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हारी बाजी को जीतना बीजेपी को आता है: मणिपुर में राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का दिया न्यौता,जबकि कांग्रेस बनी बड़ी पार्टी

इंफाल/कोहिमा, 14 मार्च: कहते है कि जो हारी बाजी जीत लें वही सिकंदर है और मणिपुर व गोवा की राजनीति में कुछ ऐसा ही करिश्मा बीजेपी ने कर दिखाया है।  इन दोनों राज्यों में कांग्रेस ही बड़ी पार्टी के रूप में जीती लेकिन सत्ता का सुख बीजेपी ने झटक लिया। साम,दाम,दंड, भेद इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सब कर दिखाया और इसी के चलते आज मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्लाह ने भाजपा के नेता एन. बीरेन सिंह को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया है जबकि कांग्रेस मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है लेकिन सत्ता का सेहरा पहनाने में अहम भूमिका निभाने वाली अन्य पार्टियों नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के प्रमुखों ने भाजपा को समर्थन दे दिया  है और इसी कारण कांग्रेस जीतकर भी मणिपुर में हारती दिख रही है और बीजेपी हारकर भी जीतती प्रतीत हो रही है। वैसे कांग्रेस ने भी राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने  का दावा रविवार को पेश किया था लेकिन बीजेपी ने 60 सदस्यीय विधानसभा में 33 विधायकों के समर्थन का दावा पेश कर दिया, जिससे राज्यपाल सहमत हो गई है। यहां कांग्रेस को 28 सीटें मिली है और बीजेपी को महज 21 सीटें मिली लेकिन सरकार फिर भी बीजेपी की बन रही है।

दरअसल, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के प्रमुखों ने मंगलवार को कहा कि वे मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली गैर कांग्रेसी सरकार का समर्थन करेंगे। एनपीपी प्रमुख कोनराड के. संगमा ने कहा कि मणिपुर में जल्द एक गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन किया जाएगा और उनकी पार्टी भाजपा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का समर्थन करेगी।

नागालैंड के मुख्यमंत्री शुरहोजेली लीजीत्सु ने कहा कि उनका दल नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) पड़ोसी राज्य मणिपुर में भाजपा की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार का समर्थन करेगा।

संगमा ने आईएएनएस से कहा, “हम सिर्फ राज्यपाल (नजमा हेपतुल्ला) द्वारा नई सरकार बनाने के निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा नागा पीपुल्स फ्रंट ने हेपतुल्ला को भाजपानीत गठबंधन सरकार के समर्थन में एक पत्र सौंपा है।

संगमा ने कहा कि एनपीएफ ने मणिपुर विधानसभा चुनावों में चार सीटों पर जीत हासिल की है। पार्टी ने नए चुने गए विधायकों की राज्यपाल के सामने भी पेश किया।

एनपीपी और एनपीएफ ने मणिपुर विधानसभा चुनाव में 4-4 सीटें जीती हैं।

एनपीपी से एक मात्र लोकसभा सदस्य संगमा ने कहा, “सभी विधायक (गैर कांग्रेसी) एकजुट हैं।”

एनपीएफ के प्रमुख शुरहोजेली ने कहा कि उन्होंने मणिपुर में भाजपा की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार में शामिल होने से पहले कोई शर्त नहीं रखी है।

एनपीएफ और एनपीपी बीते साल मई में असम के गुवाहाटी में बने पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन के प्रमुख साझीदार हैं। इन दलों ने इलाके को ‘कांग्रेस से छुटकारा दिलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में पूर्वोत्तर भाग के समग्र विकास के अपने लक्ष्य’ की घोषणा की थी।

एनपीएफ ने 2003 से डेमोक्रेटिक एलायंस आफ नागालैंड के नाम से गैर-कांग्रेसी राजनीतिक दलों और भाजपा से गठबंधन किया हुआ है।

–आईएएनएस

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