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Sarva Pitru Amavasya 2026 : कल श्राद्ध का आखिरी मौका! जानें दिल्ली, मुंबई सहित देशभर के सही मुहूर्त

Sarva Pitru Amavasya 2026: 10 अक्टूबर को श्राद्ध का सही मुहूर्त, दिल्ली का तर्पण समय, पिंडदान विधि, दान और जरूरी नियम जानें।

Sarva Pitru Amavasya 2026 : कल 10 अक्टूबर को श्राद्ध का सही मुहूर्त, तर्पण विधि और जरूरी बातें

Sarva Pitru Amavasya 2026: पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या इस साल शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या, पितृ विसर्जन अमावस्या और महालया अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में यह दिन दिवंगत पूर्वजों को याद करने, उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने के लिए विशेष महत्व रखता है।

इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध करने की परंपरा है, जिनकी मृत्यु की तिथि परिवार को ज्ञात नहीं है या जिनका निर्धारित तिथि पर श्राद्ध किसी कारणवश नहीं हो पाया। Sarva Pitru Amavasya 2026 मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन धार्मिक कर्मों से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और परिवार के कल्याण की कामना की जाती है।

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Sarva Pitru Amavasya 2026 इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि शनिवार को अमावस्या होने से इसे शनि अमावस्या भी कहा जा रहा है। इसके अगले दिन, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि का आरंभ होगा। ऐसे में पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी आराधना की शुरुआत के बीच यह दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या 2026 की सही तारीख, दिल्ली में श्राद्ध का मुहूर्त, तर्पण की विधि, पिंडदान का महत्व, किन लोगों को इस दिन श्राद्ध करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है? जानिए सही तारीख Sarva Pitru Amavasya 2026

सर्वपितृ अमावस्या 2026 शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। इस दिन परिवार के दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, प्रार्थना और दान करने की परंपरा है।

अमावस्या तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 9:35 बजे होगी और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 9:19 बजे होगा।

Sarva Pitru Amavasya 2026
Sarva Pitru Amavasya 2026

तिथि की गणना और श्राद्ध के लिए दिन का चयन स्थानीय पंचांग तथा सूर्योदय के आधार पर किया जाता है। इसलिए 9 अक्टूबर की रात अमावस्या तिथि शुरू होने के बावजूद सर्वपितृ अमावस्या का मुख्य श्राद्ध कर्म 10 अक्टूबर को किया जाएगा।

Sarva Pitru Amavasya 2026 : मुख्य जानकारी

  • दिन: शनिवार
  • तारीख: 10 अक्टूबर 2026
  • अमावस्या तिथि आरंभ: 9 अक्टूबर, रात लगभग 9:35 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर, रात लगभग 9:19 बजे
  • पर्व: सर्वपितृ अमावस्या, महालया अमावस्या और शनि अमावस्या
  • महत्व: पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान
  • शारदीय नवरात्रि प्रारंभ: रविवार, 11 अक्टूबर 2026

Sarva Pitru Amavasya 2026 : दिल्ली में श्राद्ध का सही मुहूर्त

श्राद्ध कर्म में मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरागत रूप से कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल को श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 10 अक्टूबर 2026 को श्राद्ध के प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

मुहूर्तसमय
कुतुप मुहूर्तसुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक
रौहिण मुहूर्तदोपहर 12:31 से 1:18 बजे तक
अपराह्न कालदोपहर 1:18 से 3:37 बजे तक

इन समयों को नई दिल्ली के स्थानीय पंचांग के अनुसार दिया गया है। अलग-अलग पंचांगों की गणना और स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इसलिए श्राद्ध कर्म शुरू करने से पहले अपने परिवार के पुरोहित या स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।

Sarva Pitru Amavasya 2026 कुतुप मुहूर्त में श्राद्ध क्यों किया जाता है?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में कुतुप मुहूर्त को पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म के लिए विशेष माना गया है। इस समय श्रद्धापूर्वक पूर्वजों का स्मरण, संकल्प और श्राद्ध की निर्धारित विधियां की जाती हैं।

यदि कुतुप मुहूर्त में कर्म करना संभव न हो, तो परंपरा के अनुसार रौहिण मुहूर्त या अपराह्न काल में भी श्राद्ध किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के निर्देशों को प्राथमिकता दें।

सर्वपितृ अमावस्या क्या है और इसे इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

Sarva Pitru Amavasya 2026 सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का समापन दिवस है। पितृ पक्ष की अवधि में परिवार अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य पूर्वजों को याद करते हुए उनके निमित्त धार्मिक कर्म करता है।

सर्वपितृ अमावस्या को विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर किसी कारणवश नहीं किया जा सका।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सभी ज्ञात पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है। इसी वजह से इसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है।

यह दिन केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक संदेश अपने पूर्वजों को याद करना, परिवार की परंपराओं को समझना, जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने जीवन में कृतज्ञता का भाव बनाए रखना भी है।

सर्वपितृ अमावस्या और शनि अमावस्या का संयोग क्यों खास है?

