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Jain Fasting: सूर्यास्त के बाद पानी भी नहीं! आखिर कैसे किए जाते हैं 3, 8 और 30 दिन के उपवास?

Jain Fasting क्या है? जानें Jain Upvas, Chauvihar, Tivihar, Attham, Atthai, Masakshaman, Ayambil, Ekasan और Biyasan के नियम और महत्व।

Jain Fasting: सूर्यास्त के बाद पानी भी नहीं! आखिर कैसे किए जाते हैं 3, 8 और 30 दिन के उपवास?

क्या आप बिना खाना खाए एक दिन रह सकते हैं? शायद हां। लेकिन जैन धर्म में कई श्रद्धालु 3 दिन, 8 दिन और यहां तक कि 30 दिन तक लगातार उपवास की तपस्या करते हैं।

कुछ तप में दिन के निश्चित समय में केवल उबला पानी लिया जाता है, जबकि Chauvihar Upvas में पानी का भी त्याग किया जाता है। आखिर इतनी कठिन तपस्या क्यों की जाती है और इसके नियम क्या हैं?

जैन धर्म में उपवास केवल भोजन छोड़ने का नाम नहीं है। यह आत्मसंयम, इंद्रिय-निग्रह, त्याग और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी तपस्या है।

जैन परंपरा में तप के कई स्तर हैं—Ekasan, Biyasan, Ayambil, Upvas, Tivihar, Chauvihar, Attham, Atthai और Masakshaman जैसे शब्द इसी तप-परंपरा के अलग-अलग रूपों को बताते हैं।

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खास बात यह है कि जैन उपवास में केवल यह नहीं देखा जाता कि व्यक्ति ने खाना खाया या नहीं। कब खाना है, कितनी बार खाना है, किस प्रकार का भोजन लेना है, सूर्यास्त के बाद क्या त्यागना है और पानी कब लिया जा सकता है—इन सबके भी विशेष नियम हो सकते हैं।

इसलिए Jain fasting को सामान्य अर्थ वाले ‘फास्टिंग’ से समझना पर्याप्त नहीं है। आइए जानते हैं जैन धर्म में उपवास और तपस्या के प्रमुख प्रकारों को आसान भाषा में।

Jain Upvas क्या है?

जैन धर्म में Upvas का सामान्य अर्थ भोजन का त्याग करके तप करना है। कई जैन शिक्षण स्रोतों में उपवास को दिन-रात भोजन से विरत रहने की साधना बताया गया है। इसके अलग रूपों में Tivihar Upvas में उबला हुआ पानी निर्धारित समय में लिया जा सकता है, जबकि Chauvihar Upvas में पानी का भी त्याग किया जाता है।

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यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए—हर उपवास Chauvihar नहीं होता। इसी तरह हर व्यक्ति का उपवास एक जैसा भी नहीं होता।

Jain Fasting क्या है? Chauvihar, Tivihar, Attham, Atthai, Masakshaman और Ayambil जैसे जैन तपों के नियम, अंतर और आध्यात्मिक महत्व आसान भाषा में जानें।
Jain Fasting क्या है? Chauvihar, Tivihar, Attham, Atthai, Masakshaman और Ayambil जैसे जैन तपों के नियम, अंतर और आध्यात्मिक महत्व आसान भाषा में जानें।

उदाहरण के लिए:

  • Upvas: भोजन का पूर्ण त्याग।
  • Tivihar Upvas: भोजन का त्याग, लेकिन निर्धारित समय में उबला हुआ पानी लिया जा सकता है।
  • Chauvihar Upvas: भोजन और पानी दोनों का त्याग।
  • Ekasan: दिन में एक बार, एक बैठक में भोजन।
  • Biyasan: दिन में दो बार भोजन।
  • Ayambil: एक बार अत्यंत सादा, निर्धारित प्रकार का भोजन।

इसलिए जब कोई कहता है कि उसने “जैन उपवास” किया, तो यह जानना जरूरी है कि उसने कौन-सा तप किया था।

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रात से तैयारी: Chauvihar और Tivihar का क्या मतलब है?

