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Narak Chaturdashi 2026: अभ्यंग स्नान मुहूर्त, छोटी दिवाली पूजा विधि

Narak Chaturdashi 2026: 8 नवंबर को छोटी दिवाली पर जानें अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, नरकासुर वध की कथा, दीपदान और धार्मिक महत्व।

Narak Chaturdashi 2026 : आज 8 नवंबर 2026 को नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली का पर्व एक ही दिन पड़ रहा है।

इस बार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Narak Chaturdashi 2026 का अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले किया जाता है, जबकि शाम को अमावस्या में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होगी।

दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक था। चतुर्दशी तिथि सुबह 11:27 बजे तक रहेगी।

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी कब है? जानें छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और धार्मिक कथा

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी और कुछ क्षेत्रों में काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत, शरीर और मन की शुद्धि तथा जीवन से नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।

साल 2026 में नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली का पर्व रविवार, 8 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस बार खास बात यह है कि छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली दोनों एक ही दिन पड़ रही हैं। सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान की परंपरा निभाई जाएगी और शाम को अमावस्या के अवसर पर दीप जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान कब करना चाहिए, स्नान में कौन-सा तेल और उबटन इस्तेमाल किया जाता है, छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए और भगवान श्रीकृष्ण का नरकासुर से क्या संबंध है, तो इस लेख में जानिए पूरी जानकारी।

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Narak Chaturdashi 2026 कब है? जानें छोटी दिवाली की तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसे धार्मिक मान्यताओं में पापों और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।

साल 2026 में नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर को मनाई जा रही है। इस बार चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। इसी वजह से काली चौदस की रात्रि पूजा और नरक चतुर्दशी का सुबह का स्नान अलग-अलग समय पर पड़ रहे हैं।

विवरणतारीख और समय
नरक चतुर्दशीरविवार, 8 नवंबर 2026
छोटी दिवालीरविवार, 8 नवंबर 2026
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
अभ्यंग स्नान मुहूर्त (दिल्ली)सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक
दिल्ली में सूर्योदयसुबह 6:38 बजे
मुख्य दिवाली और लक्ष्मी पूजारविवार, 8 नवंबर की शाम

स्रोत: द्रिक पंचांग। समय दिल्ली के लिए है। दूसरे शहरों में सूर्योदय और मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

Narak Chaturdashi 2026 पर अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त

नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल लगाकर स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्नान से तन और मन की शुद्धि होती है और जीवन में सुख, सौभाग्य तथा सकारात्मकता आती है।

दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को अभ्यंग स्नान का शुभ समय इस प्रकार है:

अभ्यंग स्नान मुहूर्त

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5:41 AM – 6:38 AM

रविवार, 8 नवंबर 2026

कुल अवधि

57 मिनट

चतुर्दशी तिथि समाप्त

सुबह 11:27 बजे

सूर्योदय

सुबह 6:38 बजे

नई दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग के अनुसार।

अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले क्यों किया जाता है?

परंपरा के अनुसार नरक चतुर्दशी पर चंद्रमा की उपस्थिति के समय और सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। इस दिन चतुर्दशी तिथि और निर्धारित प्रातःकालीन समय का विशेष महत्व होता है। इसलिए स्नान का मुहूर्त सामान्य सुबह के स्नान से अलग रखा जाता है।

इस बार दिल्ली में निर्धारित समय सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक था। जिन लोगों ने इस समय स्नान नहीं किया, वे घबराएं नहीं। स्नान और स्वच्छता का महत्व अपनी जगह है; धार्मिक मुहूर्त को लेकर अनावश्यक भय या अपराधबोध रखने की आवश्यकता नहीं है।

अभ्यंग स्नान क्या होता है? जानें इसका धार्मिक महत्व

अभ्यंग स्नान दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘अभ्यंग’ का अर्थ है शरीर पर तेल की मालिश करना और ‘स्नान’ का अर्थ है नहाना। इस परंपरा में स्नान से पहले शरीर पर तेल लगाया जाता है और फिर उबटन या अन्य पारंपरिक सामग्री से स्नान किया जाता है।

आयुर्वेदिक परंपराओं में भी तेल मालिश का उल्लेख मिलता है। हालांकि नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का धार्मिक महत्व विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय से जुड़ा हुआ है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को पापों और नकारात्मकता से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसे नरक के भय से मुक्ति और नए जीवन की सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है।

अभ्यंग स्नान में किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है?

अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में स्नान की परंपरा थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य रूप से इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है:

  • तिल का तेल या पारंपरिक मालिश का तेल

  • बेसन या प्राकृतिक उबटन

  • हल्दी

  • चंदन

  • सुगंधित जड़ी-बूटियां या पारंपरिक स्नान सामग्री

  • स्वच्छ पानी

  • साफ कपड़े और तौलिया

धार्मिक परंपरा में तिल के तेल का विशेष उल्लेख मिलता है। द्रिक पंचांग भी नरक चतुर्दशी के अभ्यंग स्नान में तिल के तेल से उबटन लगाने की परंपरा बताता है।

Narak Chaturdashi 2026
Narak Chaturdashi 2026

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान कैसे करें? जानें पूरी विधि

अगर आप पहली बार नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान कर रहे हैं, तो नीचे दी गई पारंपरिक विधि अपना सकते हैं। अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान की तैयारी करें

नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले उठने की परंपरा है। स्नान से पहले घर और स्नानघर को स्वच्छ रखें। तेल, उबटन, साफ कपड़े और अन्य जरूरी सामग्री पहले से तैयार कर लें।

2. शरीर पर तिल के तेल से मालिश करें

परंपरा के अनुसार तिल के तेल से शरीर पर हल्की मालिश की जाती है। इसे अभ्यंग कहा जाता है। मालिश के बाद कुछ समय रुककर स्नान किया जाता है।

3. उबटन लगाकर स्नान करें

बेसन, हल्दी और चंदन जैसे पारंपरिक पदार्थों से तैयार उबटन का इस्तेमाल किया जा सकता है। त्वचा के अनुकूल सामग्री ही चुनें और किसी भी चीज से एलर्जी या जलन हो तो उसका प्रयोग न करें।

4. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें

स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण और अपने आराध्य देव का स्मरण करें।

5. भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें

परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद दिनभर की पूजा और दीपावली की तैयारियां शुरू कर सकते हैं।

नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा: भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों किया नरकासुर का वध?

नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस नरकासुर की कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरकासुर ने अपनी शक्ति और अहंकार के कारण तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। उसने अनेक राजाओं को परेशान किया और बड़ी संख्या में कन्याओं को बंदी बना लिया था।

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर के विरुद्ध युद्ध किया।

कथा के अनुसार युद्ध में सत्यभामा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंततः नरकासुर का अंत हुआ। उसके वध के बाद बंदी बनाई गई स्त्रियों को मुक्त कराया गया और लोगों ने अत्याचार के अंत की खुशी में दीप जलाए।

इसी घटना की स्मृति में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाने की परंपरा प्रचलित हुई।

नरकासुर के वध से क्या संदेश मिलता है?

इस कथा का सबसे बड़ा संदेश है कि अहंकार, अत्याचार और बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।

नरक चतुर्दशी हमें याद दिलाती है कि जीवन में क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मकता को दूर करके प्रेम, करुणा और सद्भाव को अपनाना चाहिए।

छोटी दिवाली पर दीपदान क्यों किया जाता है?

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाने की परंपरा है। लोग अपने घर के मुख्य द्वार, आंगन, तुलसी के पास और पूजा स्थल पर दीप जलाते हैं।

दीपक को अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा हमें अपने जीवन से अज्ञान, निराशा और नकारात्मक विचारों को दूर करने का संदेश देती है।

कुछ परिवारों में इस दिन यमराज के निमित्त भी दीपदान किया जाता है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी तिथि और विधि में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा का पालन करना उचित है।

नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और रूप चौदस में क्या अंतर है?

