
Ganesh Ji Ki Janm Katha भगवान गणेश की जन्म कथा: गणेश जी का जन्म कैसे हुआ? माता पार्वती और भगवान शिव की पूरी कहानी
Ganesh Ji Ki Janm Katha: आखिर गणेश जी का सिर हाथी का कैसे हुआ?
भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, बुद्धि और विवेक के देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, विवाह, गृह प्रवेश या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करने की परंपरा है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेश जी का जन्म कैसे हुआ? माता पार्वती ने उन्हें क्यों बनाया? भगवान शिव ने अपने ही पुत्र का सिर क्यों काट दिया और बाद में उनके शरीर पर हाथी का सिर कैसे लगाया गया?
Ganesh Ji Ki Janm Katha से जुड़ी यह कथा बेहद रोचक होने के साथ-साथ गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती है।
पौराणिक कथाओं के अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस कथा के विवरण में कुछ अंतर मिलता है, लेकिन प्रचलित कथा के अनुसार गणेश जी के जन्म और उनके गजमुख बनने की कहानी इस प्रकार है।
गणेश जी कौन हैं?
भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है। इनमें गणपति, गणेश, विनायक, गजानन, एकदंत, लंबोदर, विघ्नहर्ता और सिद्धिविनायक प्रमुख हैं।
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उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती का पुत्र माना जाता है। गणेश जी को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, शुभता और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू परंपरा में किसी भी मंगल कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने का कारण यही माना जाता है कि वे भक्तों के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं।
माता पार्वती ने गणेश जी को कैसे बनाया?
Ganesh Ji Ki Janm Katha का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माता पार्वती द्वारा गणेश जी की रचना से शुरू होता है।
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उस समय भगवान शिव उनके आसपास नहीं थे। माता पार्वती चाहती थीं कि जब तक वे स्नान करें, तब तक कोई उनके कक्ष में प्रवेश न करे।
इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने शरीर पर लगे उबटन/चंदन या शरीर के मैल से एक बालक की आकृति बनाई। माता पार्वती ने उसमें प्राण फूंक दिए और वह बालक जीवित हो गया।
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वह बालक आगे चलकर भगवान गणेश कहलाए।
माता पार्वती ने गणेश जी को अपना पुत्र माना और उन्हें आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दिया जाए।
गणेश जी ने अपनी माता की आज्ञा स्वीकार कर ली।
गणेश जी ने माता पार्वती की आज्ञा को सबसे ऊपर रखा
गणेश जी उस समय भगवान शिव से भी परिचित नहीं थे। उनके लिए माता पार्वती ही उनकी माता और सर्वोच्च थीं।
माता ने स्पष्ट आदेश दिया था कि किसी को भी अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाए।
इसलिए गणेश जी द्वार पर पहरा देने लगे।
यहीं से कथा में एक बड़ा मोड़ आता है।
भगवान शिव वहां पहुंचे
कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे। भगवान शिव माता पार्वती के पति थे और स्वाभाविक रूप से वे अपने घर में प्रवेश करना चाहते थे।
लेकिन द्वार पर खड़े गणेश जी ने उन्हें रोक दिया।
भगवान शिव ने गणेश जी से कहा कि वे अंदर जाना चाहते हैं, लेकिन गणेश जी ने माता पार्वती की आज्ञा का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया।
गणेश जी के लिए सामने खड़े व्यक्ति भगवान शिव थे, लेकिन वे उन्हें पहचानते नहीं थे। उन्हें केवल अपनी माता का आदेश याद था।
उन्होंने भगवान शिव से कहा कि माता की अनुमति के बिना वे अंदर प्रवेश नहीं कर सकते।
शिव जी और गणेश जी के बीच विवाद क्यों हुआ?
भगवान शिव ने गणेश जी को समझाने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी अपनी जगह से नहीं हटे।
दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।
गणेश जी अपनी माता की आज्ञा का पालन करने पर अडिग थे। दूसरी ओर भगवान शिव को यह बात स्वीकार नहीं थी कि कोई उन्हें उनके ही घर में प्रवेश करने से रोक रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई।
पौराणिक वर्णनों में बताया जाता है कि भगवान शिव के गणों ने भी गणेश जी को हटाने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी ने उनका सामना किया।
भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा?
