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राजीव गांधी 29वीं पुण्यतिथि: देश के लिए शहीद होने वाले युवा प्रधानमंत्री,जानें कैसे हुई हत्या

भारत को टेलीफोन,आईटी और कंप्यूटर क्रांति की सौगात देने का श्रेय श्री राजीव गांधी को ही जाता है...

Former PM Rajiv Gandhi 29th Death Anniversary

आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 29वीं पुण्यतिथि है। आज ही वो इतिहास का काला दिन है जब लिट्टे उग्रवादियों ने भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री राजीव गांधी(Former PM Rajiv Gandhi)की वीभत्स हत्या कर दी थी।

राजीव गांंधी की पुण्यतिथि को आतंकवाद विरोधी दिवस 2020 (Anti terrorism day 2020) के रूप में मनाया जा रहा है। वह भारत मां के उन सपूतो में से एक है जो वीरगति को प्राप्त हुए थे।

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी

 

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की लिट्टे उग्रवादियों (LTTE militant) ने 21 मई 1991 को तमिलनाडु की एक चुनावी सभा में ह्यूमैन बम से करवा दी थी।

इस आत्मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री के शरीर के चिथड़े-चिथड़े हो गए थे। वो वीभत्स दृश्य इतना ह्दय विदारक था कि आज भी उन तस्वीरों को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते है।

Former PM Rajiv Gandhi 29th Death Anniversary tribute as Anti terrorism day

 

आज देश पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। 

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) का जन्म 20 अगस्त 1944 को बंबई (वर्तमान में मुंबई) में हुआ था। राजीव गांधी आधुनिक भारत के जनक कहे जाते है।

विश्व पटल पर आज भारत आधुनिकीकरण में जो बुलंदियां छू रहा है,उसकी नींव राजीव गांधी ने ही रखी थी।

राजीव गांधी स्वतंत्र देश के सबसे युवा और आधुनिक सोच से ओतप्रोत प्रधानमंत्री थे। जन्म से एक राजनीतिक घराने में पैदा होने के बावजूद भी राजीव गांधी की राजनीति के प्रति कोई रुचि नहीं थी।

भारत को टेलीफोन,आईटी और कंप्यूटर क्रांति की सौगात देने का श्रेय श्री राजीव गांधी को ही जाता है।

आधुनिक भारत की बुनियाद रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी स्वभाव से बेहद सरल और सौम्य कहे जाते है।

वे दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने भारत को मजबूत,तरक्की पसंद और युवा भारत बनाने का सपना संजोया था। स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातों पर रोशनी डालते है:

Former PM Rajiv Gandhi 29th Death Anniversary:

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राजीव गांधी का जन्म व शिक्षा

पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के पुत्र के रूप में राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को बंबई में हुआ। वे देखने में बेहद ही खूबसूरत और सरल स्वभाव के मालिक थे।

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने अपनी शुरूआती शिक्षा देहरादून के दून स्कूल से ग्रहण की और बाद में उच्च शिक्षा (1961) लंदन के इम्पीरियल कॉलेज व कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से ग्रहण की थी।

राजीव गांधी अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद इंडियन एयरलाइंस में पायलट बन गए। जी हां, एक बड़े राजनीतिक घराने में पैदा होने के बावजूद भी उनमें कभी राजनीति में अपना करियर बनाने की लालसा नहीं थी।

इसी कारण वे शिक्षा पूरी करके राजनीति में आने की जगह पायलट बनें लेकिन कहते है न कि मैन पोजेस एंड गॉड डिस्पोजेस अर्थात ‘आदमी सोचता कुछ है और होता कुछ और है’ कुछ इसी तरह का वाक्या राजीव गांधी के साथ भी हुआ।

राजनीति में पदार्पण

राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी की एक हवाई जहाज दुर्घटना में 1980 में आकस्मिक मृत्यु हो गई। तब राजीव गांधी को अपनी मां श्रीमती इंदिरा गांधी को सहयोग देने 1982 में राजनीति में आना पड़ा।

किस्मत ने एक बार फिर राजीव गांधी के सपनों के साथ छल किया जब उनकी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही बॉडी गार्डों द्वारा 31 अक्टूबर 1984 में हत्या कर दी गई।

