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पुलिस एफआईआर दर्ज करने से करे इंकार तो क्या करें..?

एफआईआर शब्द भय का प्रतीक बन गया है, वहीं किसी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराना भी बेहद मुश्किल काम होता है.

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पुलिस एफआईआर दर्ज करने से करे इंकार तो क्या करें

आज भी बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो जानकारी के अभाव में एफआईआर का नाम सुनते ही परेशान हो जाते हैंl

एफआईआर शब्द भय का प्रतीक बन गया है, वहीं किसी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराना भी बेहद मुश्किल काम होता हैl

पुलिस वाले जल्दी किसी की भी एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करते हैंl आखिर ये एफआईआर है क्या !

सबसे पहले तो हमें ये जान लेना चाहिए कि किसी भी देश में विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का निर्माण होता है,

ताकी अपराध न होने पाए और अपराध होने की स्थिति में यथाशीघ्र पीड़ित को न्याय और दोषी को सजा मिल जाएl

न्याय और सजा की इस यात्रा की शुरुआत एफआईआर से ही होती है, आइए आज हम विस्तारपूर्वक चर्चा कर रहे हैं एफआईआर यानी फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट कीl

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किसी भी आपराधिक घटना घटने के बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए जो सूचना या रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है, उसे एफआईआर कहते हैंl

इस रिपोर्ट के बाद ही पुलिस आगे की कार्रवाई करती हैl

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अपराध की छानबीन के लिए मजबूर हो जाती है अन्यथा कोर्ट इस पर संज्ञान ले सकता हैl

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एफआईआर के मामले में आपके अधिकार

पुलिस किसी भी घटना के पीड़ित या उनके परिजनों की सूचना के आधार पर एफआईआर दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकतीl

आप अपनी शिकायत लिखित या मौखिक में दर्ज करा सकते हैंl मौखिक एफआईआर लिखने के बाद पुलिसकर्मी आपको पढ़ कर सुनाता हैl

एफआईआर रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने के लिए पुलिस आप पर दबाव नहीं बना सकतीl

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आप अपनी ओर से दी गई सूचना को पूरी तरह से पढ़ने और सुनने के बाद ही हस्ताक्षर करेंl

एफआईआर दर्ज कराते समय अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन करें और कभी भी झूठी रिपोर्ट या तथ्यों का उल्लेख न करेंl

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जीरो एफआईआर

कई बार ऐसा देखने में आता है कि जिस थाना क्षेत्र में घटना हुई है, वहां किसी कारणवश एफआईआर दर्ज नहीं हो पाताl

अगर पुलिस दूसरे थाना क्षेत्र की रिपोर्ट दर्ज भी कर लेती है तो उसके अनुसंधान में रुचि नहीं दिखातीl

ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने जीरो एफआईआर का प्रावधान किया हैl

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इसमें कोई भी व्यक्ति किसी भी अपराध में अविलंब कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज करा सकता हैl

इसे ही जीरो एफआईआर कहते हैंl बाद के दिनों में इसे संबंधित थाने में ट्रांसफर भी कराया जा सकता हैl

कब होता है जीरो एफआईआर का प्रयोग

रेप, एक्सीडेंट और मर्डर जैसे केस अपराध किसी भी जगह पर हो सकता हैl

कई दफे ये किसी खास थाने के क्षेत्र में घटित नहीं होताl ऐसे में बिना एफआईआर तुरंत कार्यवाही होना असंभव हो जाता है,

इसलिए आई विटनेस के आधार पर इसकी शिकायत किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन में हो सकत हैl यही जीरो एफआईआर हैl

जीरो एफआईआर का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि कोई भी पुलिस वाला सिर्फ यह कह कर

आपकी रिपोर्ट लिखने से इंकार नहीं कर सकता कि ये केस हमारे थाना क्षेत्र से बाहर का हैl

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एफआईआर कराने के रास्ते

कोई भी अपराध जो संज्ञेय अपराध हो, उसमें पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकतीl

अगर पुलिस केस दर्ज करने से इंकार करे तो आप कोर्ट की शरण ले सकते हैंl

कोर्ट जाने से बचना चाहते हो तो वरीय पुलिस पदाधिकारियों के यहां भी अपील कर सकते हैl

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