
Diwali 2026 (दीपावली 2026) का त्योहार रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या के अवसर पर देशभर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि इस साल दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, अमावस्या तिथि कब शुरू और समाप्त होगी, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर और अन्य शहरों में पूजा का समय क्या रहेगा और घर पर विधि-विधान से Diwali 2026 की पूजा कैसे करें, तो यह विशेष गाइड आपके लिए है।
यहां आपको दिवाली 2026 (Diwali 2026) की तारीख, प्रदोष काल, वृषभ लग्न, पूजा सामग्री, पूजा विधि, दीपदान का महत्व और पांच दिवसीय दीपावली उत्सव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
Diwali 2026: कल 8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली, जानें मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शहरवार समय
Diwali 2026 / Deepawali 2026: रोशनी, खुशियों और समृद्धि का महापर्व दीपावली इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। दिवाली की शाम देशभर में घरों, मंदिरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और रोशनी से सजाकर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
अगर आप भी दिवाली की पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपने शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त जान लें। Diwali 2026 इस विशेष गाइड में आपको दिवाली 2026 की तारीख, अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, लक्ष्मी पूजा का शुभ समय, शहरवार मुहूर्त, पूजा सामग्री, घर पर पूजा करने की विधि, दीपदान का महत्व और दिवाली से जुड़ी प्रमुख परंपराओं की जानकारी मिलेगी।
Diwali 2026: 8 नवंबर को दिवाली, जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूरी जानकारी
Diwali 2026 Date: दिवाली कब है और क्यों मनाया जाता है यह पर्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन शाम के समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। इसीलिए इस पर्व पर घरों, मंदिरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों को दीपों और रोशनी से सजाया जाता है।
दिवाली से जुड़ी सबसे लोकप्रिय धार्मिक मान्यता भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की है। Diwali 2026 मान्यता है कि 14 वर्ष का वनवास पूरा करके जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को याद करते हुए हर साल दीपावली पर घरों में दीपक जलाए जाते हैं।

दीपावली का संबंध माता लक्ष्मी की पूजा से भी है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस दिन लोग घरों की सफाई करते हैं, पूजा स्थल सजाते हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
Diwali 2026 Amavasya Tithi: अमावस्या कब शुरू और समाप्त होगी?
दिवाली की पूजा के लिए अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।
| पंचांग विवरण | नई दिल्ली का समय |
|---|---|
| दिवाली की तारीख | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे |
| प्रदोष काल | शाम 5:31 से रात 8:09 बजे |
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त | शाम 5:54 से 7:50 बजे |
| वृषभ लग्न | शाम 5:54 से 7:50 बजे |
ये समय नई दिल्ली के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। दूसरे शहरों में सूर्यास्त और लग्न के अंतर के कारण पूजा का मुहूर्त कुछ मिनट अलग हो सकता है।
Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat: लक्ष्मी पूजा का शुभ समय
दीपावली की शाम माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक बताया गया है। यह समय प्रदोष काल और वृषभ लग्न के संयोग में आता है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक।
Diwali 2026 इस अवधि में श्रद्धालु माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और अपनी परंपरा के अनुसार भगवान कुबेर का पूजन कर सकते हैं। पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें, ताकि शुभ समय में पूजा शुरू करने में परेशानी न हो।
प्रदोष काल का महत्व क्या है?
Diwali 2026 प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय होता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में इस अवधि को पूजा और दीपदान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दीपावली पर इसी समय घरों में दीपक जलाए जाते हैं और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
नई दिल्ली में 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त इसी अवधि के भीतर है।
वृषभ लग्न में लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?
