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कोरोना निगेटिव होने के बाद हो रही है ब्रेन स्ट्रोक,नर्वस सिस्टम परेशानियां

कई मरीज़ स्ट्रोक यानी लकवे का शिकार हो रहे हैं और इनमें से एक तिहाई मरीज़ों को बोलने में दिक़्क़त हो रही है...

नई दिल्ली:Corona recovery side effects-क्या आप कोरोना से ठीक हो गए है? क्या आपकी कोरोना रिपोर्ट अब निगेटिव (COVID-19 negative) आई है? और आप सोच रहे है कि सबकुछ ठीक हो गया है और अब आपका शरीर बिल्कुल पहले की तरह स्वस्थ हो गया है, तो आप गलत है।

कोरोना को मात देकर ठीक होने वालों को लेकर हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। कोरोना से ठीक होने के बाद अब मरीजों में इसके साइड इफेक्ट (Corona recovery side effects) अन्य बीमारियों के रूप में देखे जा रहे है।

एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि कोरोना निगेटिव(Corona negative) होने के बाद भी मरीज अपने शरीर और दिमाग को पहले जैसा महसूस नहीं कर पा रहे।

कुछ लोगों के नर्वस सिस्टम प्रभावित हुए (After corona recovery nervous system problems) है तो कुछ को बातचीत करने या उनके लॉजिकल सिस्टम में दिक्कत आ रही है।

दरअसल, हाल ही में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों के हाल पर एक रिसर्च की गई है, इसके अनुसार:

Corona recovery side effects:

-अस्पताल में भर्ती 5 में से 4 कोविड-19 (Covid-19) मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल यानी दिमाग़ का रोग देखा जा रहा है।

कई मरीज़ स्ट्रोक यानी लकवे का शिकार हो रहे हैं और इनमें से एक तिहाई मरीज़ों को बोलने में दिक़्क़त हो रही है।

COVID-19 के कारण 40% मरीज़ों में ये परेशानी लम्बी और गंभीर रूप में है।

-ऐसे ही एक मरीज ने डॉक्‍टर को बताया कि उनके गले से आवाज नहीं निकल रही और बोलने में समस्‍या आ रही है।

डॉक्‍टर ने उन्‍हें दिलासा देते हुए कहा कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।

गौरतलब है कि 48 साल के तिरुपति स्वामी 8 अगस्त को कोविड पॉज़िटिव हुए थे, तबीयत बिगड़ने के बाद जब 19 अगस्त को मुंबई के wockhardt हॉस्पिटल में भर्ती हुए तब पता चला निगेटिव तो हो गए हैं

लेकिन ब्रेन स्ट्रोक(Corona recovery patients facing brain stroke) यानी लकवा के कारण ब्रेन का बायां हिस्सा डैमेज हुआ है।

डॉक्टर बताते हैं कि कोविड के कारण होने वाला लकवा ज़्यादा गंभीर है और इनमें से एक तिहाई मरीज़ों को बोलने में दिक़्क़त हो रही है। अटक-अटक कर मुंह से बाहर आ पाते हैं।

फोर्टिस हॉस्टिपल के डॉ पवन ओझा के अनुसार, ‘’जो कोविड से होने वाला स्ट्रोक है, वो बिना कोविड के स्ट्रोक(Stroke)से अलग है।

 ज़्यादा सीवियर है, जिससे ब्रेन को ज़्यादा डैमेज हो रही है। ये मरीज़ 40-50 साल के बीच वाले हैं।

इनको जो हम स्ट्रोक वाली नॉर्मल दवा दे रहे हैं लेकिन उससे अच्छे रिज़ल्ट नहीं दिख रहे।

इसलिए इन मरीज़ों में डिसएबिलिटी (अक्षमता) और मॉर्टैलिटी रेट (मृत्‍यु दर) भी ज़्यादा है।

कई मरीज़ों में स्ट्रोक के लक्षण, कोविड से ठीक होने के बाद भी दिखे हैं। इनमें अधिकतर 50 वर्ष तक की उम्र वाले है, इनमें से क़रीब एक तिहाई मरीज़ों में स्पीच की दिक़्क़त है।

जैसे क्या कहना है ठीक से बोल नहीं पाते, शब्दों का चुनाव ठीक से नहीं कर पाते। या आप जो इन्हें कह रहे हैं इन्हें ठीक से समझ नहीं आता।”

इसी क्रम में ब्रेन के वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि कई मरीज़ स्ट्रोक के बाद ठीक हो तो रहे हैं लेकिन 40% मरीज़ों की दिमाग़ी तकलीफ़ लंबी और गंभीर दिख रही है।

ये महामारी नई है और इस वायरस से जुड़ी तकलीफ़ें भी! स्टडी जारी है, इसका प्रभाव समझने में वक़्त लगेगा।।।

 

Corona recovery side effects

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