जैन तपस्या में सूर्यास्त का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कई जैन अनुयायी दैनिक जीवन में भी सूर्यास्त के बाद भोजन का त्याग करते हैं।

Chauvihar क्या है?

Chauvihar में सूर्यास्त के बाद सूर्योदय तक भोजन और पानी का त्याग किया जाता है। जैन शिक्षण सामग्री में इसे सूर्यास्त के बाद अगले सूर्योदय तक पानी सहित सभी सेवन से विरत रहने के रूप में समझाया गया है।

यानी सरल शब्दों में:

सूर्यास्त → कुछ नहीं खाना → पानी भी नहीं → अगले सूर्योदय तक त्याग।

कई श्रद्धालु इसे दैनिक नियम के रूप में भी करते हैं, जबकि कठिन तप की तैयारी में भी Chauvihar या Tivihar का पालन किया जा सकता है।

Tivihar क्या है?

Tivihar में सूर्यास्त के बाद भोजन और अन्य पेय पदार्थों का त्याग किया जाता है, लेकिन पानी की अनुमति परंपरा और लिए गए संकल्प के अनुसार हो सकती है। कुछ जैन शिक्षण स्रोत इसे सूर्यास्त के बाद पानी की अनुमति वाला नियम बताते हैं।

Jain Fasting
Jain Fasting

इसलिए Chauvihar और Tivihar को एक ही समझना सही नहीं है।

Chauvihar = पानी सहित त्याग

Tivihar = पानी की अनुमति वाला त्याग

हालांकि अलग-अलग जैन संप्रदायों और परिवारों में व्यवहारिक नियमों तथा समय-सीमा में अंतर मिल सकता है।

– Micchami Dukkadam का अर्थ


Jain Upvas में उबला पानी कब लिया जाता है?

जैन तपस्या में उबले हुए पानी का विशेष महत्व है। कई जैन शिक्षण स्रोतों के अनुसार Upvas, Ekasan, Biyasan और Ayambil जैसे तपों में पानी की अनुमति हो तो सामान्यतः उबला हुआ पानी और निर्धारित समय के भीतर लिया जाता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि उपवास करने वाला व्यक्ति दिनभर जब चाहे पानी पी सकता है।

किस तप का पालन किया जा रहा है, उसके अनुसार पानी लेने का समय और तरीका निर्धारित हो सकता है।

विशेष रूप से Tivihar Upvas में भोजन नहीं लिया जाता, लेकिन निर्धारित दिन के समय में उबला हुआ पानी लिया जा सकता है।

इसके विपरीत Chauvihar Upvas में पानी भी नहीं लिया जाता।

यही वजह है कि जैन तपस्या में केवल “मैंने पानी पिया या नहीं” से नियम तय नहीं होता, बल्कि कौन-सा पचक्खाण या तप लिया गया है, यह महत्वपूर्ण होता है।


Chauvihar Upvas क्या है?

Chauvihar Upvas जैन धर्म की कठोर तपस्या में से एक माना जाता है।

इसमें उपवास के दौरान भोजन के साथ पानी का भी त्याग किया जाता है। जैन शिक्षण सामग्री इसे Tivihar Upvas से अलग बताते हुए स्पष्ट करती है कि Chauvihar में पानी भी नहीं लिया जाता।

इसे सरल उदाहरण से समझें:

सूर्यास्त के बाद:
भोजन नहीं
पेय नहीं
पानी नहीं

अगले सूर्योदय तक:
त्याग जारी रहता है।

लेकिन यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि लंबे समय का निर्जल उपवास सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं है। शरीर की क्षमता, उम्र, स्वास्थ्य और चिकित्सकीय स्थिति अलग-अलग होती है। इसलिए धार्मिक तपस्या का पालन करने वाला व्यक्ति अपने गुरु, साधु-साध्वी या परिवार की धार्मिक परंपरा के मार्गदर्शन के साथ ही कठिन तप का संकल्प लेता है।

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Tela/Attham क्या है?

