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शायरी : वो इत्र की शीशियां बेवज़ह इतराती हैं खुद पे…

हम तो दोस्तों के साथ होते है तो महक जाते है...

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वो इत्र की शीशियां बेवज़ह इतराती हैं खुद पे

हम तो दोस्तों के साथ होते है तो महक जाते है..

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दर्द कितना खुशनसीब है जिसे
पा कर लोग अपनों को याद
करते है, दौलत कितनी
बदनसीब है जिसे पा कर लोग
अक्सर अपनों को भूल जाते है..

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(इनपुट सोशल मीडिया से )

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