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नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज,केंद्र ने की ट्रैक्टर रैली रोकने की अपील

कोर्ट सरकार की किसानों के साथ बातचीत के तरीके से खासी निराश है। कोर्ट ने कहा कि आप अगर कानून को होल्ड नहीं करेंगे तो हम कर सकते है...

Supreme court verdict on new farm laws today

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों के विरोध को लेकर किसान आंदोलन(Farmers Protest) का आज 48वां दिन है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) कृषि कानूनों (new farm laws) पर अपना फैसला सुना सकता है।

इससे पहले सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जमकर लताड़ लगाते हुए कहा कि आएं दिन किसान आत्महत्या कर रहे है।

कोर्ट सरकार की किसानों के साथ बातचीत के तरीके से खासी निराश है। कोर्ट ने कहा कि आप अगर कानून को होल्ड नहीं करेंगे तो हम कर सकते है।

इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना एक हलफनामा दाखिल करके 26 जनवरी गणतंत्र दिवस(Republic day) के दिन किसानों की ट्रैक्टर रैली रोकने की अपील की(govt appeals to stop tractor rally of farmers) है।

दरअसल,किसानों ने एलान किया है कि कृषि कानून वापस नहीं लेने के हालात में वे भी 26जनवरी को दिल्ली में बड़ी ट्रैक्टर रैली करेंगे।

इसमें सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि हरियाणा के किसान भी ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की तैयारी में जुटे है। इस रैली के अंतर्गत प्रत्येक गांव से एक ट्रैक्टर रैली में शामिल होगा।

एक और आज सुप्रीम कोर्ट नए कृषि कानूनों के मसले पर फिर से आज सुनवाई करके फैसला कर(Supreme court verdict on new farm laws today) सकता है।

तो वहीं सोमवार को केंद्र सरकार ने भी उच्चतम न्यायालय से 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली अथवा किसी भी तरह के मार्च पर रोक लगाने के आदेश देने का अनुरोध किया।

दिल्ली पुलिस के माध्यम से दायर एक आवेदन में केंद्र ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह अथवा संगठन द्वारा गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली निकालने की योजना बनाई है.

आवेदन में कहा गया, ”इस तरह के मार्च अथवा रैली के कारण गणतंत्र दिवस उत्सव में व्यवधान पैदा हो सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में शीर्ष अदालत से किसी भी तरह के मार्च, रैली अथवा वाहन रैली को रोकने के संबंध में अनुरोध किया जाता है।”

केंद्र ने कोर्ट को बताया कि कृषि कानूनों के मामले में जल्दबाजी नहीं की गई बल्कि यह “दो दशकों के विचार-विमर्श का नतीजा” है।

देश के किसान खुश हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा विकल्पों के साथ एक अतिरिक्त विकल्प दिया गया है… कोई निहित अधिकार नहीं छीना गया है।”

सरकार ने कहा कि उसने किसानों के दिमाग में चल रही किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए किसानों के साथ जुड़ने की पूरी कोशिश की है। हलफनामे में कहा गया, “केंद्र की ओर से प्रयासों में कोई कमी नहीं की गई है।”

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से ट्रैक्टर रैली का मुद्दा उठाए जाने के बाद केंद्र से हलफनामा दायर करने के लिए कहा गया था।

मेहता चाहते हैं कि रैली पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था. बता दें कि शीर्ष न्यायालय किसान के प्रदर्शन और कृषि कानूनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

( एजेंसी के इनपुट के साथ)

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