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यह पदक नहीं वो सपने है-जो प्रेरित करते है-सपने देखने और उन्हें सच करने के लिए

सफलता के लिए सपने देखों और फिर लग जाओं उन्हें सच करने के लिए

saflta ke liye sapne dekhna jaruri

नई दिल्ली (समयधारा) : इस बार भारत ने ओलिंपिक ही नहीं पैरालंपिक में भी जो मैडल लाये है वो अपने आप में कई सपनों को जीवित कर देते है l

समाज की सबसे बड़ी सच्चाईयों को उनके असलियत को हमारे सामने ला देते है l

हम में से हर कोई सपना देखता है l बहुत से लोग कुछ दूर जाकर कुछ बहाना बनाकर उन सपनों को छोड़ देते हैl

कुछ लोग ही ऐसे होते है जो तमाम संघर्षों को पार करते हुए उन सपनों को जीवंत कर देते है l यह पदक उन्ही लोगों की कहानी है l 

पर जो पैरालंपिक में हुआ है वो किसी भी आश्चर्य से कम नहीं है l विश्व के वो सभी दिव्यांग प्रतिभागी जो इस प्रतियोगिता में भाग लेते है l

उनके हौसले को समयधारा सलाम करती है l सच में जीवन के बहुत कुछ खोकर इस मुकाम पर पहुंचना बेहद ही मुश्किल भरा होता है l

जब यह दिव्यांग/अपंग   विश्व के बेहतरीन दिव्यंगों/अपंगो के साथ मुकाबला करते है और जीत कर आते है तो इनके संघर्षों को एक मंजील मिल जाती है l

‘अकेलापन’ आपकी हर ‘आकांक्षाओं’ ‘सफलताओं’ का ‘भरोसेमंद’ ‘साथी’

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दोस्तों भारत के जो सिर्फ 54 दिव्यांग महा शुरुवीर इस प्रतियोगिता में भाग लेने गए है …

जो इस विश्व पैरालंपिक   मुकाबले में काफी कम है पर इनमे से भी भारत को अब तक 19 पदक मिल चूके है l जो किसी भी करिश्मे से कम नहीं है l

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चीन का खेलों में हमेशा से दबदबा रहा है और उनके 256 दिव्यांग इन खेलों में भाग ले रहे है l उनके मुकाबले भारत के 54 लोग आधे के आधे से भी कम है l

चीन लगभग हर खेल में भाग लेता है l इसीलिए तो वह नंबर 1 पर यहाँ भी काबिज है उसे 96 गोल्ड मैडल 60 सिल्वर और 51 कांस्य पदक के साथ कुल 207 मैडल मिल चूके है l

पर भारत के इन दिव्यांग शुरवीरों की अपनी गाथा किसी भी संघर्षमय जीवन से कम नहीं है l

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इन्होने न सिर्फ अपनी अपंगता पर विजय पाई बल्कि समाज के सामने एक आदर्श रखा l

उन्होंने एक बार फिर बताया की ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है l जो लोग पदक ले आये यह सिर्फ उनके लिए नहीं है l

यह उनके लिए भी है जो पदक न ला सके l याद रखियें हार जीत तो खेल का हिस्सा है l कोई जीतता है तो कोई हारता है l

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किसी की हार में ही किसी की जीत है l कहते है मन के हारे हार है मन के जीते जीत,

तो बस अपनी हार को भी आप जीत के रूप में देख सकते हो l आप समाज को यह दिखा सकते हो कि आप में आसमान छूने का हौसला है l

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वक्त आने पर आप बादलों के पार जाकर नई ऊंचाइयों को छू सकते हो l न सिर्फ खेल बल्कि आप कही भी कभी भी कुछ भी कर सकते हो l

इस का एक और जीता जागता उदाहरण है देश की राजनीतिक पार्टी “बीजेपी” l

BJP का उदय जब हुआ था तो यह पार्टी सिर्फ 2 सीटें ही जीत पायी थी l (saflta ke liye sapne dekhna jaruri)

पर नित्य यह पार्टी देश पर सबसे ज्यादा और मजबूत पार्टी कांग्रेस के खिलाफ लडती रही l नतीजा आज सबके सामने है l

ऐसे कई और उदाहरण मिल जायेंगे सफल होने के l और हर सफलता के पीछे की कहानी आपको प्रेरित करेगी सफल होने के लिए l

इस लेख के माध्यम से मेरा आपको यह समझाने का प्रयास है कि

कोरोना का डर या कलयुगी कॉलोनी..? पढ़े और बताएं

“खुदी को कर बुलंद इतना हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है” 

खुदी यानी आपका आत्मविश्वास अपने आत्मबल को इतना बुलंद कर दो की खुदा भी आपकी तक़दीर लिखने से पहले आपसे ही पूछे की बता भाई क्या चाहिए तुझे वो आपकी झीलों में डाल दे l