Sarva Pitru Amavasya 2026 10 अक्टूबर 2026 को शनिवार होने के कारण इस दिन शनि अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक परंपराओं में शनिवार को भगवान शनि की पूजा और अमावस्या को पितरों के स्मरण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस दिन कुछ श्रद्धालु पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने के साथ भगवान शनि की पूजा, जरूरतमंदों को दान और सेवा कार्य भी करते हैं।

ध्यान रखें कि शनि अमावस्या और सर्वपितृ अमावस्या का संयोग धार्मिक आस्था का विषय है। किसी विशेष पूजा से हर समस्या समाप्त होने या किसी निश्चित फल की गारंटी देने वाले दावों को निश्चित तथ्य नहीं मानना चाहिए।

Sarva Pitru Amavasya 2026
Sarva Pitru Amavasya 2026

Sarva Pitru Amavasya 2026  पर किन लोगों को श्राद्ध करना चाहिए?

परंपरागत रूप से सर्वपितृ अमावस्या उन लोगों के लिए विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करना चाहते हैं।

1. जिनके पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है

यदि परिवार को किसी दिवंगत सदस्य की मृत्यु की हिंदू चंद्र तिथि मालूम नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या को उनके निमित्त श्राद्ध करने की परंपरा है।

2. जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया

यदि किसी कारणवश पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध उनकी निर्धारित तिथि पर नहीं किया जा सका, तो परिवार सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने के बारे में अपने पुरोहित से सलाह ले सकता है।

3. परिवार के अन्य दिवंगत पूर्वज

इस दिन परिवार के उन पूर्वजों का भी स्मरण किया जाता है, जिनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करनी हो।

4. जो लोग पितरों के निमित्त दान करना चाहते हैं

यदि किसी व्यक्ति के लिए विस्तृत श्राद्ध कर्म करना संभव नहीं है, तो वह अपनी आस्था और क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकता है।

हालांकि विशिष्ट परिस्थितियों में श्राद्ध की विधि परिवार की परंपरा और पुरोहित के निर्देश के अनुसार अलग हो सकती है।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर तर्पण कैसे करें?

Sarva Pitru Amavasya 2026 तर्पण का अर्थ है जल अर्पित करके श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों का स्मरण करना। हिंदू परंपरा में पितृ तर्पण को पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

सामान्य रूप से तर्पण की विधि इस प्रकार हो सकती है:

पहला चरण: स्नान और स्वच्छ वस्त्र

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए शांत और स्वच्छ स्थान चुनें।

दूसरा चरण: संकल्प लें

अपने पूर्वजों का स्मरण करें और श्रद्धापूर्वक उनके निमित्त तर्पण करने का संकल्प लें। संकल्प की विस्तृत विधि परिवार की परंपरा के अनुसार हो सकती है।

तीसरा चरण: जल अर्पित करें

Sarva Pitru Amavasya 2026 एक पात्र में स्वच्छ जल लें। पारंपरिक विधि में काले तिल और कुश का उपयोग भी किया जा सकता है। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पूर्वजों के निमित्त जल अर्पित करें।

चौथा चरण: पितरों का स्मरण करें

अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करें। प्रार्थना करते समय मन में सम्मान, कृतज्ञता और शांति का भाव रखें।

पांचवां चरण: दान-पुण्य करें

तर्पण के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं।

ध्यान दें कि पितृ तर्पण की विस्तृत विधि, मंत्र और दिशा संबंधी नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। यदि आप विधिवत श्राद्ध कर रहे हैं, तो पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करें।

सर्वपितृ अमावस्या पर कौन-सा मंत्र बोलें?

तर्पण या पूर्वजों का स्मरण करते समय सरल प्रार्थना भी की जा सकती है। उदाहरण के लिए:

ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

इस मंत्र का प्रयोग कुछ पारंपरिक पितृ कर्मों में किया जाता है। मंत्र का उच्चारण अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।

यदि आप विधिवत श्राद्ध या पिंडदान कर रहे हैं, तो संबंधित संकल्प और मंत्रों के लिए अपने पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित होगा।

Sarva Pitru Amavasya 2026  पर पिंडदान का क्या महत्व है?