इस हादसे ने राजीव गांधी को पूरी तरह से राजनीति में ही बांधकर रख दिया और एक आम आदमी की जिंदगी जीने का सपना देखने वाले पायलट राजीव गांधी के सारे सपने बदलकर रख दिए।

इंदिरा गांधी की निर्मम हत्या के बाद कांग्रेस की बागडोर उनपर ही डाल दी गई।

साल 1981 में राजीव गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा के लिए चयनित हुए और फिर राजीव गांधी सर्वसम्मति से देश के प्रधानमंत्री चुने गए।

अपनी माता इंदिरा गांधी की तुलना में राजीव गांधी राजनीति के दांव-पेंच ज्यादा नहीं समझते थे,इसलिए उन्होंने अपनी नई सोच और नए सपनों के साथ परंपरागत राजनीति से उलट राजनीति की एक नई परिभाषा लिखी।

राजीव गांधी और सोनिया गांधी का प्रेम विवाह

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राजीव गांधी जब  कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे। तभी उन्होंने पहली बार सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को देखा। राजीव ने यहां सोनिया को एक ग्रीक रेस्टोरेंट में देखा था।

सोनिया गांधी को देखते ही राजीव गांधी को पहली नजर में प्यार हो गया था। सोनिया से नजदीकियां बढ़ाने के लिए राजीव गांधी ने उस रेस्टोरेंट मालिक से गुजारिश कि वे उन्हें बैठने के लिए सोनिया की पास की ही सीट दें लेकिन उस रेस्टोरेंट मालिक ने ऐसा करने के लिए दोगुनी पेमेंट मांगी जोकि राजीव गांधी ने दे भी दी।

अपने एक इंटरव्यू में उक्त रेस्टोरेंट के मालिक ने बताया कि राजीव गांधी ने तब एक पेपर नैपकिन पर उसी दिन सोनिया के लिए एक कविता लिखी और वहां उपलब्ध सबसे महंगी वाइन की बॉटल के साथ सोनिया को भेज दी। इसके बाद अपनी माता इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की अनुमति से उन्होंने 1968 में सोनिया गांधी से शादी कर ली।

शादी से पहले सोनिया गांधी का नाम एन्टोनिया मैनो था चूंकि वे मूल रूप से इटली की नागरिक थी लेकिन राजीव गांधी से शादी के बाद एन्टोनिया मैनो सोनिया गांधी बन गई।

राजीव गांधी की ही तरह सोनिया गांधी की भी राजनीति में कोई रुचि नहीं थी और उन्होंने राजीव गांधी को शादी के लिए हां भी इसी शर्त पर कही थी कि वे राजनीति में नहीं आएंगे किंतु किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था और आखिरकार संजय गांधी व इंदिरा गांधी की मृत्यु के पश्चात राजीव गांधी को राजनीति में आना ही पड़ गया।

राजीव गांधी का देश की राजनीति में योगदान-Former PM Rajiv Gandhi 29th Death Anniversary

मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी भारत के छठें प्रधानमंत्री चुने गए। बतौर प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कई अहम फैसले लिए जिनके दूरगामी परिणाम भी उन्हें भुगतने पड़े।

प्रत्येक प्रधानमंत्री की ही तरह उनके कुछ फैसलों को जहां सराहा गया वहीं कुछ को सवालों के घेरे में लाकर आज भी खड़ा कर दिया जाता है।

फिर भी राजीव गांधी ने देश की राजनीति को एक नई दिशा और भारत को आधुनिकीकरण के रास्ते पर अग्रसर करने में कोई कसर न छोड़ी।

1.राजीव गांधी  ने 1988 में चीन की ऐतिहासिक यात्रा की।

2.देश में अर्थव्यवस्था के सेक्टर्स को राजीव गांधी ने ही खोला।

3.भारत में कंप्यूटर,टेलीफोन और आईटी क्रांति की नींव रखने का श्रेय राजीव गांधी को ही जाता है।

4.देश में ईवीएम मशीनों के प्रयोग की शुरुआत उनके शासनकाल में ही हुई।

5.युवाओं को देश की राजनीति में भागीदार बनाने हेतु राजीव गांधी ने वोटिंग की आयु सीमा 18 साल की।

6.राजीव गांधी जब 1989 में चुनाव हारे तो दिल्ली से बाहर निकलकर उन्होंने देश को समझने की यात्रा शुरू की क्योंकि उनका सपना था

