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Thursday Thoughts: वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि…

...उसने कितने पुष्प खो दिए; वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है। जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है ।

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वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि
उसने कितने पुष्प खो दिए;
वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है।
जीवन में कितना कुछ खो गया,
इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं,
इसी में जीवन की सार्थकता है ।

 

 

 

 

सदैव ‘ना’ का मतलब ‘ना’ नहीं होता है

उसके पीछे अवसर के रूप में ‘हां’ कार्य करता है।

 

 

 

 

साईं बाबा कहते है की आदमी पल में अमीर है, पल में फकीर है,

इसलिए अच्छे कर्म करले बंदे, क्योंकि यह तो बस तकदीर है। – साईं बाबा

 

 

 

 

ज्यादा हंसने और बोलने वाला व्यक्ति
अगर चुप हो जाए
तो मान लेना वह भीतर से टूट चुका है। 

 

 

 

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Dropadi Kanojiya

द्रोपदी कनौजिया पेशे से टीचर रही है लेकिन अपने लेखन में रुचि के चलते समयधारा के साथ शुरू से ही जुड़ी है। शांत,सौम्य स्वभाव की द्रोपदी कनौजिया की मुख्य रूचि दार्शनिक,धार्मिक लेखन की ओर ज्यादा है।

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