आपको पता है मैडल मैदानों में नहीं ख्वाबों में जीते जाते है l मैदान में दो बाद में भाग लेते है l

(saflta ke liye sapne dekhna jaruri)

अगर सफल होना है तो ख़्वाब देखों फिर उन्हें पाने के लिए बिना दिन रात सोचे लग जाओं l सफलता आपके कदम चूमेंगी l

हर सफल व्यक्ति ने यही किया बिल गेट्स हो या मुकेश अंबानी या फिर कोई और अन्य l

आपने चंद्रमा मंगल ग्रह और अंतरिक्ष में जाने वाले यान के बारें में तो सूना ही होगा l

जब यह तैयार हो अंतरिक्ष में जाते है तब हमें इनके बारें में पता चलता है l

पर आपको पता है इनके जाने से पहले कितनी बार इनके जाने की इनके लैंडिंग की इनके हर एक पहलु की जांच की जाती है हजारों बार यह टेस्टिंग से गुजरते है l

तब जाकर इन्हें अंतरिक्ष में भेजा जाता है l तब जाकर यह उड़ते है और अंतरिक्ष को नाप कर अपनी मंजिल को तय करते है l

मंजिल को तय करने के लिए पहले अपनी सोच में वह मंजिल तय हो जाती है l फिर रास्ते तलाशे जाते है l

और हमारे लिए जो सबसे सुगम और सही रास्ता है वह हम चुनकर मंजिल की और बढ़ते है l

कौन कहता है कि 60 के ठाठ है?…यही से तो जिंदगी के नए संघर्षो की शुरुआत है….

कौन कहता है कि 60 के ठाठ है?…यही से तो जिंदगी के नए संघर्षो की शुरुआत है….

इसका एक और आम उदहारण हमें मिलता है आम जिंदगी में : (saflta ke liye sapne dekhna jaruri)

अगर हमें कही भी एक स्थान से दुसरे स्थान जाना है तो क्या करेंगे मान लो की हमें मुंबई से दिल्ली तक का सफ़र तय करना है तो हम क्या करेंगे l

  • सबसे पहले हम दिल्ली जाना है यह तय करेंगे l
  • फिर हमें कितने जल्दी जाना है वह तय करेंगे l
  • फिर हम कैसे जाना है यह तय करेंगे l
  • घर से निकलेंगे और स्थान या जगह जायेंगे जो दिल्ली की और जायेगी l
  • फिर हम उस वाहन में जो भी हमने तय किया है उसमे बैठेंगे l
  • और अंत में वह हमें हमारी मंजिल यानी दिल्ली तक हमें पहुंचाएगा l

अब इस उदाहरण में कई लोग क्या करते है l (saflta ke liye sapne dekhna jaruri)

वह ठान तो लेते है की उन्हें दिल्ली जाना है पर आलस के कारण वह पूरा समय इसमें बिता देते है की कैसे जायेंगे बारिश हो रही है l

घर से निकलेंगे कैसे ट्रेन स्टेशन या एअरपोर्ट तक कैसे पहुंचेंगे l

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यह लोग वह है जो जाना ही नहीं चाहते यह वो लोग है जो सोचते है की चमत्कार होगा और हम बस चुटकी बजाते ही दिल्ली पहुँच जायेंगे

यह वो लोग है जो अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए उतने आतुर नहीं है जितने की दूसरें लोग l

इसलिए यह लगभग जिंदगी भर एक ही जगह पड़े रहते है और जिंदगी को आगे बढ़ाते रहते है बोझ की तरह l और भारत में इन लोगों की संख्या लगभग 50 फीसदी है l

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अब आगे बढ़ते है कुछ लोग ऐसे है (30 फीसदी) जो घर से निकल जाते है ट्रेन पकड़ने के लिए पर रास्ते में कोई पत्थर मिल जाएँ या कीचड़ मिल जाए

या कोई छोटी से ठोकर लग जाएँ या फिर बिल्ली रास्ता काट जाएँ तो तुरंत वापस घर की और प्रस्थान कर लेते है l

ऐसे लोग भी कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच सकते l अगर मंजिल तक पहुंचना है तो रास्ते में कठनाईयां तो आएगी है l

उन्हें पार कर ही तो आगे बढ़ना है l अगर प्रतियोगिता में प्रतिभागी ही नहीं होंगे तो वह प्रतियोगिता होगी क्या..?