जैन धर्म में Attham या Tela तीन लगातार दिनों के उपवास को कहा जाता है। जैन शिक्षण सामग्री में Attham को तीन consecutive Upvas के रूप में परिभाषित किया गया है।

इसे सामान्य रूप में इस तरह समझ सकते हैं:

दिन 1 — उपवास
दिन 2 — उपवास
दिन 3 — उपवास

लेकिन यहां “उपवास” किस प्रकार किया जा रहा है—Tivihar या Chauvihar—यह अलग प्रश्न है।

अर्थात तीन दिन का Attham अपने आप यह नहीं बताता कि तीनों दिन पानी बिल्कुल नहीं लिया गया। पानी की अनुमति तप के संकल्प और परंपरा पर निर्भर हो सकती है।

यही कारण है कि Jain fasting के बारे में इंटरनेट पर दिखाई देने वाली सामान्य जानकारी को सीधे सभी जैन समुदायों पर लागू करना ठीक नहीं है।


Atthai क्या है? 8 दिन का कठिन तप

Atthai जैन धर्म की प्रसिद्ध कठिन तपस्याओं में से एक है। इसका अर्थ है लगातार आठ दिनों का उपवास। जैन धर्म की शिक्षण सामग्री में Atthai को आठ consecutive Upvas के रूप में बताया गया है।

इसे सरल रूप में:

1 दिन → उपवास
2 दिन → उपवास
3 दिन → उपवास
4 दिन → उपवास
5 दिन → उपवास
6 दिन → उपवास
7 दिन → उपवास
8 दिन → उपवास

Atthai विशेष रूप से Paryushan के दौरान चर्चा में आता है और अनेक श्रद्धालु इसे अपनी क्षमता और धार्मिक संकल्प के अनुसार करते हैं।

हालांकि सभी श्रद्धालु Atthai ही करें, ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है। जैन धर्म में तप का उद्देश्य केवल कठिन से कठिन उपवास करना नहीं, बल्कि संयम और आत्मशुद्धि की साधना करना है।


Masakshaman क्या है? क्या 30 दिन तक उपवास होता है?

Masakshaman जैन तप परंपरा की अत्यंत कठिन साधनाओं में गिना जाता है। जैन शिक्षण स्रोत इसे लगातार एक महीने के उपवास के रूप में बताते हैं।

यानी लगभग:

30 दिनों तक लगातार Upvas की तपस्या।

लेकिन यहां एक बहुत जरूरी भ्रम दूर करना आवश्यक है।

क्या 30 दिन तक पानी भी बिल्कुल नहीं लिया जाता?

जरूरी नहीं।

“Masakshaman” लगातार उपवास की अवधि को बताता है। पानी लिया जाएगा या नहीं, यह उस तप के प्रकार और संकल्प पर निर्भर करता है। जैन परंपरा में Tivihar और Chauvihar जैसे भेद इसी कारण महत्वपूर्ण हैं। कुछ रूपों में निर्धारित समय पर उबला हुआ पानी लिया जा सकता है, जबकि Chauvihar रूप में पानी का भी त्याग होता है।

इसलिए यह कहना कि “हर Masakshaman में 30 दिन तक पानी भी नहीं लिया जाता” सही सामान्यीकरण नहीं होगा।

इतनी लंबी तपस्या अत्यंत कठिन है और इसे सामान्य वजन घटाने वाले fasting या lifestyle diet से तुलना करना भी उचित नहीं है।


Ayambil क्या है? इसमें खाना खाया जाता है, फिर भी यह कठिन तप क्यों है?

