
Diwali 2026 (दीपावली 2026) का त्योहार रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा।
कार्तिक अमावस्या के अवसर पर देशभर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि इस साल दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, अमावस्या तिथि कब शुरू और समाप्त होगी, पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए और घर पर विधि-विधान से दीपावली की पूजा कैसे करें, तो यह लेख आपके लिए है।
यहां आपको दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर सहित प्रमुख शहरों के लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, प्रदोष काल, वृषभ लग्न, दीपदान का महत्व और धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिवसीय त्योहार कैलेंडर की पूरी जानकारी मिलेगी।
Diwali 2026 : दिवाली कब है? 8 नवंबर को होगी लक्ष्मी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और दीपदान का महत्व
Diwali 2026 / Deepawali 2026: रोशनी, खुशियों और सुख-समृद्धि का महापर्व दीपावली इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। दिवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का अवसर नहीं है, बल्कि यह माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, घर में सुख-शांति की कामना और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक भी है। इस दिन देशभर में करोड़ों परिवार शाम को शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं और घरों को दीपों, रंगोली तथा रोशनी से सजाते हैं।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि दिवाली 2026 कब है, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, प्रदोष काल और वृषभ काल कब होंगे, पूजा के लिए किन चीजों की जरूरत पड़ेगी और दीपावली की पूजा कैसे करनी चाहिए, तो इस विशेष लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।
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दिवाली 2026 की तारीख और अमावस्या तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या रहने पर माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। अमावस्या के दिन शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त होने के कारण दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा।
8 नवंबर 2026
रविवार — दीपावली एवं लक्ष्मी पूजन
अमावस्या तिथि प्रारंभ
सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त
9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
प्रदोष काल
शाम 5:31 से 8:09 बजे
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
शाम 5:54 से 7:50 बजे
सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय पंचांग के अनुसार हैं।
Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat: लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय
दीपावली की शाम माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष काल में स्थिर लग्न के दौरान पूजा करना शुभ होता है। नई दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग ने इस वर्ष शाम का वृषभ लग्न मुहूर्त 5:54 बजे से 7:50 बजे तक बताया है।
लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक।
इस अवधि में परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर गणेश-लक्ष्मी पूजन, कुबेर स्मरण, दीप प्रज्वलन और आरती कर सकते हैं। पूजा की तैयारी पहले से पूरी कर लें, ताकि शुभ समय में विधि-विधान से पूजा हो सके।
प्रदोष काल क्या होता है?
सूर्यास्त के आसपास का समय प्रदोष काल कहलाता है। दीपावली पर इस अवधि का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी समय घरों और मंदिरों में दीप जलाए जाते हैं और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
दिल्ली में 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी पूजा का निर्धारित मुहूर्त इसी अवधि के भीतर आता है।
वृषभ काल या स्थिर लग्न का महत्व
वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार स्थिर लग्न में की गई लक्ष्मी पूजा को शुभ माना जाता है। इसी कारण दीपावली के पूजा मुहूर्त में प्रदोष काल और वृषभ लग्न के संयोग को महत्व दिया जाता है।
Diwali 2026: देश के प्रमुख शहरों में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली पूरे भारत में एक ही दिन मनाई जाएगी, लेकिन हर शहर में सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग की गणना अलग होने के कारण लक्ष्मी पूजा के समय में अंतर रहता है। दिल्ली में शाम 5:54 बजे पूजा शुरू करने का मुहूर्त है, जबकि मुंबई में यह समय शाम 6:27 बजे से शुरू होगा।
द्रिक पंचांग के अनुसार प्रमुख शहरों के पूजा मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| शहर | लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त |
|---|---|
| नई दिल्ली | शाम 5:54–7:50 बजे |
| नोएडा | शाम 5:54–7:49 बजे |
| गुरुग्राम | शाम 5:55–7:51 बजे |
| चंडीगढ़ | शाम 5:52–7:46 बजे |
| जयपुर | शाम 6:03–7:59 बजे |
| मुंबई | शाम 6:27–8:27 बजे |
| पुणे | शाम 6:24–8:24 बजे |
| अहमदाबाद | शाम 6:22–8:20 बजे |
| कोलकाता | शाम 5:20–7:18 बजे |
| चेन्नई | शाम 6:07–8:09 बजे |
| हैदराबाद | शाम 6:07–8:08 बजे |
| बेंगलुरु | शाम 6:17–8:20 बजे |
ध्यान दें: ये समय संबंधित शहरों के स्थानीय समय के अनुसार हैं। किसी अन्य शहर या कस्बे में पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।
दिवाली 2026 पूजा सामग्री: लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए क्या-क्या चाहिए?
