटस्थापना के समय पर विचार करते हुए ध्यान में रखा जाता है।
इसलिए केवल एक समय देखकर निर्णय लेने के बजाय अपने शहर के पंचांग, पूजा की परंपरा और स्थानीय पुरोहित की सलाह को ध्यान में रखें। खासकर यदि आप अभिजीत मुहूर्त में स्थापना करने की योजना बना रहे हैं, तो उस समय की स्थानीय गणना की पुष्टि कर लें।
कलश स्थापना के लिए पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
घटस्थापना से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेना चाहिए, ताकि पूजा के दौरान किसी चीज की कमी न हो।
कलश स्थापना की मुख्य सामग्री
मिट्टी का कलश या पूजा के लिए उपयुक्त धातु का पात्र
साफ मिट्टी और जौ बोने के लिए पात्र
जौ के बीज
शुद्ध जल या गंगाजल
आम के पत्ते या स्थानीय परंपरा के अनुसार पत्ते
नारियल
लाल या पीला कपड़ा अथवा चुनरी
मौली या कलावा
रोली, कुमकुम और हल्दी
अक्षत यानी साबुत चावल
सुपारी और सिक्का
फूल और फूलों की माला
धूप, दीपक और घी
कपूर
फल और मिठाई
पान के पत्ते और लौंग, यदि आपकी पूजा परंपरा में आवश्यक हों
पूजा की थाली और चम्मच
मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा
सामग्री की सूची में स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार बदलाव हो सकता है। इसलिए परिवार में प्रचलित पूजा पद्धति को प्राथमिकता दें।
कलश स्थापना की विधि: घर पर कैसे करें घटस्थापना?
नवरात्रि के पहले दिन विधिपूर्वक कलश स्थापना करने के लिए इन चरणों का पालन किया जा सकता है।
1. पूजा स्थल की सफाई करें
सबसे पहले घर के मंदिर या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। पूजा की चौकी पर साफ लाल, पीला या अन्य पारंपरिक वस्त्र बिछाएं। मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और आवश्यक सामग्री पास में रख लें।
2. पूजा और संकल्प करें
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। मां दुर्गा का स्मरण करें और श्रद्धापूर्वक नौ दिनों की पूजा का संकल्प लें। परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और मंगल की प्रार्थना करें।
3. जौ बोने की तैयारी करें
एक साफ पात्र में मिट्टी डालें और उसमें जौ के बीज बोएं। मिट्टी में उचित नमी बनाए रखने के लिए थोड़ा जल छिड़कें। नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुरों की वृद्धि को पारंपरिक रूप से शुभता और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
4. कलश तैयार करें
कलश में परंपरा के अनुसार जल भरें। उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्का या अन्य निर्धारित सामग्री डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। नारियल पर लाल कपड़ा या चुनरी बांधने की परंपरा भी प्रचलित है।
कलश तैयार करते समय ध्यान रखें कि पात्र साफ हो और स्थापना स्थिर स्थान पर की जाए।
5. मां दुर्गा का आह्वान करें
शुभ मुहूर्त में कलश को तैयार किए गए स्थान पर स्थापित करें। मां दुर्गा और मां शैलपुत्री का स्मरण करते हुए पूजा, पुष्प अर्पण, धूप और दीप प्रज्वलित करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप करें।
6. दीपक जलाएं और आरती करें
घटस्थापना के बाद मां दुर्गा की आरती करें। यदि अखंड ज्योति की परंपरा है, तो उसे जलाने से पहले सुरक्षित स्थान, पर्याप्त वायु-संचार और आग से बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जलते दीपक को बिना निगरानी न छोड़ें।
7. नौ दिनों की पूजा का नियम निभाएं
नवरात्रि के दौरान नियमित रूप से पूजा स्थल की सफाई करें, मां को पुष्प अर्पित करें और अपनी परंपरा के अनुसार भोग लगाएं। जौ में जरूरत के अनुसार पानी डालें, लेकिन अत्यधिक पानी न डालें।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा क्यों की जाती है?
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की परंपरा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है।
पौराणिक मान्यताओं में मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री और प्रकृति की शक्ति का स्वरूप माना गया है। उनका वाहन वृषभ यानी बैल है और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है।
भक्त मां शैलपुत्री से स्थिरता, साहस, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।
मां शैलपुत्री का मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। मंत्र जाप की संख्या और विधि परिवार की पूजा परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को फल, दूध, मिठाई और अन्य सात्त्विक खाद्य पदार्थ अर्पित किए जा सकते हैं। कुछ परंपराओं में गाय के घी से बने भोग को विशेष महत्व दिया जाता है।
भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और सात्त्विकता का ध्यान रखें। भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है।
नवरात्रि के पहले दिन कौन-से नियम ध्यान रखें?
पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और श्रद्धा से पूजा करें।
कलश स्थापना स्थानीय पंचांग में दिए गए उपयुक्त मुहूर्त में करें।
पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें।
व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार भोजन तथा उपवास के नियम अपनाएं।
घर में अखंड ज्योति जलाने पर अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
पूजा के दौरान मंत्र, आरती और भोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
धार्मिक मान्यताओं को लेकर अनावश्यक भय या भ्रम से बचें।
नवरात्रि का मूल भाव भक्ति, संयम, आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्प है। पूजा को लेकर किसी प्रकार की विशेष पारिवारिक या क्षेत्रीय परंपरा हो, तो उसके अनुसार विधि अपनाई जा सकती है।
कलश स्थापना 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू हो रही है?
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो रही है। इसी दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना की जाती है।
दिल्ली में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
दिल्ली में 11 अक्टूबर 2026 को मुख्य घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक है। पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में समय की पुष्टि कर लें।

क्या सभी शहरों में कलश स्थापना का समय एक जैसा है?
नहीं। सूर्योदय और स्थानीय पंचांग गणनाओं के कारण शहरों के अनुसार मुहूर्त बदलता है। अपने शहर का समय देखकर ही पूजा का समय तय करना चाहिए।
11 अक्टूबर 2026 को राहुकाल कब है?
दिल्ली में राहुकाल लगभग शाम 4:28 से 5:55 बजे तक बताया गया है। मुंबई और कोलकाता सहित अन्य शहरों में इसका समय अलग हो सकता है। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित है।
घटस्थापना के लिए कौन-सी सामग्री जरूरी है?
मुख्य सामग्री में कलश, जल, मिट्टी, जौ, नारियल, पत्ते, मौली, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीपक और पूजा की थाली शामिल हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार अतिरिक्त सामग्री रखी जा सकती है।
क्या कलश स्थापना के साथ जौ बोना जरूरी है?
जौ बोना घटस्थापना की प्रचलित परंपराओं में शामिल है। इसका महत्व क्षेत्रीय रीति-रिवाज के अनुसार अलग हो सकता है। पूजा की अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार विधि अपनाएं।
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उन्हें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम माना जाता है।
शारदीय नवरात्रि 2026 का समापन कब होगा?
नवरात्रि का नौ दिवसीय पर्व 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगा और विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।
निष्कर्ष
शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ मां दुर्गा की उपासना और कलश स्थापना के साथ 11 अक्टूबर को होगा। पूजा से पहले सामग्री तैयार रखें, अपने शहर के अनुसार घटस्थापना का समय देखें और इस वर्ष नक्षत्र तथा योग की स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करें।
मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नौ दिनों तक श्रद्धा, संयम और सकारात्मकता बनाए रखना ही नवरात्रि के आध्यात्मिक संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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