
gunhgar-shayris sayari-ki-duniya shayari-ki-kitab indian-shayari
न जाने कोन-सी साजिशों के हम
शिकार हो गए ,
जितना दिल साफ़ रखा
उतना “गुनहगार” हो गए ।
रिश्तों की दलदल से कैसे
निकलेंगे…
जब हर साजिश के पीछे अपने ही
निकलेंगे…
दूरियाँ
तो पहले ही आ चुकी थी ज़माने में ,
कोरोना ने आकर
इल्ज़ाम अपने सर ले लिया ।
मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ ,
हासिल कहाँ नसीब से होती हैं !
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं ,
जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ !
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