यह Jain fasting का एक ऐसा रूप है जिसे समझना बेहद जरूरी है।

Ayambil में भोजन पूरी तरह छोड़ा नहीं जाता। लेकिन भोजन की मात्रा, प्रकृति और स्वाद पर कड़े संयम के नियम होते हैं।

जैन शिक्षण सामग्री के अनुसार Ayambil में एक बार, एक बैठक में ऐसा सादा भोजन लिया जाता है जिसमें स्वाद और मसालों का प्रयोग नहीं होता तथा दूध, दही, घी, तेल, मिठाई, चीनी और कई प्रकार की सब्जियों आदि का त्याग किया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में कुछ विवरणों में अंतर हो सकता है।

इसका उद्देश्य स्वाद का आनंद लेना नहीं, बल्कि राग, आसक्ति और इंद्रिय-सुख पर संयम रखना है।

यही कारण है कि Ayambil को केवल “सादा खाना” समझना अधूरा है।

यह एक तप और अनुशासन है।

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Ekasan क्या है?

Ekasan का अर्थ है दिन में एक बार, एक बैठक में भोजन करना

इसमें भोजन की संख्या को सीमित किया जाता है।

उदाहरण:

सुबह से शाम तक कई बार खाने के बजाय
→ एक निर्धारित समय
→ एक बैठक
→ एक बार भोजन।

Ekasan का उद्देश्य केवल कम खाना नहीं बल्कि भोजन पर नियंत्रण और मन को संयमित करना है।

कई जैन तपों में Ekasan को आगे की कठिन तपस्या की दिशा में एक अनुशासन के रूप में भी देखा जाता है।


Biyasan क्या है?

Biyasan में दिन में दो बार भोजन किया जाता है और भोजन निर्धारित बैठकों में लिया जाता है।

यानी:

Biyasan = दो बार भोजन

Ekasan = एक बार भोजन

इन दोनों में केवल भोजन की संख्या का अंतर नहीं है; तप के संकल्प के अनुसार भोजन के समय, बैठने और अन्य आहार संबंधी नियम भी निर्धारित हो सकते हैं।

इसलिए जैन तप परंपरा को समझते समय “कम खाना” और “धार्मिक तप” को एक ही अर्थ में नहीं लेना चाहिए।


Paryushan में Jain fasting का इतना महत्व क्यों है?

Paryushan Parv जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व है। इस दौरान तप, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, संयम और आत्मचिंतन पर विशेष जोर दिया जाता है।

इसी वजह से इस समय Upvas, Ekasan, Ayambil, Attham और अन्य तप विशेष रूप से चर्चा में रहते हैं।

कई श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार तप करते हैं। कोई एक दिन का उपवास करता है, कोई Ayambil करता है, कोई Ekasan करता है और कुछ श्रद्धालु कठिन लंबे तप का संकल्प लेते हैं।

लेकिन Paryushan का संदेश केवल भोजन छोड़ना नहीं है।

इसका व्यापक उद्देश्य है:

  • आत्मचिंतन
  • संयम
  • अहिंसा
  • क्षमा
  • आसक्ति कम करना
  • इंद्रियों पर नियंत्रण
  • गलतियों का प्रायश्चित
  • आध्यात्मिक उन्नति

इसलिए Paryushan में किया गया तप बाहरी त्याग के साथ आंतरिक परिवर्तन से जुड़ा माना जाता है।


Jain fasting का आध्यात्मिक उद्देश्य क्या है?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—आखिर इतनी कठिन तपस्या क्यों?

जैन दर्शन में तप को केवल शरीर को भूखा रखने के रूप में नहीं देखा जाता। यह आत्मसंयम और कर्म सिद्धांत से जुड़ी साधना है।

जैन दर्शन में निर्जरा (Nirjara) का अर्थ कर्मों के क्षय से जुड़ा है और तप को इस आध्यात्मिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण साधनों में माना जाता है।

इस दृष्टि से उपवास का लक्ष्य केवल यह नहीं है कि शरीर को भोजन न मिले।

बल्कि साधक का प्रयास होता है कि:

इच्छाओं पर नियंत्रण हो → इंद्रियों पर संयम आए → आसक्ति कम हो → मन भीतर की ओर जाए → आत्मचिंतन बढ़े।

जैन परंपरा में बाह्य तप के साथ आंतरिक तप का भी महत्व है। तपस्या को अहंकार या प्रदर्शन का साधन बनाने के बजाय आत्मशुद्धि की दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसलिए किसी व्यक्ति ने कितने दिन उपवास किया, यह अकेला आध्यात्मिक मूल्यांकन नहीं है।

तप के पीछे की भावना और संयम भी महत्वपूर्ण हैं।

Jain Fasting
Jain Fasting

Jain fasting में Parna कैसे होता है?