पिंडदान हिंदू श्राद्ध परंपरा का एक महत्वपूर्ण कर्म है। इसमें चावल, जौ के आटे या पारिवारिक परंपरा में निर्धारित सामग्री से पिंड तैयार करके पूर्वजों के निमित्त अर्पित किए जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पिंडदान के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कर्तव्य व्यक्त किया जाता है।

Sarva Pitru Amavasya 2026  पर उन परिवारों के लिए भी पिंडदान का महत्व माना जाता है, जो अपने पूर्वजों का सामूहिक रूप से स्मरण करना चाहते हैं।

पिंडदान की विधि, सामग्री और स्थान का चुनाव परंपरा के अनुसार किया जाता है। यदि आप गया, प्रयागराज, हरिद्वार या किसी अन्य तीर्थस्थल पर पिंडदान करने की योजना बना रहे हैं, तो वहां की स्थानीय धार्मिक व्यवस्था और संबंधित पुरोहित से जानकारी अवश्य लें।

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या दान करना चाहिए?

पितृ पक्ष में दान-पुण्य को महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पर भी लोग अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।

इस दिन आप निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

  • जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना।
  • गरीब परिवारों को अनाज या राशन देना।
  • जरूरतमंदों को कपड़े या दैनिक उपयोग की वस्तुएं देना।
  • वृद्ध या असहाय लोगों की सहायता करना।
  • गौसेवा या अन्य सेवा कार्यों में योगदान देना।
  • किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की शिक्षा में सहायता करना।

दान का उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का भाव होना चाहिए। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही दान करें।

Sarva Pitru Amavasya 2026
सर्व पितृ अमावस्या शुभ मुहूर्त

Sarva Pitru Amavasya 2026  पर कौवे और गाय को भोजन कराने की परंपरा

पितृ पक्ष में कौवे, गाय और अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यता में कौवे को पितरों से प्रतीकात्मक रूप से जोड़कर देखा जाता है।

इस दिन कुछ लोग भोजन का एक हिस्सा कौवे के लिए रखते हैं, गाय को चारा देते हैं या अन्य जीवों को भोजन कराते हैं।

यदि आप ऐसा करते हैं, तो स्वच्छ और सुरक्षित भोजन दें। जानवरों को ऐसा भोजन न खिलाएं जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो।

इन परंपराओं का मुख्य संदेश जीवों के प्रति दया, सेवा और संवेदनशीलता भी है।

Sarva Pitru Amavasya 2026  पर क्या नहीं करना चाहिए?

इस दिन के लिए अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में कुछ नियम बताए जाते हैं। सामान्य रूप से श्रद्धालु निम्नलिखित बातों का ध्यान रखते हैं:

  • श्राद्ध कर्म को जल्दबाजी में करने से बचें।
  • पूजा के दौरान स्वच्छता और शांति बनाए रखें।
  • दान-पुण्य करते समय अहंकार या दिखावे से बचें।
  • परिवार के बुजुर्गों और जरूरतमंदों का अपमान न करें।
  • किसी धार्मिक परंपरा को लेकर दूसरों पर अनावश्यक दबाव न डालें।
  • पूजा या दान के नाम पर अपनी क्षमता से अधिक खर्च न करें।

भोजन, उपवास, बाल कटवाने या अन्य व्यक्तिगत नियमों के बारे में अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इन्हें सभी लोगों पर लागू होने वाला एक जैसा नियम नहीं समझना चाहिए।

क्या सर्वपितृ अमावस्या पर व्रत रखना जरूरी है?

Sarva Pitru Amavasya 2026 पर सभी लोगों के लिए व्रत रखना अनिवार्य है, ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए।

कुछ श्रद्धालु उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग सामान्य भोजन करते हुए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं।

यदि आप व्रत रखना चाहते हैं, तो अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखें। किसी बीमारी, दवा या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जरूरत के कारण भोजन करना आवश्यक हो, तो उपवास को लेकर अनावश्यक दबाव न लें।

इस दिन का प्रमुख उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

पितृ दोष और सर्वपितृ अमावस्या: क्या है धार्मिक मान्यता?

