
JPSC-JSSC Protest Today: परीक्षा रद्द करने पर सरकार तैयार, लेकिन छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं! आज विधानसभा मार्च के बीच सबसे बड़ा सवाल—क्या CBI जांच पर बनेगी बात?
झारखंड में आज हजारों छात्रों का बड़ा प्रदर्शन! आखिर JPSC-JSSC को लेकर इतना बड़ा आंदोलन क्यों?
झारखंड की राजधानी रांची में आज, 10 अगस्त 2026, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के आंदोलन का सबसे अहम दिन माना जा रहा है। JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोप, परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन CBI जांच और JSSC-CGL से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद छात्रों ने आज पुरानी विधानसभा परिसर से नई विधानसभा की ओर बड़े मार्च का ऐलान किया है। सरकार ने मार्च टालने की अपील की है और रांची में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर JPSC-JSSC को लेकर छात्रों का गुस्सा इतना बढ़ क्यों गया है? सरकार ने क्या-क्या मांगें मान ली हैं और किन मुद्दों पर अभी भी टकराव बना हुआ है?
आइए पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।
आज रांची में क्या होने वाला है?
छात्र संगठनों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। रविवार तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों से अभ्यर्थियों का रांची पहुंचना जारी था और आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र जुटे।
रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन के 16वें दिन रविवार को पुरानी विधानसभा परिसर और मोरहाबादी क्षेत्र में भीड़ बढ़ती गई। प्रदर्शन स्थल पर कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।
सोमवार सुबह करीब 10 बजे पुरानी विधानसभा परिसर से मार्च निकालने की योजना है, जो नई विधानसभा की ओर जाएगा।
प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। रांची पुलिस ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्थिति में परेशानी नहीं होगी, लेकिन हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर कार्रवाई की जाएगी।
यानी आज का दिन इस पूरे आंदोलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
JPSC-JSSC विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ?
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा या एक रिजल्ट तक सीमित नहीं है।
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच देरी, परिणाम, परीक्षा संचालन और कथित गड़बड़ियों को लेकर असंतोष रहा है। 2026 में अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने इस नाराजगी को और बढ़ा दिया।
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सबसे ताजा विवाद 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर सामने आया।
इसके अलावा JSSC-CGL और JSSC की दूसरी परीक्षाओं को लेकर भी छात्र सवाल उठा रहे हैं।
यही वजह है कि मौजूदा आंदोलन धीरे-धीरे एक परीक्षा के विरोध से निकलकर पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग में बदल गया है।
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर क्या विवाद है?
14वीं JPSC Combined Civil Services Examination इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र बनी।
JPSC ने प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी किए थे। इस परीक्षा में 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया था।
इसके बाद अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए।
उनकी प्रमुख आपत्तियों में शामिल रहे—
- कैटेगरी के अनुसार कटऑफ जारी न किया जाना
- मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया पर सवाल
- परीक्षा परिणाम तैयार करने की पारदर्शिता पर संदेह
- आयोग के सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल
- कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग
इन आरोपों के बीच मामले की जांच भी आगे बढ़ी और JPSC से जुड़े अधिकारियों तथा परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आईं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि छात्रों द्वारा लगाए गए सभी आरोप अंतिम रूप से सिद्ध हो चुके हैं, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। जांच और कानूनी प्रक्रिया का परिणाम अलग बात है।
छात्रों को JSSC-CGL पर सबसे ज्यादा आपत्ति क्यों है?
आंदोलन का दूसरा बड़ा केंद्र JSSC-CGL परीक्षा है।
छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यही वजह है कि सरकार द्वारा 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की सहमति के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ।
छात्रों की मांग है कि केवल एक परीक्षा रद्द करने से समस्या हल नहीं होगी। अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गंभीर अनियमितता हुई है तो उसकी जड़ तक जांच होनी चाहिए।
इसीलिए आंदोलनकारी CBI जांच की मांग पर जोर दे रहे हैं।
JSSC Field Worker परीक्षा ने भी बढ़ाई नाराजगी
JPSC-JSSC विवाद के बीच JSSC की Field Worker Recruitment Examination भी सवालों के घेरे में आई।
19 जुलाई 2026 को हुई इस परीक्षा के लिए 3,22,867 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन सिर्फ 86,444 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। यानी लगभग 75 फीसदी पंजीकृत उम्मीदवार परीक्षा में नहीं पहुंचे।
कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों की दूरी और एडमिट कार्ड/ईमेल सूचना से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की।
इसके अलावा संथाली भाषा के पेपर को लेकर भी उम्मीदवारों ने सवाल उठाए। कुछ अभ्यर्थियों और प्रतिनिधियों ने दावा किया कि पेपर के कई सवाल निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे और उनका स्तर अपेक्षाकृत काफी ऊंचा था।
इन अलग-अलग घटनाओं ने छात्रों के बीच यह धारणा मजबूत की कि समस्या केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है।
सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
यही इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
रविवार की बातचीत के दौरान सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर सहमति जताने की बात कही।
रिपोर्टों के अनुसार इनमें प्रमुख रूप से—
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करना,
ACF परीक्षा रद्द करना,
परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की जांच,
और भर्ती परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि आंदोलन कर रहे छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं।
लेकिन छात्रों का तर्क है कि सबसे महत्वपूर्ण मांग अभी बाकी है—CBI जांच।
यहीं आकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत रुक गई।
CBI जांच पर सरकार और छात्रों में क्यों नहीं बनी बात?