दीपावली की पूजा के लिए सामग्री पहले से तैयार रखना अच्छा रहता है। पूजा के समय कोई वस्तु ढूंढने में परेशानी न हो, इसके लिए यह सूची उपयोगी हो सकती है।
मुख्य पूजा सामग्री की सूची:
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
रोली, कुमकुम और हल्दी
अक्षत यानी साबुत चावल
फूल और फूलों की माला
धूप, अगरबत्ती और कपूर
मिट्टी के दीपक और घी या तेल
रुई की बाती
कलश, जल और आम के पत्ते
नारियल और सुपारी
पान के पत्ते और इलायची
फल और मिठाई
पंचामृत
चांदी या तांबे का सिक्का
घर की परंपरा के अनुसार बही-खाता और पूजा की अन्य सामग्री
पूजा सामग्री में क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। सभी वस्तुओं का होना अनिवार्य नहीं है; श्रद्धा और स्वच्छता को अधिक महत्व दिया जाता है।
Diwali 2026 Lakshmi Puja Vidhi: घर पर कैसे करें माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा?
दीपावली की शाम घर में पूजा का वातावरण तैयार किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य स्नान करके साफ कपड़े पहनते हैं और पूजा स्थल को सजाते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और अन्य पूजनीय देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है।
1. पूजा स्थल की सफाई और सजावट करें
सबसे पहले पूजा घर और आसपास के स्थान को साफ करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल के पास दीपक, फूल, कलश और पूजा सामग्री व्यवस्थित रखें।
2. कलश स्थापना करें
एक साफ कलश में जल भरें। उसमें सुपारी, अक्षत और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। कलश को शुभता और मंगल कार्यों का प्रतीक माना जाता है।
3. भगवान गणेश का पूजन करें
किसी भी शुभ पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करने की परंपरा है। उन्हें फूल, दूर्वा, अक्षत और मोदक या लड्डू अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी की पूजा शुरू करें।
4. माता लक्ष्मी का पूजन करें
माता लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल फूल, अक्षत, रोली, फल और मिठाई अर्पित करें। दीपक जलाकर धन, सुख, शांति और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करें।
5. भगवान कुबेर का स्मरण करें
भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है। दीपावली पर कई परिवार माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर का भी पूजन करते हैं। व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठान और बही-खाते की पूजा भी करता है।
6. दीप जलाएं और आरती करें
पूजा के बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, खिड़कियों और आंगन में दीपक जलाएं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती और प्रसाद वितरण कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण: पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। अपने घर में प्रचलित विधि का पालन करें।
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दिवाली पर दीपदान क्यों किया जाता है? जानें दीप जलाने का धार्मिक महत्व
दीपावली का अर्थ ही दीपों की पंक्ति है। इस दिन घरों, मंदिरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक अज्ञान और अंधकार को दूर करके ज्ञान, आशा और सकारात्मकता का संदेश देता है।
दीपदान को लेकर कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रचलित हैं। कुछ परिवार घर के मुख्य द्वार पर दीपक रखते हैं, कुछ तुलसी के पास दीप जलाते हैं और कई लोग मंदिरों में दीपदान करते हैं।
दिवाली पर दीपक कहां जलाएं?
घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर।
पूजा स्थल और मंदिर में।
तुलसी के पौधे के पास, यदि घर में तुलसी है।
घर की बालकनी और आंगन में सुरक्षित स्थान पर।
घर के आसपास किसी साफ और सुरक्षित स्थान पर।
दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि वह पर्दे, कागज, लकड़ी या ज्वलनशील सामान के पास न हो। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी दीपकों को दूर रखें।
Diwali 2026 का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
दीपावली भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व से जुड़ी कथाएं और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में प्रचलित हैं।
भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की परंपरा
उत्तर भारत में दीपावली को भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाए थे। इसी परंपरा को याद करते हुए लोग घरों में दीपक जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं।
माता लक्ष्मी के स्वागत का पर्व
दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी हैं। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, मुख्य द्वार सजाते हैं और पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है?
माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ कराने वाला देवता माना जाता है। इसीलिए दीपावली की पूजा में पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है।
व्यापारी वर्ग के लिए दिवाली का महत्व
व्यापारियों और कारोबारियों के लिए दीपावली का पर्व विशेष महत्व रखता है। कई व्यापारी इस दिन बही-खातों, तिजोरी, व्यापारिक प्रतिष्ठान और नए वित्तीय लेखे की पूजा करते हैं। गुजरात और पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में चोपड़ा पूजन की परंपरा भी प्रचलित है।
दीपावली 2026: पांच दिनों के त्योहार का पूरा कैलेंडर
दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं है। इसके आसपास कई महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाते हैं। धनतेरस से भाई दूज तक घरों में उत्सव का माहौल रहता है।
Diwali Festival Calendar 2026
भगवान धन्वंतरि की पूजा, खरीदारी और यम दीपदान की परंपरा।
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली — 7 नवंबर, शनिवार
अभ्यंग स्नान, दीपदान और छोटी दिवाली का उत्सव।
दीपावली / लक्ष्मी पूजा — 8 नवंबर, रविवार
माता लक्ष्मी, भगवान गणेश की पूजा और दीपोत्सव।
गोवर्धन पूजा — 9 नवंबर, सोमवार
भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की परंपरा।
भाई दूज — 10 नवंबर, मंगलवार
भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व।
यह 2026 के प्रमुख दीपावली पर्वों का सामान्य कैलेंडर है। स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार कुछ अनुष्ठानों के समय में अंतर हो सकता है।
दिवाली पर घर की सजावट कैसे करें? जानें आसान और पारंपरिक तरीके
दीपावली के दिन घर की सजावट का विशेष महत्व होता है। लोग अपने घरों को दीपक, रंगोली, फूलों और रोशनी से सजाते हैं। माना जाता है कि साफ-सुथरा और सुंदर घर त्योहार की खुशियों को बढ़ाता है।
घर को सजाने के कुछ आसान तरीके:
मुख्य द्वार पर गेंदे के फूलों का तोरण लगाएं।
प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं।
मिट्टी के दीपक जलाकर घर को रोशन करें।
पूजा स्थल को फूलों और साफ कपड़े से सजाएं।
बालकनी और खिड़कियों पर सुरक्षित LED लाइट लगाएं।
घर के अंदर प्राकृतिक फूलों की सजावट करें।
पूजा के समय साफ-सुथरा और शांत वातावरण रखें।
Diwali 2026 पर पटाखे जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान
दीपावली पर आतिशबाजी कई जगह उत्सव का हिस्सा होती है, लेकिन पटाखों से ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, पालतू जानवरों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को इससे विशेष परेशानी हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन के नियमों और प्रतिबंधों का पालन करें।
केवल कानूनी रूप से अनुमत आतिशबाजी का ही उपयोग करें।
बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।
पानी और प्राथमिक उपचार का सामान पास रखें।
बंद स्थान, अस्पताल और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के पास आतिशबाजी न करें।
पटाखों के कचरे को सुरक्षित तरीके से साफ करें।
संभव हो तो दीपों, फूलों और रोशनी के साथ पर्यावरण-अनुकूल दिवाली मनाएं।
Diwali 2026 पर क्या करें और किन बातों से बचें?