लंबी तपस्या के बाद उपवास समाप्त करने की प्रक्रिया को सामान्यतः Parna (पारणा) कहा जाता है।

पारणा केवल “अब खाना शुरू कर दिया” नहीं है।

लंबे तप के बाद भोजन को धार्मिक परंपरा के अनुसार विधिपूर्वक और संयम से ग्रहण किया जाता है।

किस समय पारणा होगा, क्या लिया जाएगा और किस प्रकार लिया जाएगा—यह तप के प्रकार, धार्मिक परंपरा, संकल्प और गुरु/साधु-साध्वी के मार्गदर्शन पर निर्भर कर सकता है।

लंबे उपवास के बाद अचानक बहुत अधिक भोजन करना उचित नहीं माना जाता। विशेष रूप से कई दिनों की तपस्या के बाद पारणा की प्रक्रिया भी तप का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

इसलिए किसी लंबे उपवास को समझते समय केवल शुरुआत और दिनों की संख्या नहीं, बल्कि Parna भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


Jain fasting के प्रमुख प्रकार एक नजर में

तप / साधनासामान्य अर्थ
Biyasanदिन में दो बार भोजन
Ekasanदिन में एक बार, एक बैठक में भोजन
Ayambilएक बार अत्यंत सादा, निर्धारित नियमों वाला भोजन
Upvasभोजन का त्याग
Tivihar Upvasउपवास में निर्धारित समय पर उबला पानी लिया जा सकता है
Chauvihar Upvasउपवास में पानी का भी त्याग
Chhathदो लगातार उपवास
Attham / Telaतीन लगातार उपवास
Atthaiआठ लगातार उपवास
Masakshamanलगभग एक महीने की लगातार उपवास तपस्या

इन परिभाषाओं का आधार जैन शिक्षण सामग्री में दिए गए तप के वर्गीकरण पर है; व्यवहारिक नियम संप्रदाय और व्यक्तिगत संकल्प के अनुसार अलग हो सकते हैं।


Chauvihar, Tivihar और Upvas में अंतर

इसे एक आसान तरीके से याद रखें:

Chauvihar

सूर्यास्त के बाद भोजन + पानी का त्याग।

Tivihar

सूर्यास्त के बाद भोजन का त्याग, पानी की अनुमति निर्धारित नियम के अनुसार।

Upvas

भोजन का त्याग करके किया जाने वाला तप।

Tivihar Upvas

भोजन नहीं, निर्धारित समय में उबला पानी लिया जा सकता है।

Chauvihar Upvas

भोजन और पानी दोनों का त्याग।

यही अंतर Jain fasting को समझने की कुंजी है।


क्या हर जैन व्यक्ति को 3, 8 या 30 दिन का उपवास करना चाहिए?

नहीं।

जैन धर्म में तप व्यक्ति की क्षमता, संकल्प और साधना के अनुसार किया जाता है।

किसी व्यक्ति के लिए Ekasan कठिन हो सकता है, किसी के लिए Ayambil, किसी के लिए एक दिन का Upvas और कोई श्रद्धालु लंबे तप का संकल्प ले सकता है।

इसलिए तप की तुलना करना या दूसरे व्यक्ति को देखकर स्वयं कठिन उपवास शुरू कर देना उचित नहीं है।

विशेषकर कई दिनों तक भोजन या पानी का त्याग शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। मधुमेह, किडनी/हृदय संबंधी बीमारी, गर्भावस्था, कम उम्र, अधिक उम्र या नियमित दवाइयां लेने वाले व्यक्ति को धार्मिक उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

यह लेख धार्मिक परंपरा को समझाने के लिए है, किसी व्यक्ति के लिए चिकित्सकीय fasting plan नहीं।

Jain Fasting
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Jain fasting और सामान्य dieting में क्या अंतर है?