यह इस आंदोलन का सबसे बड़ा टकराव है।
छात्र चाहते हैं कि JPSC-JSSC से जुड़े कथित भर्ती घोटाले और अनियमितताओं की जांच CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए।
दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि खासकर JSSC-CGL मामला अदालतों की निगरानी में रहा है और इसलिए राज्य सरकार के स्तर से तुरंत CBI जांच का आदेश देना आसान नहीं है।
सरकार ने इसके बदले कुछ वैकल्पिक जांच व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच ED को सौंपने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति का विकल्प रखा।
लेकिन छात्र इन विकल्पों से संतुष्ट नहीं हुए।
उनका कहना है कि उन्हें लिखित और स्पष्ट CBI जांच का आदेश चाहिए।
JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे से क्या बदला?
रविवार को इस पूरे मामले में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ।
JPSC के तीन सदस्यों—
- डॉ. अजीता भट्टाचार्य
- डॉ. अनिमा हांसदा
- डॉ. जमाल अहमद
ने इस्तीफा दे दिया।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया। इससे पहले JPSC के अध्यक्ष एल. खियांग्ते भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके थे।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि रिपोर्टों के अनुसार CID जांच के सिलसिले में इन सदस्यों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे।
अब JPSC के शीर्ष स्तर पर बड़े बदलाव की स्थिति बन गई है।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन इस्तीफों का मतलब किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि है। इस्तीफा और अपराध सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं।
क्या JPSC की 14वीं परीक्षा पूरी तरह रद्द होगी?
सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने पर सहमति जताई है। इसलिए आंदोलन के बीच यह सरकार की सबसे बड़ी पेशकशों में से एक है।
लेकिन यहां छात्रों की चिंता यह है कि परीक्षा रद्द करने के बाद आगे क्या होगा?
उनके सवाल हैं—
नई परीक्षा कब होगी?
नई परीक्षा कितनी पारदर्शी होगी?
पुरानी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या नई परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा?
इसी कारण छात्र सिर्फ परीक्षा रद्द होने को पर्याप्त समाधान नहीं मान रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
मौजूदा आंदोलन को समझने के लिए छात्रों की मांगों को मोटे तौर पर इस तरह समझा जा सकता है—
1. CBI से निष्पक्ष जांच
छात्रों की सबसे बड़ी मांग यही है कि JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराई जाए।
2. JSSC-CGL मामले की जांच
छात्र JSSC-CGL को लेकर भी ठोस कार्रवाई चाहते हैं और इसे मौजूदा आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल कर रहे हैं।
3. दोषियों पर कार्रवाई
अगर जांच में कोई अधिकारी, एजेंसी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग है।
4. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
छात्र चाहते हैं कि परीक्षा से लेकर रिजल्ट और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो।
5. समय पर परीक्षाएं और परिणाम
लंबे समय तक भर्ती अटकने से अभ्यर्थियों की उम्र और करियर दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए समयबद्ध भर्ती की मांग भी महत्वपूर्ण है।
6. भविष्य की परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने की व्यवस्था
छात्रों का तर्क है कि केवल मौजूदा विवाद खत्म करना काफी नहीं है। सिस्टम में ऐसा बदलाव होना चाहिए जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए।
छात्रों का गुस्सा सिर्फ एक परीक्षा को लेकर नहीं है
इस आंदोलन की सबसे बड़ी कहानी यही है।
एक सरकारी नौकरी के लिए युवा कई वर्षों तक तैयारी करता है। कोचिंग, किताबें, किराया, यात्रा और परिवार की उम्मीद—इन सबके बीच उसकी सबसे बड़ी पूंजी उसका समय होता है।
अगर परीक्षा देर से हो, पेपर को लेकर विवाद हो, रिजल्ट पर सवाल उठें या भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक अदालत और जांच में फंसी रहे, तो उम्मीदवार के लिए नुकसान केवल आर्थिक नहीं होता।
उसकी उम्र निकलती है, दूसरी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होती है और मानसिक दबाव बढ़ता है।
यही कारण है कि झारखंड के इस आंदोलन को सिर्फ राजनीतिक विरोध के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।
आंदोलन में राजनीति की एंट्री भी हो चुकी है
जैसे-जैसे छात्रों का प्रदर्शन बड़ा हुआ, राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज तेज की।
विपक्षी दलों ने सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने के आरोप लगाए और स्वतंत्र जांच की मांग की। BJP और उसके युवा संगठन ने भी JPSC कार्यालय तथा कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
वहीं सरकार का कहना है कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत से होना चाहिए और राजनीतिक दलों को आंदोलन का फायदा उठाने से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कहा है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा युवा रोजगार से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है।
आज के विधानसभा मार्च में क्या-क्या हो सकता है?