कथा के अनुसार गणेश जी ने भगवान शिव और उनके गणों को अपने रास्ते से हटने नहीं दिया।
इसके बाद भगवान शिव और गणेश जी के बीच भयंकर संघर्ष हुआ।
अंततः भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर अलग कर दिया।
यह घटना माता पार्वती के लिए अत्यंत दुखद और क्रोधपूर्ण थी।
जब माता पार्वती को पता चला कि भगवान शिव ने उनके पुत्र का सिर काट दिया है, तो वे अत्यंत क्रोधित हो उठीं।
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माता पार्वती ने लिया भयंकर रूप
अपने पुत्र की मृत्यु से माता पार्वती का क्रोध बढ़ गया।
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपना उग्र रूप धारण कर लिया और देवताओं के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि उनके पुत्र को जीवित नहीं किया गया, तो वे पूरे संसार के लिए विनाशकारी परिणाम पैदा कर सकती हैं।
देवताओं ने माता पार्वती को शांत करने का प्रयास किया।
इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित करने का वचन दिया।
गणेश जी को हाथी का सिर कैसे मिला?
अब कथा का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा आता है—गणेश जी का सिर हाथी का कैसे हुआ?
भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि वे ऐसे प्राणी का सिर लेकर आएं जिसका मुख उत्तर दिशा की ओर हो और जो सबसे पहले मिले।
कथा के एक प्रचलित रूप में उन्हें एक हाथी मिला।
उस हाथी का सिर लाया गया और भगवान शिव ने उसे गणेश जी के शरीर पर स्थापित कर दिया।
इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवन प्रदान किया।
इस तरह गणेश जी गजानन, यानी हाथी के मुख वाले देवता बन गए।
यही कारण है कि भगवान गणेश को गजमुख और गजानन जैसे नामों से भी जाना जाता है।
भगवान शिव ने गणेश जी को कौन-कौन से वरदान दिए?
गणेश जी के पुनर्जीवित होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें अनेक आशीर्वाद दिए।
सबसे महत्वपूर्ण वरदान यह था कि गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाएगा।
अर्थात किसी भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाएगी।
इसी कारण आज भी लोग कहते हैं—
“श्री गणेश करो”
यानी किसी नए काम की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करो।
गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है?
गणेश जी को प्रथम पूज्य बनाए जाने के पीछे एक अन्य प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी है।
कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों—गणेश और कार्तिकेय—से कहा कि जो सबसे पहले पूरे संसार की परिक्रमा करके लौटेगा, उसे विशेष सम्मान मिलेगा।
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर संसार की परिक्रमा करने निकल पड़े।
गणेश जी का वाहन छोटा मूषक था। उनके लिए पूरे संसार की परिक्रमा करना कठिन था।
लेकिन गणेश जी ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया।
उन्होंने अपने माता-पिता—भगवान शिव और माता पार्वती—की तीन बार परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता ही उनके लिए पूरा संसार हैं।
उनकी बुद्धिमत्ता से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न हुए।
इसी कथा के आधार पर गणेश जी को बुद्धि और विवेक का प्रतीक भी माना जाता है।
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गणेश जी की सूंड का क्या महत्व है?
भगवान गणेश की सबसे खास पहचान उनका हाथी का मुख और सूंड है।
हाथी को भारतीय परंपरा में शक्ति, बुद्धि, धैर्य और स्मरण शक्ति से जोड़ा जाता है।
गणेश जी का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में केवल शारीरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक का उपयोग भी जरूरी है।
उनकी सूंड को लचीलापन और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने का प्रतीक भी माना जाता है।
गणेश जी के बड़े कान क्या संदेश देते हैं?
गणेश जी के बड़े-बड़े कान भी उनके स्वरूप का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
धार्मिक व्याख्याओं में बड़े कानों को अधिक सुनने और कम बोलने का प्रतीक माना जाता है।
मनुष्य के लिए इसका संदेश है कि किसी भी निर्णय से पहले दूसरों की बात ध्यान से सुननी चाहिए।
यानी गणेश जी का स्वरूप केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देता है।
गणेश जी का एक दांत क्यों है?
भगवान गणेश को एकदंत भी कहा जाता है।
उनका एक दांत टूटा हुआ और दूसरा पूर्ण माना जाता है। इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने जब महाभारत की रचना का वर्णन करना शुरू किया, तो उसे लिखने के लिए गणेश जी को लेखक बनाया गया।
लेखन के दौरान जब उनकी कलम टूट गई, तो गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़कर उसे लेखनी के रूप में इस्तेमाल किया।
इसी कारण उनका एक नाम एकदंत पड़ा।
हालांकि गणेश जी के टूटे दांत से जुड़ी अन्य पौराणिक कथाएं भी मिलती हैं।
गणेश जी का वाहन मूषक क्यों है?