यह भी एक बड़ा भ्रम है।

Jain Upvas का उद्देश्य वजन कम करना नहीं है।

आधुनिक dieting में व्यक्ति कैलोरी कम करने, वजन घटाने या metabolic goals पर ध्यान दे सकता है।

इसके विपरीत जैन तप का मूल संदर्भ संयम, त्याग, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना है।

इसीलिए Jain fasting को केवल “intermittent fasting का धार्मिक version” कहना सही नहीं होगा।

यह एक धार्मिक अनुशासन है जिसकी अपनी शब्दावली, मर्यादाएं और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि है।


Jain fasting को समझने का सबसे आसान तरीका

अगर आप पहली बार जैन उपवास की जानकारी पढ़ रहे हैं, तो इन शब्दों को इस तरह याद रखें:

Biyasan → दो बार भोजन

Ekasan → एक बार भोजन

Ayambil → एक बार अत्यंत सादा भोजन

Upvas → भोजन का त्याग

Tivihar Upvas → भोजन नहीं, निर्धारित समय में उबला पानी

Chauvihar Upvas → भोजन और पानी दोनों का त्याग

Attham/Tela → 3 दिन

Atthai → 8 दिन

Masakshaman → लगभग 1 महीने की लगातार उपवास तपस्या

और सबसे ऊपर:

तप का उद्देश्य केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों पर संयम स्थापित करना है।


निष्कर्ष: Jain fasting केवल भूखे रहने की कहानी नहीं

जैन धर्म की तपस्या परंपरा को बाहर से देखने पर सबसे पहले इसकी कठिनाई दिखाई देती है—एक दिन बिना भोजन, तीन दिन का Attham, आठ दिन का Atthai और फिर Masakshaman जैसी लंबी तपस्या।

लेकिन इसके पीछे का आध्यात्मिक विचार इससे कहीं गहरा है।

भोजन का त्याग बाहरी तप है, जबकि इच्छाओं और आसक्ति पर नियंत्रण उसका आंतरिक पक्ष है।

इसीलिए Jain fasting में केवल यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं है कि “कितने दिन खाना नहीं खाया?”

बल्कि इससे भी बड़ा सवाल है—

“उस तपस्या के दौरान मन कितना संयमित हुआ?”

यही कारण है कि Jain Upvas, Chauvihar, Ayambil, Ekasan, Attham, Atthai और Masakshaman को केवल fasting की अलग-अलग techniques के रूप में नहीं, बल्कि संयम और आत्मशुद्धि की जैन परंपरा के हिस्से के रूप में समझना चाहिए।

महत्वपूर्ण नोट: जैन धर्म की विभिन्न परंपराओं/संप्रदायों में पचक्खाण, पानी लेने के समय, पारणा और कुछ खाद्य नियमों में अंतर हो सकता है। किसी विशेष तप का संकल्प लेने से पहले अपने गुरु, साधु-साध्वी या परिवार की मान्य जैन परंपरा से नियम की पुष्टि करें। लंबे या निर्जल उपवास के लिए चिकित्सकीय सुरक्षा को भी नजरअंदाज न करें।

Jain Fasting से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Jain Fasting क्या है?