आज के मार्च को लेकर तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी।
पहला, कितनी बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर पहुंचते हैं।
दूसरा, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति कितनी शांतिपूर्ण रहती है।
तीसरा, क्या सरकार आंदोलनकारियों के साथ बातचीत के लिए कोई नया रास्ता निकालती है?
फिलहाल सरकार प्रदर्शन टालने की अपील कर रही है, जबकि छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
इसलिए आज का दिन इस आंदोलन की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
क्या आंदोलन खत्म हो सकता है?
फिलहाल इसकी सबसे बड़ी कुंजी CBI जांच का मुद्दा है।
अगर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच CBI जांच या उसके समकक्ष ऐसी व्यवस्था पर सहमति बन जाती है जिस पर छात्रों को भरोसा हो, तो आंदोलन शांत हो सकता है।
लेकिन यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।
सरकार के सामने एक तरफ कानून-व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती है, जबकि दूसरी तरफ छात्रों के सामने अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल कराने की चुनौती है।
JPSC और JSSC में क्या अंतर है?
कई पाठकों के मन में यह सवाल भी होता है कि आखिर JPSC और JSSC अलग-अलग क्या हैं।
JPSC यानी Jharkhand Public Service Commission राज्य की विभिन्न उच्च स्तरीय सरकारी सेवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है। (Wikipedia)
वहीं JSSC यानी Jharkhand Staff Selection Commission राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अलग-अलग पदों पर कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ी परीक्षाएं आयोजित करता है।
इसलिए दोनों आयोगों की परीक्षाओं से जुड़े विवादों का एक साथ आंदोलन में शामिल होना यह दिखाता है कि छात्रों की चिंता केवल किसी एक भर्ती तक सीमित नहीं है।
झारखंड के युवाओं के लिए यह मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
सरकारी नौकरी झारखंड समेत पूरे देश में लाखों युवाओं के लिए स्थिर करियर का महत्वपूर्ण विकल्प है।
जब किसी परीक्षा में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं तो एक छोटी प्रशासनिक गलती का असर भी हजारों परिवारों तक पहुंच सकता है।
उदाहरण के तौर पर JSSC Field Worker परीक्षा में ही 3.22 लाख से अधिक पंजीकरण हुए थे।
ऐसे में भर्ती परीक्षा को लेकर किसी भी तरह का विवाद केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं रहता।
यह सवाल बन जाता है—
क्या मेहनत करने वाले उम्मीदवार को बराबर मौका मिल रहा है?
और यही सवाल आज रांची की सड़कों पर उठाया जा रहा है।
JPSC-JSSC Protest सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सरकार ने कई मांगों पर सहमति जताकर आंदोलन खत्म करने की कोशिश की है, लेकिन छात्रों का भरोसा वापस पाना सबसे बड़ी चुनौती है।
सरकार यदि केवल परीक्षा रद्द करती है और नई व्यवस्था बनाती है, लेकिन पुराने आरोपों की जांच पर स्पष्टता नहीं देती, तो आंदोलन फिर उठ सकता है।
दूसरी तरफ अगर सरकार कठोर कार्रवाई और स्वतंत्र जांच का भरोसा देती है, तो छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने का रास्ता खुल सकता है।
इस पूरे मामले में पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई और लिखित निर्णय सबसे महत्वपूर्ण होंगे।
अब आगे क्या होगा?
अभी तीन बड़े सवालों के जवाब बाकी हैं—
क्या आज का विधानसभा मार्च शांतिपूर्ण रहेगा?
क्या सरकार CBI जांच की मांग पर कोई नया प्रस्ताव देगी?
और क्या JSSC-CGL समेत पुराने भर्ती विवादों पर कोई ठोस समयबद्ध कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि झारखंड का यह छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में खत्म होगा या और बड़ा रूप लेगा।
निष्कर्ष: नौकरी की परीक्षा से बड़ा है भरोसे का सवाल
झारखंड में JPSC-JSSC Protest को लेकर चल रहा आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा रद्द कराने की लड़ाई नहीं रह गया है।
यह आंदोलन अब भर्ती व्यवस्था में भरोसा, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है।
सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की बड़ी संख्या में मांगें स्वीकार की हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ छात्र कह रहे हैं कि जब तक कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।
आज 10 अगस्त का विधानसभा मार्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तय कर सकता है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुलेगा या झारखंड का यह भर्ती आंदोलन और लंबा चलेगा।
एक बात साफ है—झारखंड के हजारों युवाओं की मांग सिर्फ नौकरी नहीं है, वे चाहते हैं कि नौकरी पाने की प्रक्रिया पर उन्हें भरोसा भी हो।
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नोट: इस रिपोर्ट में जहां छात्रों या राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख है, उन्हें आरोप/दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। किसी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। वर्तमान स्थिति 10 अगस्त 2026 की सुबह उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर है।