कि वे भारत को आजाद,आत्मनिर्भर,मजबूत और विश्व पटल पर अग्रणी देशों की लाइन में खड़ा कर सकें। इसी कारण राजीव गांधी ने देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू की।

7.राजीव गांधी के शासनकाल में हुआ कथित बोफोर्स कांड आज भी राजनीति का मुद्दा बना हुआ है। कहा जाता है कि बोफोर्स तोपें खरीदने के लिए तब जो डील की गई थी

उसमें 64 करोड़ रुपये दलाली दी गई और इसी का खुलासा होने पर कांग्रेस 1989 के लोकसभा चुनाव हार गई लेकिन बाद में सीबीआई जांच पर हुई सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी को इस के केस में क्लीन चिट दे दी थी किंतु आज भी इस मुद्दे पर राजनीति खूब होती है।

Former PM Rajiv Gandhi 29th Death Anniversary

राजीव गांधी की पसंद और नापसंद

राजीव गांधी मिठाइयों के शौकीन थे। यह बात कम ही लोग जानते है। उन्हें विशेष रूप से रसगुल्ले और पूरण पोली (मराठी व्यंजन) पसंद थे।

राजीव गांधी को अपने आसपास सुरक्षाकर्मी पसंद नहीं थे। वे आजाद रहकर घूमना चाहते थे। प्रधानमंत्री बनकर भी सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहने पर उन्हें कोफ्त होती थ ।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी लेकिन फिर भी जब भी मौका मिलता वे अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ करके जहां चाहे वहां निकल जाते थे।

Former PM Rajiv Gandhi 29th Death Anniversary

राजीव गांधी को किसने और क्यों मारा- Who Kill Rajiv Gandhi

सूत्रों के अनुसार, राजीव गांधी की हत्या एक सोची-समझी साजिश थी जिसे लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) उग्रवादियों ने उनके एक फैसले के कारण अंजाम दिया था।

दरअसल, उक्त समय श्रीलंका में एक जातीय संघर्ष चल रहा था और तब 1987 में भारत-श्रीलंका के बीच हुए एक समझौते के तहत भारतीय सेना श्रीलंका में हस्तक्षेप करने गई थी।

भारत-श्रीलंका समझौते के अंतर्गत एक भारतीय शांति रक्षा सेना का निर्माण किया गया था और इसका उद्देश्य श्रीलंका की सेना और लिट्टे उग्रवादियों के बीच चल रहे ग्रहयुद्ध को खत्म कर शांति स्थापित करना था।

लिट्टे चाहते थे कि भारतीय सेना श्रीलंका से वापस चली जाए क्योंकि भारतीय सेना के वहां होने के कारण वे श्रीलंका से अलग देश की अपनी मांग को अंजाम नहीं दे पा रहे थे और राजीव गांधी के निर्णय के कारण उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे थे।

जब 1989 में देश में वीपी सिंह की सरकार आई तो भारतीय सेना को श्रीलंका से वापस बुला भी लिया गया लेकिन लिट्टे को डर था कि दोबारा चुनाव (1991) होने पर कहीं वापस राजीव गांधी को प्रधानमंत्री न बना लिया जाए और अगर ऐसा हुआ तो वे दोबारा श्रीलंका में भारतीय सेना को भेज सकते है।

इसी कारण लिट्टे उग्रवादियों ने एक आत्मघाती हमला करके राजीव गांधी को 21 मई 1991 में मरवा डाला।

राजीव गांधी की वीभत्स हत्या में शामिल आरोपी आज जेल में भले ही बंद हो लेकिन उनकी रिहाई की मांग करके अब भी वक्त-बे-वक्त राजनीति की जाती है।

राजीव गांधी भारत में अमन-शांति और सद्भाभावना के पैरोकार थे लेकिन उन्हें पता था कि एक मजबूत भारत के लिए सैन्य शक्ति से संपन्न होना भी जरूरी है।

इसलिए देश में मिसाइल परीक्षण और न्यूक्लियर प्रोग्राम्स को बढ़ाने के उऩ्होंने फैसले किए। भारत को आधुनिकीकरण की राह पर बढ़ाकर ये युवा प्रधानमंत्री सदा के लिए अलिवदा कह गया लेकिन अपने देश में युवा और विज्ञान के सामंजस्य की नींव रख गया।

 

भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर समयधारा की ओर से  श्रद्धांजलि!

 

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