Jain Fasting यानी जैन धर्म में किया जाने वाला उपवास और तप। इसमें केवल भोजन छोड़ना ही शामिल नहीं है, बल्कि संयम, इंद्रिय-निग्रह, त्याग और आत्मचिंतन को भी महत्व दिया जाता है। उपवास के अलग-अलग प्रकारों में Upvas, Tivihar, Chauvihar, Ayambil, Ekasan और Biyasan शामिल हैं।

2. Chauvihar Upvas क्या होता है?

Chauvihar Upvas में भोजन के साथ पानी का भी त्याग किया जाता है। सामान्य रूप से सूर्यास्त के बाद अगले सूर्योदय तक भोजन और पानी सहित सेवन का त्याग Chauvihar कहलाता है। अलग-अलग जैन परंपराओं में इसके व्यवहारिक नियमों में अंतर हो सकता है।

3. Tivihar Upvas और Chauvihar Upvas में क्या अंतर है?

Tivihar Upvas में भोजन का त्याग किया जाता है, लेकिन निर्धारित समय और धार्मिक नियम के अनुसार उबला हुआ पानी लिया जा सकता है। Chauvihar Upvas में पानी का भी त्याग किया जाता है। इसलिए दोनों को एक जैसा नहीं माना जाता।

4. Attham या Tela कितने दिन का उपवास है?

Attham या Tela लगातार 3 दिनों की उपवास तपस्या को कहा जाता है। इसमें लगातार तीन दिन Upvas किया जाता है। पानी लिया जाएगा या नहीं, यह तप के प्रकार और लिए गए धार्मिक संकल्प पर निर्भर कर सकता है।

Jain Fasting
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5. Atthai कितने दिन का Jain fasting है?

Atthai लगातार 8 दिनों की उपवास तपस्या है। Paryushan के दौरान Atthai का विशेष उल्लेख मिलता है और कई श्रद्धालु अपनी क्षमता तथा धार्मिक संकल्प के अनुसार इसे करते हैं।

6. Masakshaman क्या है?

Masakshaman जैन तप परंपरा की अत्यंत कठिन साधना है, जिसमें लगभग एक महीने तक लगातार उपवास किया जाता है। यह सामान्य dieting या weight-loss fasting नहीं है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक तपस्या है।

7. क्या Jain Upvas में पानी पी सकते हैं?

यह उपवास के प्रकार पर निर्भर करता है। Tivihar Upvas में निर्धारित नियमों के अनुसार उबला हुआ पानी लिया जा सकता है, जबकि Chauvihar Upvas में पानी का भी त्याग किया जाता है। इसलिए केवल “Jain Upvas” कहने से पानी के नियम का पता नहीं चलता।

8. Ayambil क्या होता है?

Ayambil जैन तप का एक प्रकार है जिसमें भोजन पूरी तरह छोड़ा नहीं जाता। निर्धारित नियमों के अनुसार एक बार अत्यंत सादा भोजन लिया जाता है और स्वाद, मसाले तथा कई खाद्य पदार्थों का त्याग किया जाता है। इसका उद्देश्य भोजन और इंद्रियों पर संयम रखना है।

9. Ekasan और Biyasan में क्या अंतर है?

Ekasan में सामान्य रूप से दिन में एक बार और एक बैठक में भोजन किया जाता है। Biyasan में दिन में दो बार भोजन किया जाता है। दोनों का उद्देश्य भोजन की मात्रा और समय पर संयम स्थापित करना है।

10. Paryushan में उपवास क्यों किया जाता है?

Paryushan आत्मचिंतन, संयम, तप, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान कई श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार Upvas, Ayambil, Ekasan, Attham और अन्य तप करते हैं।

11. Jain fasting का आध्यात्मिक उद्देश्य क्या है?

जैन धर्म में तपस्या का उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं है। इसका संबंध आत्मसंयम, इंद्रियों पर नियंत्रण, आसक्ति कम करने, आत्मचिंतन और कर्मों की निर्जरा की आध्यात्मिक अवधारणा से है।

12. Jain Upvas के बाद Parna क्या होता है?

लंबे उपवास को समाप्त करके निर्धारित विधि और समय के अनुसार आहार ग्रहण करने की प्रक्रिया को Parna यानी पारणा कहा जाता है। पारणा कब और किस प्रकार किया जाए, यह तप, संकल्प और संबंधित जैन परंपरा के नियमों पर निर्भर करता है।

13. क्या हर व्यक्ति 3, 8 या 30 दिन का Jain Upvas कर सकता है?