भगवान गणेश का वाहन मूषक यानी चूहा है।
पहली नजर में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है कि विशाल शरीर और हाथी के मुख वाले देवता का वाहन इतना छोटा जीव क्यों है।
इसकी धार्मिक व्याख्या बहुत रोचक है।
मूषक को अक्सर इच्छाओं और चंचल मन का प्रतीक माना जाता है। मनुष्य का मन भी एक जगह स्थिर नहीं रहता और लगातार इधर-उधर भागता रहता है।
गणेश जी का मूषक पर सवार होना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि बुद्धि और विवेक से मन तथा इच्छाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
गणेश जी के प्रमुख नाम और उनके अर्थ
| गणेश जी का नाम | अर्थ |
|---|---|
| गणेश | गणों के ईश्वर |
| गणपति | गणों के स्वामी |
| गजानन | हाथी के मुख वाले |
| गजमुख | हाथी के समान मुख वाले |
| एकदंत | एक दांत वाले |
| लंबोदर | बड़े उदर वाले |
| विनायक | विशेष नायक |
| विघ्नहर्ता | बाधाओं को दूर करने वाले |
| सिद्धिविनायक | सिद्धि प्रदान करने वाले |
| मंगलमूर्ति | मंगल के स्वरूप |
| प्रथमेश | प्रथम पूज्य |
| वक्रतुंड | मुड़ी हुई सूंड वाले |
गणेश जी की पूजा में दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
भगवान गणेश को दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी जाती है।
गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
पौराणिक कथाओं में दूर्वा को भगवान गणेश से जोड़ने वाली अलग-अलग कथाएं मिलती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।
इसके अलावा उन्हें मोदक और लड्डू भी प्रिय माने जाते हैं।
गणेश जी को मोदक क्यों पसंद है?
मोदक को भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है।
मोदक का आकार और उसका अंदर से मीठा होना भी प्रतीकात्मक रूप से देखा जाता है।
बाहर से साधारण लेकिन अंदर से मिठास से भरपूर मोदक को ज्ञान और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक माना जाता है।
इसी वजह से गणेश उत्सव के दौरान घरों और मंदिरों में गणेश जी को मोदक का भोग लगाया जाता है।
Ganesh Ji Ki Janm Katha से क्या सीख मिलती है?
गणेश जी की जन्म कथा केवल एक पौराणिक घटना नहीं है। इसमें कई महत्वपूर्ण जीवन संदेश भी छिपे हुए हैं।
1. माता-पिता का सम्मान
गणेश जी ने माता पार्वती की आज्ञा का पालन किया। यह माता-पिता के प्रति सम्मान और कर्तव्य का संदेश देता है।
2. कर्तव्य के प्रति निष्ठा
गणेश जी जानते नहीं थे कि सामने भगवान शिव हैं। फिर भी उन्होंने अपने कर्तव्य से पीछे हटने से इनकार कर दिया।
3. बुद्धि का महत्व
गणेश जी की कई कथाओं में उनकी बुद्धिमत्ता और विवेक को सबसे महत्वपूर्ण गुण बताया गया है।
4. अहंकार से बचने का संदेश
गणेश और शिव की कथा को अहंकार, पहचान और कर्तव्य के बीच संघर्ष के रूप में भी समझा जाता है।
5. नई शुरुआत
गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाना यह संदेश देता है कि किसी भी नए काम की शुरुआत बुद्धि, विवेक और सकारात्मक सोच के साथ करनी चाहिए।
गणेश जी के गजमुख स्वरूप का आध्यात्मिक अर्थ
गणेश जी का हाथी का सिर उनके स्वरूप की सबसे अनोखी विशेषता है।
हाथी विशाल होने के बावजूद शांत स्वभाव वाला माना जाता है। वह बाधाओं को पार करने की क्षमता रखता है।
इसी कारण गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है।
उनका बड़ा सिर ज्ञान का, बड़े कान सुनने का, छोटी आंखें एकाग्रता का और सूंड विवेक एवं अनुकूलन क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।
इस प्रकार गणेश जी का पूरा स्वरूप अपने आप में एक संदेश देता है।
गणेश जी के स्वरूप का प्रतीकात्मक अर्थ
| गणेश जी का अंग | प्रतीकात्मक संदेश |
|---|---|
| हाथी का सिर | बुद्धि और विवेक |
| बड़ी सूंड | परिस्थितियों के अनुसार ढलना |
| बड़े कान | ध्यान से सुनना |
| छोटी आंखें | एकाग्रता |
| बड़ा पेट | सहनशीलता |
| एकदंत | त्याग और दृढ़ता |
| मूषक वाहन | इच्छाओं पर नियंत्रण |
| मोदक | ज्ञान और आनंद |
क्या गणेश जी वास्तव में भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र थे?