वृषभ लग्न को ज्योतिषीय परंपरा में स्थिर लग्न माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार स्थिर लग्न में माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसीलिए दीपावली के दिन कई पंचांगों में प्रदोष काल के साथ वृषभ लग्न के समय को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
नई दिल्ली के लिए यह अवधि शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है।
Diwali 2026 City Wise Lakshmi Puja Muhurat: देश के प्रमुख शहरों में पूजा का समय
भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग की गणना अलग होती है। इस वजह से दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ समय भी शहर के अनुसार बदलता है। दिल्ली में जहां पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से है, वहीं मुंबई में यह शाम 6:27 बजे से शुरू होता है।
नीचे 8 नवंबर 2026 के लिए प्रमुख शहरों के स्थानीय लक्ष्मी पूजा मुहूर्त दिए गए हैं।
| शहर | लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त |
|---|---|
| नई दिल्ली | शाम 5:54 से 7:50 बजे |
| नोएडा | शाम 5:54 से 7:49 बजे |
| गुरुग्राम | शाम 5:55 से 7:51 बजे |
| चंडीगढ़ | शाम 5:52 से 7:46 बजे |
| जयपुर | शाम 6:03 से 7:59 बजे |
| मुंबई | शाम 6:27 से 8:27 बजे |
| पुणे | शाम 6:24 से 8:24 बजे |
| अहमदाबाद | शाम 6:22 से 8:20 बजे |
| कोलकाता | शाम 5:20 से 7:18 बजे |
| चेन्नई | शाम 6:07 से 8:09 बजे |
| हैदराबाद | शाम 6:07 से 8:08 बजे |
| बेंगलुरु | शाम 6:17 से 8:20 बजे |
पाठकों के लिए जरूरी सूचना: ये समय संबंधित शहरों के स्थानीय समय के अनुसार हैं। अलग-अलग पंचांगों में गणना के तरीके के कारण एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है। यदि आपका शहर इस सूची में नहीं है, तो अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि करें।
Diwali Puja Samagri 2026: लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए पूरी सामग्री
दिवाली की पूजा से पहले सभी जरूरी वस्तुओं को एक जगह व्यवस्थित कर लेना चाहिए। इससे पूजा के समय कोई सामग्री ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लक्ष्मी पूजा की मुख्य सामग्री
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
- पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- रोली, कुमकुम और हल्दी
- अक्षत यानी साबुत चावल
- फूल और फूलों की माला
- कमल का फूल, यदि उपलब्ध हो
- धूप, अगरबत्ती और कपूर
- मिट्टी के दीपक और रुई की बाती
- घी या तिल का तेल
- कलश, जल और आम के पत्ते
- नारियल और सुपारी
- पान के पत्ते और इलायची
- फल और मिठाई
- पंचामृत
- चांदी या तांबे का सिक्का
- पूजा की थाली और घंटी
व्यापारियों के लिए पूजा सामग्री
व्यापारी वर्ग दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान, तिजोरी और बही-खातों की पूजा भी करता है। इसके लिए नई बही, कलम, स्याही, गणेश-लक्ष्मी की तस्वीर, सिक्के और प्रतिष्ठान की परंपरा के अनुसार अन्य सामग्री रखी जा सकती है।
पूजा सामग्री में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। सभी वस्तुओं का होना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा, स्वच्छता और अच्छे भाव को अधिक महत्व दिया जाता है।
Diwali Lakshmi Puja Vidhi 2026: घर पर कैसे करें मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा?
यदि आप घर पर दिवाली की पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए सामान्य चरणों का पालन कर सकते हैं। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
1. घर और पूजा स्थल की सफाई करें
दिवाली से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें।
2. कलश स्थापना करें
एक साफ कलश में जल भरें। परंपरा के अनुसार उसमें सुपारी, अक्षत और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। कलश को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है।

3. भगवान गणेश का पूजन करें
Diwali 2026 किसी भी शुभ पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करने की परंपरा है। उन्हें दूर्वा, फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी की पूजा करें।
4. माता लक्ष्मी का पूजन करें
माता लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली, फल और मिठाई अर्पित करें। दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करें।
5. भगवान कुबेर का स्मरण करें
भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है। कई परिवारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर का भी स्मरण किया जाता है।
6. बही-खाते और तिजोरी की पूजा करें
व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठान में बही-खातों, तिजोरी और व्यापार से जुड़ी वस्तुओं का पूजन करता है। नई बही पर शुभ चिह्न बनाकर नए वित्तीय वर्ष या कारोबारी शुरुआत की मंगलकामना की जाती है।
7. आरती और प्रसाद वितरण करें
पूजा के अंत में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद बांटें और घर के मुख्य द्वार तथा अन्य सुरक्षित स्थानों पर दीपक जलाएं।
Diwali 2026: दिवाली पर दीपदान का क्या महत्व है?
