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SC ने RBI,केंद्र से मांगा जवाब-लॉकडाउन में लोन अवधि पर छूट ब्याज के साथ क्यों?

लोन अदायगी की अवधि पर छूट दी है लेकिन इस दौरान मिली छूट पर भी बैंक ब्याज दर आपसे वसूलेगा..

नईदिल्ली:Loan moratorium with loan interest during lockdown plea-केंद्र और आरबीआई ने लॉकडाउन (Lockdown) में लोन अदायगी की अवधि पर छूट दी है लेकिन इस दौरान मिली छूट पर भी बैंक ब्याज दर आपसे वसूलेगा।

केंद्र और आरबीआई (RBI) के इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई। जिस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते केंद्र (Center)और भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से जवाब तलब किया है।

Loan moratorium with loan interest during lockdown plea

गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण लोन भुगतान की अवधि में छूट (Loan Moratorium Period)के ब्याज पर लेवी की मांग को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और आरबीआई(RBI)को नोटिस भेजकर जवाब तलब (SC seeks response to RBI-Center) किया।

ध्यान दें कि लॉकडाउन4.0 (Lockdown4.0) में COVID-19 के कारण लोन भुगतान अवधि के समय में छूट (Loan Moratorium Period) को बढ़ाकर अब 31 अगस्त तक कर दिया गया है।

मंगलावर को जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के द्वारा इस मामले की सुनवाई की

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और केंद्र व RBI को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया। उन्हें एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में पहली बार ऋण भुगतान की अवधि में 3 महीने की छूट दी जोकि 31 मई तक के लिए थी।

फिर लॉकडाउन4 में इस अवधि को अगले तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि बैंकों से कर्ज लेने वालों को इस प्रकार से दंडित नहीं करना चाहिए

और इस अवधि के लिए बैंकों को कर्ज की रकम (Loan EMI) पर ब्याज (interest) नहीं जोड़ना चाहिए।

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बेंच ने अपने आदेश में कहा, ‘रिजर्व बैंक के वकील ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया जो उन्हें दिया गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी इस बीच जरूरी निर्देश मिलेंगे।’

यह केस अब अगले सप्ताह सुनवाई के लिए लिस्ट में डाला गया है।

गौरतलब है कि कोरोनावायरस के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर डालने से रोकने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक (Reserve Bank) ने 27 मार्च को कई निर्देश जारी किए थे।

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RBI ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को 1 मार्च की स्थिति के अनुसार कर्जदारों पर बकाया राशि के भुगतान के लिए तीन महीने की ढील देने की छूट दी थी।

रिजर्व बैंक ने कहा था कि ऐसे लोन (Loan) की वापसी के कार्यक्रम को इस अवधि के बाद तीन महीने आगे बढ़ाया जाएगा लेकिन ऋण अदायगी से छूट की अवधि में बकाया राशि पर ब्याज (loan interest) पहले जैसा ही लगता रहेगा।

इस याचिका आगरा के गजेंद्र शर्मा ने दायर की है और इसमें रिजर्व बैंक की 27 मार्च की अधिसूचना के उस हिस्से को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया गया था

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जिसमें ऋण स्थगन की अवधि के दौरान कर्ज की राशि पर ब्याज वसूली का प्रावधान है।

याचिका के अनुसार, इस प्रावधान से कर्जदार के रूप में याचिकाकर्ता के लिए परेशानी पैदा होती है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल को रिजर्व बैंक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि उसके सर्कुलर में कर्ज भुगतान के संबंध में एक मार्च से 31 मई की अवधि के दौरान 3 महीने की ढील की व्यवस्था पर पूरी ईमानदारी से अमल किया (SC seeks response to RBI-Center)जाए।

 

 

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(इनपुट एजेंसी से भी)

 

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