हिंदू धार्मिक परंपरा में गणेश जी को भगवान शिव और माता पार्वती का पुत्र माना जाता है।
हालांकि गणेश जी के जन्म से संबंधित कथाएं अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में कुछ भिन्न रूपों में मिलती हैं।
सबसे लोकप्रिय कथा में माता पार्वती द्वारा गणेश जी की रचना और भगवान शिव द्वारा उन्हें हाथी का सिर प्रदान करने की घटना प्रमुख है।
इसलिए Ganesh Ji Ki Janm Katha का एक ही संस्करण मानने के बजाय यह समझना महत्वपूर्ण है कि हिंदू पौराणिक परंपरा में इस कथा के विभिन्न रूप मौजूद हैं।
गणेश चतुर्थी और गणेश जी की जन्म कथा का संबंध
भगवान गणेश के जन्म से जुड़ी मान्यताओं के कारण गणेश चतुर्थी का पर्व विशेष महत्व रखता है।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की स्थापना की जाती है।
भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनसे सुख, समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
गणेश उत्सव के दौरान गणपति की स्थापना से लेकर विसर्जन तक भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
Frequently Asked Questions: Ganesh Ji Ki Janm Katha
1. गणेश जी का जन्म कैसे हुआ था?
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन/चंदन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। यही बालक आगे चलकर भगवान गणेश कहलाए।
2. गणेश जी का सिर हाथी का कैसे हुआ?
कथा के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया था। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित किया और उनके शरीर पर हाथी का सिर लगाया।
3. भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा?
गणेश जी माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को अंदर जाने से रोक रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच संघर्ष हुआ और भगवान शिव ने उनका सिर काट दिया।
4. गणेश जी की माता कौन हैं?
हिंदू धार्मिक परंपरा में माता पार्वती को भगवान गणेश की माता और भगवान शिव को उनके पिता के रूप में माना जाता है।
5. गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है?
भगवान शिव द्वारा गणेश जी को वरदान दिया गया कि किसी भी शुभ कार्य और पूजा से पहले उनका स्मरण और पूजन किया जाएगा। इसी कारण वे प्रथम पूज्य कहलाते हैं।
6. गणेश जी का वाहन क्या है?
भगवान गणेश का वाहन मूषक यानी चूहा माना जाता है।
7. गणेश जी को कौन सा भोग प्रिय है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को मोदक और लड्डू प्रिय हैं। पूजा में दूर्वा भी विशेष रूप से अर्पित की जाती है।
8. गणेश जी को विघ्नहर्ता क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि भगवान गणेश भक्तों के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। इसी वजह से उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है।
निष्कर्ष: गणेश जी की जन्म कथा सिर्फ एक कहानी नहीं
Ganesh Ji Ki Janm Katha भगवान गणेश के जन्म, माता पार्वती के मातृत्व, भगवान शिव के साथ उनके संघर्ष और उनके गजमुख स्वरूप की एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है।
इस कथा का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग यही है कि माता पार्वती ने गणेश जी को बनाया, गणेश जी ने माता की आज्ञा के कारण भगवान शिव को रोक दिया, संघर्ष में उनका सिर कट गया और बाद में भगवान शिव ने उन्हें हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवन दिया।
इसके बाद गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला।
यही वजह है कि आज भी किसी शुभ कार्य से पहले श्रद्धा से कहा जाता है—
“ॐ श्री गणेशाय नमः।”
और भगवान गणेश से सुख, समृद्धि, बुद्धि तथा सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
Shorts के लिए 40 सेकंड की स्क्रिप्ट
क्या आप जानते हैं भगवान गणेश का सिर हाथी का कैसे हुआ?
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक बनाया और उसमें प्राण डाल दिए। यही बालक गणेश कहलाए।
माता पार्वती ने गणेश जी को आदेश दिया कि उनकी अनुमति के बिना किसी को अंदर न आने दें।
तभी भगवान शिव वहां पहुंचे। गणेश जी ने उन्हें भी रोक दिया। विवाद बढ़ा और भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया।
माता पार्वती के क्रोध के बाद भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित करने का वचन दिया। हाथी का सिर लाकर गणेश जी के शरीर पर लगाया गया और उन्हें नया जीवन मिला।
साथ ही उन्हें वरदान मिला कि हर शुभ कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा होगी।
इसीलिए वे कहलाए—प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता!
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❓ FAQ Schema के लिए Questions
Q1. गणेश जी का जन्म कैसे हुआ था?
प्रचलित कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी की रचना की और उनमें प्राण डाल दिए।
Q2. गणेश जी का सिर हाथी का कैसे हुआ?
कथा के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया था। बाद में उन्हें हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया गया।
Q3. भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा था?
गणेश जी माता पार्वती की आज्ञा के कारण भगवान शिव को अंदर जाने से रोक रहे थे, जिसके बाद दोनों के बीच संघर्ष हुआ।
Q4. गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है?
भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया कि किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाएगी।
Q5. गणेश जी का वाहन क्या है?
भगवान गणेश का वाहन मूषक यानी चूहा माना जाता है।
Q6. गणेश जी को कौन सा भोग प्रिय है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को मोदक और लड्डू प्रिय हैं तथा पूजा में दूर्वा अर्पित की जाती है।
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