दीपावली का नाम ही दीपों की पंक्ति से जुड़ा है। इस दिन दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय, आशा, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार लोग घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन, तुलसी के पास और मंदिरों में दीपक जलाते हैं। कई परिवार मिट्टी के दीपक में घी या तेल डालकर शाम को दीपदान करते हैं।
दिवाली पर कहां-कहां जलाएं दीपक?
- घर के मुख्य द्वार पर।
- पूजा स्थल और मंदिर में।
- तुलसी के पौधे के पास, यदि घर में तुलसी है।
- बालकनी और आंगन में सुरक्षित स्थान पर।
- घर की खिड़कियों और प्रवेश द्वार के आसपास।
- अपनी परंपरा के अनुसार मंदिर या अन्य पवित्र स्थान पर।
दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें। उन्हें पर्दों, कागज, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपकों को दूर रखें।
Diwali 2026 पर माता लक्ष्मी की पूजा क्यों की जाती है?
माता लक्ष्मी को हिंदू धर्म में धन, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। दीपावली की अमावस्या पर उनकी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन स्वच्छ और रोशनी से सजे घर में माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
इसी कारण दिवाली से पहले लोग घरों की सफाई करते हैं, मुख्य द्वार पर रंगोली बनाते हैं, फूलों से सजावट करते हैं और शाम को दीप जलाते हैं।
हालांकि, लक्ष्मी पूजा का संदेश केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह परिश्रम, सदाचार, परिवार की खुशहाली और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है।
Diwali 2026 पर भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है?
माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की परंपरा है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ कराने वाला देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण करने से कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
इसीलिए दीपावली की पूजा में पहले भगवान गणेश का पूजन और उसके बाद माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कई परिवार माता सरस्वती और भगवान कुबेर का भी स्मरण करते हैं।
Diwali 2026 के पांच दिनों का महत्व: धनतेरस से भाई दूज तक
दीपावली का उत्सव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता। इसके आसपास कई पर्व और धार्मिक परंपराएं जुड़ी होती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में तिथियों और अनुष्ठानों का पालन स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाता है।
धनतेरस
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और घर के उपयोग की वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। कई परिवार शाम को यम दीपदान भी करते हैं।
नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था। इस दिन अभ्यंग स्नान, दीपदान और भगवान श्रीकृष्ण के स्मरण की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में काली चौदस भी इसी समय मनाई जाती है।
दीपावली और लक्ष्मी पूजा
दीपावली के मुख्य दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घरों को दीपों, रंगोली और रोशनी से सजाया जाता है। परिवार के सदस्य एक साथ पूजा करते हैं और मिठाइयां बांटते हैं।
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ी परंपरा है। कई क्षेत्रों में अन्नकूट बनाया जाता है और भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
भाई दूज
भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व है। इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी खुशहाली की कामना करती हैं।
नोट: इन पर्वों की तिथियों और अनुष्ठानों में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। अपने शहर के कैलेंडर के अनुसार पर्व की तारीख और मुहूर्त की पुष्टि करें।
Diwali 2026 पर घर को कैसे सजाएं? अपनाएं ये आसान तरीके
दीपावली पर घर की सजावट त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देती है। आप कम खर्च में भी घर को सुंदर और पारंपरिक रूप दे सकते हैं।
मुख्य द्वार पर फूलों का तोरण लगाएं
गेंदे के फूलों और आम के पत्तों से बना तोरण घर के प्रवेश द्वार को सुंदर बना सकता है। यह पारंपरिक सजावट का लोकप्रिय तरीका है।
रंगोली बनाकर घर को सजाएं
मुख्य दरवाजे या आंगन में रंगोली बनाएं। रंगों, फूलों और दीपकों से तैयार रंगोली त्योहार के वातावरण को खास बना सकती है।
मिट्टी के दीपकों से रोशनी करें
बालकनी, आंगन और पूजा स्थल पर सुरक्षित तरीके से मिट्टी के दीपक जलाएं। दीपकों को ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
पूजा स्थल को फूलों से सजाएं
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं के आसपास ताजे फूल, माला और साफ कपड़ा रखें। पूजा स्थल को व्यवस्थित और स्वच्छ रखें।
सुरक्षित LED लाइट का इस्तेमाल करें
घर की बालकनी, खिड़कियों और बाहरी दीवारों पर अच्छी गुणवत्ता वाली LED लाइट लगाएं। बिजली के तारों को पानी और गर्मी से सुरक्षित रखें।
दिवाली पर पटाखे जलाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
दीपावली पर आतिशबाजी कई जगह उत्सव का हिस्सा होती है, लेकिन पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, पालतू जानवरों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को इससे विशेष परेशानी हो सकती है।
- स्थानीय प्रशासन के नियमों और प्रतिबंधों का पालन करें।
- केवल कानूनी रूप से अनुमत आतिशबाजी का उपयोग करें।
- बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।
- पानी और प्राथमिक उपचार का सामान पास रखें।
- बंद स्थानों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पटाखे न जलाएं।
- पटाखे जलाने के बाद कचरे को सुरक्षित तरीके से साफ करें।
- संभव हो तो दीपों, फूलों और रोशनी के साथ पर्यावरण-अनुकूल दिवाली मनाएं।
Diwali 2026 पर क्या करें और किन बातों से बचें?