कई लोगों के मन में सवाल होता है कि नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस क्या अलग-अलग त्योहार हैं या एक ही पर्व के अलग नाम हैं?

दरअसल, ये नाम कई क्षेत्रों में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी से जुड़ी परंपराओं के लिए इस्तेमाल होते हैं, लेकिन इनके धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय रीति-रिवाजों में अंतर हो सकता है।

नामप्रमुख महत्व
नरक चतुर्दशीभगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की स्मृति
छोटी दिवालीदीप जलाने और दिवाली उत्सव की तैयारी
रूप चौदसअभ्यंग स्नान, उबटन और सौंदर्य-संरक्षण की परंपरा
रूप चतुर्दशीशरीर और मन की शुद्धि से जुड़ा पर्व
काली चौदसकुछ क्षेत्रों में देवी काली या हनुमान जी की विशेष पूजा

काली चौदस कब मनाई जाती है?

गुजरात और कुछ अन्य क्षेत्रों में काली चौदस का विशेष महत्व है। इस अवसर पर देवी काली या हनुमान जी की पूजा की जाती है। साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रही। इस कारण कुछ रात्रिकालीन परंपराएं 7 नवंबर की रात को और अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह को रखा गया।

इसलिए काली चौदस और नरक चतुर्दशी के अनुष्ठानों को हर जगह एक ही समय पर करना जरूरी नहीं है।

2026 में छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली एक ही दिन क्यों हैं?

यह इस साल के त्योहारों की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। कई लोग जानना चाहते हैं कि जब छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली अलग-अलग दिन मनाई जाती हैं, तो 2026 में दोनों 8 नवंबर को क्यों पड़ रही हैं?

इसका कारण चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों का समय है।

नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान उस सुबह किया जाता है जब निर्धारित प्रातःकालीन समय में चतुर्दशी तिथि रहती है। वहीं मुख्य दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि में प्रदोष काल के दौरान की जाती है।

इस साल चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे समाप्त हो रही है। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू होती है। इसी कारण नरक चतुर्दशी का स्नान और मुख्य दिवाली की शाम की पूजा एक ही कैलेंडर तारीख पर आ रहे हैं।

छोटी दिवाली पर घर में क्या-क्या करना चाहिए?

छोटी दिवाली केवल स्नान और पूजा तक सीमित नहीं है। इस दिन घर की साफ-सफाई, सजावट और दीप जलाने की भी परंपरा है।

घर की सफाई करें: घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और आंगन को साफ रखें।

रंगोली बनाएं: मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाकर घर को सजाएं।

दीपक जलाएं: शाम को घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाएं।

भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें: नरकासुर वध की कथा याद करके धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।

परिवार के साथ त्योहार मनाएं: घर के सदस्यों के साथ खुशियां बांटें और जरूरतमंदों की सहायता करें।

नरक चतुर्दशी पर क्या करें और किन बातों से बचें?

धार्मिक त्योहारों में परंपराओं के साथ-साथ व्यवहार और जीवनशैली का भी महत्व होता है।

क्या करेंकिन बातों से बचें
सुबह स्वच्छता के साथ स्नान करेंजल्दबाजी में असुरक्षित स्नान न करें
भगवान का स्मरण करेंकिसी के प्रति द्वेष न रखें
घर में दीपक जलाएंदीपक को ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें
परिवार के साथ खुशियां बांटेंअनावश्यक विवाद से बचें
जरूरतमंदों की मदद करेंदिखावे और फिजूलखर्ची से बचें
सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल उत्सव मनाएंपटाखों से होने वाले धुएं और शोर को बढ़ावा न दें

नरक चतुर्दशी 2026 से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

1. नरक चतुर्दशी 2026 कब मनाई जाएगी?

नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जा रही है। इस दिन छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली भी पड़ रही हैं।

2. 2026 में अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को अभ्यंग स्नान का शुभ समय सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक था। दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है।

3. अभ्यंग स्नान क्या होता है?

अभ्यंग स्नान में नहाने से पहले शरीर पर तेल की मालिश की जाती है। इसके बाद उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। यह नरक चतुर्दशी की प्रमुख धार्मिक परंपरा है।

4. अभ्यंग स्नान में कौन-सा तेल इस्तेमाल करना चाहिए?

धार्मिक परंपरा में तिल के तेल का विशेष महत्व बताया गया है। अपनी त्वचा के अनुकूल तेल का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

5. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली क्यों कहा जाता है?

इस दिन दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय का उत्सव मनाया जाता है। यह मुख्य दिवाली उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसे छोटी दिवाली कहा जाता है।

6. नरक चतुर्दशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और उनके नरकासुर वध की कथा का विशेष महत्व है। कुछ क्षेत्रों में देवी काली, हनुमान जी और यमराज से जुड़ी परंपराएं भी निभाई जाती हैं।

7. नरक चतुर्दशी और रूप चौदस में क्या अंतर है?

रूप चौदस नरक चतुर्दशी का ही एक प्रचलित नाम है। इस दिन अभ्यंग स्नान और उबटन लगाने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।

8. क्या छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली 2026 में एक ही दिन हैं?

हां, साल 2026 में दोनों रविवार, 8 नवंबर को हैं। चतुर्दशी तिथि सुबह समाप्त हो रही है और अमावस्या के दौरान शाम को लक्ष्मी पूजा की जाएगी।

9. नरक चतुर्दशी पर कितने दीपक जलाने चाहिए?

दीपकों की संख्या के लिए सभी परिवारों में एक जैसी अनिवार्यता नहीं है। लोग अपनी श्रद्धा, सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपक जलाते हैं।

10. अगर अभ्यंग स्नान का मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें?

मुहूर्त निकल जाने पर घबराने की जरूरत नहीं है। आप सामान्य रूप से स्नान करके स्वच्छता और श्रद्धा के साथ पूजा कर सकते हैं। किसी भी धार्मिक परंपरा को भय या दबाव के रूप में नहीं लेना चाहिए।

नरक चतुर्दशी 2026: बुराई पर अच्छाई की जीत और नई शुरुआत का पर्व

नरक चतुर्दशी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का संदेश देने वाला पर्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय हमें सिखाती है कि बुराई और अहंकार का अंत निश्चित है। अभ्यंग स्नान की परंपरा शरीर और मन की स्वच्छता का संदेश देती है, जबकि दीपदान जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का प्रतीक है।

इस साल 8 नवंबर को छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली एक ही दिन मनाई जा रही हैं। ऐसे में सुबह अभ्यंग स्नान, दिन में परिवार के साथ उत्सव की तैयारी और शाम को मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा के साथ दीपावली का पर्व मनाएं।

समयधारा की ओर से आप सभी को नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आपका जीवन सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के प्रकाश से जगमगाता रहे।

 नोट: यह लेख दिल्ली के पंचांग समय पर आधारित है। देश के अन्य शहरों के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और मुहूर्त की पुष्टि करें।


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Varsa

वर्षा कोठारी एक उभरती लेखिका है। पत्रकारिता जगत में कई ब्रैंड्स के साथ बतौर फ्रीलांसर काम किया है। अपने लेखन में रूचि के चलते समयधारा के साथ जुड़ी हुई है। वर्षा मुख्य रूप से मनोरंजन, हेल्थ और जरा हटके से संबंधित लेख लिखती है लेकिन साथ-साथ लेखन में प्रयोगात्मक चुनौतियां का सामना करने के लिए भी तत्पर रहती है।

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