दिवाली के दिन पूजा और उत्सव के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां और पारंपरिक नियम ध्यान में रखे जा सकते हैं।
| क्या करें | किन बातों से बचें |
|---|---|
| घर और पूजा स्थल साफ रखें | पूजा स्थल को गंदा न छोड़ें |
| परिवार के साथ पूजा करें | पूजा में जल्दबाजी न करें |
| जरूरतमंदों की मदद करें | दिखावे के लिए अनावश्यक खर्च न करें |
| सुरक्षित तरीके से दीप जलाएं | दीपक ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें |
| मिठाइयां और प्रसाद बांटें | मिलावटी खाद्य पदार्थों से सावधान रहें |
| पर्यावरण का ध्यान रखें | प्रतिबंधित पटाखे न जलाएं |
धार्मिक मान्यताओं में स्वच्छता, सद्भाव, दान और सकारात्मक व्यवहार को विशेष महत्व दिया जाता है। त्योहार का वास्तविक आनंद परिवार और समाज के साथ खुशियां बांटने में है।
Diwali 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Diwali 2026 कब मनाई जाएगी?
Diwali 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।
2. Diwali 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है। यह समय स्थानीय पंचांग के अनुसार है।
3. Diwali 2026 पर अमावस्या तिथि कब शुरू होगी?
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी।
4. Diwali 2026 पर अमावस्या तिथि कब समाप्त होगी?
अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।
5. दिवाली पर लक्ष्मी पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
पूजा की दिशा को लेकर अलग-अलग पारंपरिक मान्यताएं हैं। सामान्य रूप से पूजा स्थल को साफ रखकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। दिशा और स्थापना के लिए अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित की सलाह मान सकते हैं।
6. Diwali 2026 पर लक्ष्मी जी के साथ किसकी पूजा की जाती है?
दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवार भगवान कुबेर और माता सरस्वती का भी पूजन करते हैं।
7. Diwali 2026 की पूजा में कौन-सी सामग्री जरूरी है?
पूजा के लिए माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा, चौकी, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, कपूर, फल, मिठाई, कलश और अन्य पारंपरिक सामग्री रखी जाती है।
8. Diwali 2026 पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
दीपक जलाने की कोई एक अनिवार्य संख्या सभी परिवारों के लिए निर्धारित नहीं है। लोग अपनी परंपरा, सुविधा और श्रद्धा के अनुसार दीपक जलाते हैं।
9. क्याDiwali 2026 रविवार को है?
हां, इस साल दीपावली 8 नवंबर 2026 को रविवार के दिन मनाई जाएगी।
10. दिवाली 2026 के बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब है?
गोवर्धन पूजा 9 नवंबर 2026, सोमवार को और भाई दूज 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।
निष्कर्ष: Diwali 2026 पर घर-परिवार में लाएं खुशियों की रोशनी
Diwali 2026 केवल रोशनी और सजावट का त्योहार नहीं है, बल्कि यह परिवार, प्रेम, विश्वास, सकारात्मकता और नई शुरुआत का संदेश देता है। 8 नवंबर 2026 को दीपावली के अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें, घर में दीप जलाएं और अपने प्रियजनों के साथ खुशियां बांटें।
इस बार दिवाली पर दिखावे और अनावश्यक खर्च के बजाय परिवार के साथ समय बिताने, जरूरतमंदों की मदद करने और पर्यावरण का ध्यान रखने का संकल्प लें।
समयधारा की ओर से आप सभी पाठकों को दीपावली 2026 Diwali 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! मां लक्ष्मी आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आएं।
संपादकीय नोट: इस लेख में दिए गए पूजा मुहूर्त नई दिल्ली और संबंधित शहरों के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। स्थान के अनुसार पूजा का समय बदल सकता है। पाठक अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अंतिम पुष्टि अवश्य करें।
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