अगर पदक लाना है तो पहले लीग मुकाबले जितने होंगे फिर क्वार्टर फाइनल जितना होगा फिर सेमीफाइनल जितना होगा और अंत में फाइनल तभी तो आप स्वर्ण पदक के हकदार होंगे l

पर यह लोग सिर्फ और सिर्फ अपनी असफलता के लिए दूसरों को दोष देने का बहाना तलाशते रहते है l

अब आगे बढ़ते है उन लोगों से जो इस देश में लगभग 15 से 18 फीसदी है और यह वो लोग है जो अपनी मंजिल के करीब पहुंचकर भी मंजिल को छू नहीं पाते l

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यह अंतिम पढ़ाव में हार मान जाते है l सपने देखना और उन्हें सच करने में काफी मेहनत लगती है l

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जब यह 15 से 18 फीसदी लोग  अपनी मंजिल के करीब होते है तो अंतिम क्षणों में यह हार मान लेते है l

मेरा यह कहने का यहाँ मतलब है की यह सब कुछ सही करते है पर जीतने के लिए जो मेहनत की जरुरत होती है उसमे जाने अनजाने कही चूक हो जाती है l

जैसे की आप घर से निकले दील्ली की ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पर सही से पहुँच भी गए पर आप दिल्ली नहीं पहुँच पाए l कारण आपने दिल्ली की जगह चैन्नई की ट्रेन पकड ली थी l

यानी आप भटक गए थे l यह वो लोग है जो मंजिल का चुनाव सही करते है पर रास्ते में भटक जाते है l

इनके पास सबकुछ होते हुए भी इन्हें सफलता नहीं मिलती l छोटी सी गलती इन्हें इनकी सफलता से दूर कर देती है l

जैसे की एक और उदाहरण है (saflta ke liye sapne dekhna jaruri)

राहुल की कपड़े की फैक्ट्री है उसे विदेश से करीब 1 लाख शर्ट का Order मिलता है, वह जी जान से शर्ट बनाने में जुट जाता है l

एक लाख शर्ट निर्धारित समय में बनकर तैयार भी हो जाते है l

पर शर्ट विदेशी कंपनी रिजेक्ट कर देती है l राहुल की एक छोटी से लापरवाही उस पर भारी पड़ जाती है l

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शर्ट तो अच्छे बनते है पर शर्ट के जो बटन है उन्हें लगाने में चुक होने से विदेशी कंपनी माल को रिजेक्ट कर देती है l

अगर राहुल ने समय रहते शर्ट के बटन चेक कर लिए होते तो आज उसे यह नुकसान उठाना नहीं पड़ता l

पर अत्यधिक जोश और थोड़ी से लापरवाही राहुल को लाखों का नुकसान करा देती है l

याद रखियें आलस्य/लापरवाही सफलता की सबसे बड़ी दुश्मन है l

अब अंत में बात करते है उन 2 से 5 फीसदी लोगों की जो अंत तक लड़ते है और विजयी होकर लौटते है यह वो लोग है जो अपनी मेहनत लगन से अपनी मंजिल को प्राप्त करते है l

 अगर आप को मुंबई से दिल्ली जाना है तो सबसे पहले आप कितना जल्दी जाना चाहते है यह तय करेंगे फिर आप अपना बजट भी तय करेंगेl

इसके बाद आप ट्रेन या विमान की टिकट बुक करेंगे l जब तक आप सही ट्रेन या विमान में चढ़ नहीं जाते तब तक आप अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच सकते

उदाहरण के तौर पर अगर आपको मुंबई से दिल्ली ट्रेन लेनी है तो आप को स्टेशन पहुँच कर सही ट्रेन में बैठना होगाl

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अगर आपने ट्रेन सही नहीं पकड़ी तो आप दिल्ली कभी नहीं पहुँच पाओंगे l यही वो सफलता और असफलता के बीच की सबसे बड़ी बाधा है l

एक बार आपने सही ट्रेन पकड़ ली आपने अपनी सबसे बड़ी बाधा दूर कर ली l तो आपको दिल्ली पहुँचने से कोई रोक नहीं सकता l

सिर्फ आपको अपनी मंजिल के लिए सही रास्ता तलाशना है l कभी भटकना नहीं है l

जब आप सही ट्रेन में बैठ गए तो वह ट्रेन लेट होगी थोड़ी धीरे धीरे जायेंगी पर अंत में आपको आपकी मंजिल पर पहुंचा देगी l

यही करना है असल जीवन में हमें l हमारी सभी परेशानियों को एक तरफ रखकर हमें सिर्फ अपनी मंजिल पर ध्यान रखना है l

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सही रास्ते पर चल कर सही तरह से मेहनत करके और आँख कान नाक को अलर्ट करके हम अपनी मंजिल को सफलता के करीब पहुँच सकते है l

इस अर्टिकल के माध्यम से हम आपको सफलता कैसे प्राप्त करें उसके कुछ रहस्य बताने का प्रयास कर रहे है l

जिससे आप जीवन में एक सफल व्यक्ति बन सकें l आप कोई गलती किये बिना l अपने और अपने परिवार को एक सफल जीवन दे सकें l

आपको यह आर्टिकल कैसे लगा कमेंट्स बॉक्स में कमेंट्स देकर हमें जरुर अवगत कराएँ l

(धन्यवाद)

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