हिंदू ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में पितृ दोष की अवधारणा का उल्लेख मिलता है। कुछ लोग इसे पूर्वजों से जुड़े अधूरे धार्मिक कर्तव्यों या कुंडली में विशेष ग्रह स्थितियों के संदर्भ में देखते हैं।

Sarva Pitru Amavasya 2026  पर कई परिवार पितरों का स्मरण, तर्पण, श्राद्ध और दान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कार्यों से पितरों के प्रति कर्तव्य पूरा करने और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त करने का भाव जुड़ा है।

हालांकि जीवन की हर परेशानी को पितृ दोष से जोड़ना या किसी विशेष पूजा से निश्चित परिणाम मिलने का दावा करना उचित नहीं है। पारिवारिक, आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए व्यावहारिक समाधान भी जरूरी हैं।

सर्वपितृ अमावस्या के बाद शारदीय नवरात्रि कब शुरू होगी?

पितृ पक्ष की समाप्ति के अगले दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि का आरंभ होगा। इस दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की नौ दिवसीय आराधना शुरू की जाएगी।

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात लगभग 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात लगभग 9:30 बजे तक रहेगी।

इसलिए अमावस्या तिथि और नवरात्रि की प्रतिपदा के समय को लेकर भ्रम हो सकता है। तिथि 10 अक्टूबर की रात बदलने के बावजूद नवरात्रि का मुख्य पर्व और घटस्थापना 11 अक्टूबर को होगी।

नवरात्रि की घटस्थापना का सही मुहूर्त जानने के लिए अलग से स्थानीय पंचांग देखें, क्योंकि पूजा का समय स्थान और गणना के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

Sarva Pitru Amavasya 2026 : दिल्ली और अन्य शहरों के लोग क्या ध्यान रखें?

दिल्ली में श्राद्ध का मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर निर्धारित किया जाता है। दूसरे शहरों में कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल के समय में अंतर हो सकता है।

इसलिए यदि आप दिल्ली से बाहर रहते हैं या किसी दूसरे शहर में श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो दिल्ली का समय सीधे लागू न करें।

Sarva Pitru Amavasya 2026 श्राद्ध के लिए अपने शहर का पंचांग देखें। यदि किसी तीर्थस्थल पर कर्म करना है, तो वहां के स्थानीय पुरोहित से समय और विधि की पुष्टि कर लें।

सर्वपितृ अमावस्या 2026: एक नजर में जरूरी बातें

सवालजवाब
सर्वपितृ अमावस्या कब है?शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
अमावस्या तिथि कब शुरू होगी?9 अक्टूबर की रात लगभग 9:35 बजे
अमावस्या तिथि कब समाप्त होगी?10 अक्टूबर की रात लगभग 9:19 बजे
दिल्ली में कुतुप मुहूर्त क्या है?सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक
रौहिण मुहूर्त क्या है?दोपहर 12:31 से 1:18 बजे तक
अपराह्न काल क्या है?दोपहर 1:18 से 3:37 बजे तक
शनि अमावस्या क्यों कहा जा रहा है?क्योंकि अमावस्या शनिवार को पड़ रही है
शारदीय नवरात्रि कब शुरू होगी?रविवार, 11 अक्टूबर 2026
इस दिन क्या किया जाता है?श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, प्रार्थना और दान

Sarva Pitru Amavasya 2026 पितृ पक्ष का अंतिम और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। इस वर्ष यह पर्व शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य कर सकते हैं।

दिल्ली में श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक, रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 से 1:18 बजे तक और अपराह्न काल दोपहर 1:18 से 3:37 बजे तक बताया गया है। अपने स्थान के अनुसार समय की पुष्टि जरूर करें।

इस दिन का संदेश केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है। अपने पूर्वजों को याद करना, परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और आने वाली पीढ़ियों तक पारिवारिक संस्कार पहुंचाना भी इस अवसर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सर्वपितृ अमावस्या के अगले दिन, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू होगी। इस तरह पितरों के स्मरण के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा और मां दुर्गा की आराधना का नौ दिवसीय पर्व आरंभ होगा।

श्रद्धा, सेवा और कृतज्ञता के भाव से इस दिन को मनाएं तथा तिथि और मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।


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  • दिल्ली के श्राद्ध मुहूर्त और तिथि:










  • 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या और 11 अक्टूबर से नवरात्रि:







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Reena Arya

रीना आर्य www.samaydhara.com की फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ है। रीना आर्य ने पत्रकारिता के महज 6-7 साल के भीतर ही अपने काम के दम पर न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपनी पहचान बनाई बल्कि तमाम चुनौतियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए समयधारा.कॉम की नींंव रखी। हर मुद्दे पर अपनी ज्वलंत और बेबाक राय रखने वाली रीना आर्य एक पत्रकार, कंटेंट राइटर,एंकर और एडिटर की भूमिका निभा चुकी है।

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