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फंसे हुए कर्ज(NPA) के चलते SBI को 7,718 करोड़ रुपये का नुकसान

मुंबई, 23 मई : सरकारी बैंकों पर लगातार दवाब का जिक्र करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने मंगलवार को मार्च में खत्म हुई तिमाही में 7,718 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी है।

बैंक ने शेयर बाजार फाइलिंग में यह जानकारी दी है।

देश के सबसे बड़े कर्जदाता ने पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में 2,815 करोड़ रुपये पीएटी (कर चुकाने के बाद मुनाफा) दर्ज किया था। 

समीक्षाधीन तिमाही में एसबीआई को इसकी पिछली तिमाही की तुलना में तीन गुना अधिक नुकसान हुआ है। वित्तवर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में बैंक का घाटा 2,416 करोड़ रुपये रहा था। 

समीक्षाधीन तिमाही में बैंक का सकल एनपीए (फंसे हुए कर्ज) 2,23,427 करोड़ रुपये रहा, जोकि 10.91 फीसदी अधिक है, जबकि पिछली तिमाही में इसमें 10.35 फीसदी की वृद्धि हुई थी।

जबकि एक साल पहले समान तिमाही में बैंक के एनपीए में 6.9 फीसदी की वृद्धि हुई थी। 

जनवरी-मार्च तिमाही में बैंक का शुद्ध एनपीए अनुपात 5.73 फीसदी रहा, जबकि इसकी पिछली में यह 5.61 फीसदी था। 

एसबीआई के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने यहां एक प्रेसवार्ता में कहा कि बैंक प्रोविजन कवरेज अनुपात 66 फीसदी है, जो इसके बैलेंस शीट की मजबूती को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “वित्तवर्ष 2017-18 समूचे उद्योग के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है और एसबीआई कोई अपवाद नहीं है। घाटे की रकम बहुत बड़ी दिख रही है, लेकिन बैलेंस शीट की मजबूती को भी देखें।”

फंसे हुए कर्जो के संबंध में अध्यक्ष ने कहा कि बैंक ने ‘अतीत को पीछे छोड़ दिया है’, हालांकि फंसे हुए कर्ज के चक्र का कुछ अवशेष बचा रहता है।

–आईएएनएस

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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन www.samaydhara.com के को-फाउंडर और बिजनेस हेड है। लेखन के प्रति गहन जुनून के चलते उन्होंने समयधारा की नींव रखने में सहायक भूमिका अदा की है। एक और बिजनेसमैन और दूसरी ओर लेखक व कवि का अदम्य मिश्रण धर्मेश जैन के व्यक्तित्व की पहचान है।

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