| क्या करें | किन बातों से बचें |
|---|---|
| घर और पूजा स्थल साफ रखें | पूजा स्थल को गंदा न छोड़ें |
| परिवार के साथ पूजा करें | पूजा में जल्दबाजी न करें |
| जरूरतमंदों की मदद करें | दिखावे के लिए अनावश्यक खर्च न करें |
| सुरक्षित तरीके से दीप जलाएं | दीपक ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें |
| मिठाइयां और प्रसाद बांटें | मिलावटी खाद्य पदार्थों से सावधान रहें |
| पर्यावरण का ध्यान रखें | प्रतिबंधित पटाखे न जलाएं |
| स्थानीय पूजा मुहूर्त देखें | दूसरे शहर का मुहूर्त अपने शहर पर लागू न करें |
दिवाली 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Diwali 2026 कब है?
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक अमावस्या के अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।
2. Diwali 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है। दूसरे शहरों में स्थानीय समय अलग हो सकता है।
3. Diwali 2026 पर अमावस्या तिथि कब शुरू होगी?
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी।
4. Diwali 2026 पर अमावस्या तिथि कब समाप्त होगी?
अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।
5. दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ किसकी पूजा की जाती है?
दिवाली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परिवार भगवान कुबेर और माता सरस्वती का भी स्मरण करते हैं।
6. दिवाली की पूजा में कौन-सी सामग्री जरूरी है?
पूजा के लिए माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा, चौकी, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, कपूर, फल, मिठाई, कलश और अन्य पारंपरिक सामग्री रखी जाती है।

7. दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
दीपक जलाने की कोई एक अनिवार्य संख्या सभी परिवारों के लिए निर्धारित नहीं है। लोग अपनी परंपरा, श्रद्धा और सुविधा के अनुसार दीपक जलाते हैं।
8. Diwali 2026 पर प्रदोष काल कब है?
नई दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा।
9. क्या मुंबई और दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का समय एक जैसा है?
नहीं। मुंबई में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:27 से 8:27 बजे तक है, जबकि नई दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है।
10. दिवाली के बाद कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं?
दीपावली के आसपास गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व मनाए जाते हैं। इनके अलावा धनतेरस और नरक चतुर्दशी भी दीपावली उत्सव का हिस्सा हैं। तारीखें स्थानीय पंचांग के अनुसार जांचें।
Diwali 2026 निष्कर्ष: दिवाली 2026 पर घर में ही नहीं, जीवन में भी जलाएं खुशियों के दीप
दिवाली केवल रोशनी और सजावट का त्योहार नहीं है। यह परिवार, प्रेम, विश्वास, सकारात्मकता और नई शुरुआत का संदेश देता है। 8 नवंबर 2026 को दीपावली के अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें, घर में दीप जलाएं और अपने प्रियजनों के साथ खुशियां बांटें।
इस बार दिवाली पर दिखावे और अनावश्यक खर्च के बजाय परिवार के साथ समय बिताने, जरूरतमंदों की मदद करने और पर्यावरण का ध्यान रखने का संकल्प लें।
समयधारा की ओर से आप सभी पाठकों को दीपावली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! मां लक्ष्मी आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आएं।
संपादकीय सूचना: पूजा के मुहूर्त नई दिल्ली और संबंधित शहरों के स्थानीय पंचांग के अनुसार दिए गए हैं। पंचांग गणना और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। पाठक अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अंतिम पुष्टि अवश्य करें।
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