नहीं। इतने लंबे या निर्जल उपवास बहुत कठिन होते हैं और सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं होते। उम्र, स्वास्थ्य, दवाइयों और शरीर की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। धार्मिक तप का संकल्प अपनी मान्य जैन परंपरा के मार्गदर्शन और आवश्यक होने पर चिकित्सकीय सलाह के साथ लेना चाहिए।

14. क्या Jain Fasting और Intermittent Fasting एक ही हैं?

नहीं। Jain Fasting का मूल उद्देश्य धार्मिक तप, संयम और आध्यात्मिक साधना है, जबकि Intermittent Fasting आधुनिक स्वास्थ्य या lifestyle practice के रूप में किया जाता है। दोनों को एक ही अवधारणा मानना सही नहीं है।

15. Jain fasting में सबसे कठिन तप कौन-सा है?

तप की कठिनाई व्यक्ति, संकल्प और नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। Attham, Atthai और Masakshaman जैसे लंबे उपवास अत्यंत कठिन तप माने जाते हैं। Chauvihar में पानी का भी त्याग होने के कारण यह भी कठोर संयम का रूप है।

 


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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन एक भारतीय उद्यमी, प्रमोशन रणनीतिकार, मार्केटिंग डिस्ट्रीब्यूटर और मीडिया व्यवसाय से जुड़े अनुभवी प्रोफेशनल हैं, जिन्हें शेयर बाजार, रिटेल व्यापार, ज्वेलरी उद्योग, डिजिटल मीडिया और बिज़नेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में धर्मेश जैन Samaydhara.com के CEO और Business Head के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे इस डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रमोशन, ब्रांड विस्तार, कंटेंट ग्रोथ, मार्केटिंग नेटवर्क और बिज़नेस डेवलपमेंट से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का नेतृत्व करते हैं। कॉलेज शिक्षा पूरी करने के बाद धर्मेश जैन ने अपने करियर की शुरुआत गोल्ड और डायमंड ज्वेलरी उद्योग से की, जहां उन्होंने मुंबई सहित भारत के विभिन्न शहरों में कई ज्वेलरी शोरूम के साथ कार्य किया। इसके बाद उन्होंने लगभग तीन वर्ष दुबई में रहकर ज्वेलरी और रिटेल व्यवसाय से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने स्वयं की गोल्ड ज्वेलरी शॉप का संचालन भी किया, जहां उन्होंने रिटेल मैनेजमेंट, कस्टमर रिलेशन और बिज़नेस संचालन का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। मुंबई के एक बड़े मॉल में उन्होंने “Occassions” नाम से एक डिज़ाइनर स्टूडियो की स्थापना की, जो प्रीमियम फैशन और डिज़ाइनर कलेक्शन के लिए जाना गया। बाद में कार्य की अधिकता और आर्थिक कारणों से इस स्टूडियो को बंद करना पड़ा, लेकिन इस अनुभव ने उनके उद्यमी जीवन को और मजबूत बनाया। धर्मेश जैन ने Vigen India नामक एक फिजियोथेरेपी और वेलनेस कंपनी के साथ भी लगभग दो वर्षों तक कार्य किया, जहां उन्होंने प्रमोशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिज़नेस विस्तार के क्षेत्र में अनुभव प्राप्त किया। उन्हें शेयर बाजार में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वे ट्रेडिंग, निवेश योजना, मार्केट व्यवहार और रिस्क मैनेजमेंट की गहरी समझ रखते हैं। वर्तमान में धर्मेश जैन एक उद्यमी, प्रमोटर, मार्केटिंग डिस्ट्रीब्यूटर और बिज़नेस रणनीतिकार के रूप में सक्रिय हैं और मीडिया विस्तार, ब्रांड प्रमोशन, निवेश योजना और नए व्यापारिक अवसरों पर कार्य कर रहे हैं।

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