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Gyanvapi Masjid case: SC ने केस वाराणसी जिला जज को ट्रांसफर किया,17 मई का अंतरिम आदेश जारी

इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट जुलाई के दूसरे हफ्ते पर सुनवाई करेगा।जिला कोर्ट में पहले मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सुनवाई होगी कि यह मामला 1991 के एक्ट का उल्लंघन तो नहीं।

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नई दिल्ली:ज्ञानवापी मस्जिद केस(Gyanvapi-Masjid case)पर आज सुप्रीम कोर्ट(supreme-court)ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि अब ज्ञानवापी केस पर सुनवाई जिला जज करेंगे।

इसलिए ज्ञानवापी केस वारणसी की जिला अदालत को ट्रांसफर किया जाता(supreme-court-transfer-case-to-varanasi-district-court)है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट का 17 मई का अंतरिम आदेश जारी रहेगा,जिसके तहत शिवलिंग के दावे वाली जगह को सुरक्षित रखा जाएं और और अलग स्थान पर वजू करने,मुसलमानों को नमाज पढ़ने से न रोका जाएं। 

यह आदेश 8 सप्ताह यानी 17 जुलाई तक लागू रहेगा।उसके बाद ही इस मामले की शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी।

शीर्ष अदलत ने कहा कि जिला जज काफी अनुभवी है और अब इस केस को वाराणसी जिला अदालत को ट्रांसफर किया जाता (Gyanvapi-Masjid case-supreme-court-transfer-case-to-varanasi-district-court)है। 

सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी सर्वे रिपोर्ट(Gyanvapi Survey)के लीक होने पर कहा कि चुनिंदा लीक बंद होनी(selective leaks must stop)चाहिए। प्रेस में बातें लीक हो रही है,जबकि इसे कोर्ट में जमा होना था।

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हमें जमीन पर संतुलन और शांति की भावना की जरूरत है।एक हद तक हीलिंग टच की जरूरत है।

हम देश में संतुलन की भावना को बनाए रखने के लिए एक संयुक्त मिशन पर हैं। दरअसल, वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर(Gyanvapi Mosque)की वीडियो सर्वे रिपोर्ट पेश की गई थी और कुछ ही घंटे यह रिपोर्ट कथित तौर पर सार्वजनिक भी हो गई।

इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जजों ने यह भी कहा कि यह हमारा सुविचारित मत है कि यह केस किसी उच्चतर न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा ये केस सुना जाना(Gyanvapi-Masjid case-supreme-court-transfer-case-to-varanasi-district-court)चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये जटिल सामाजिक समस्याएं हैं। इसमें मनुष्य द्वारा किया गया कोई भी समाधान सटीक नहीं हो सकता। हमारा आदेश इस बात पर था कि शांति व्यवस्था बनी रहे। यह काम अंतरिम आदेश से हो सकता है। हम देश की एकता के लिए एक संयुक्त मिशन पर हैं।

इसके अलावा रिपोर्ट लीक होने के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार यहां रिपोर्ट आ जाए तो फिर वह सेलेक्टिव तौर पर लीक नहीं हो सकती। इसके साथ ही बेंच ने हिदायत दी कि रिपोर्ट लीक नहीं होनी चाहिए। इसे सिर्फ जज ही खोल सकते हैं।

इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट जुलाई के दूसरे हफ्ते पर सुनवाई करेगा।जिला कोर्ट में पहले मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सुनवाई होगी कि यह मामला 1991 के एक्ट का उल्लंघन तो नहीं।

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प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट के दायरे में नहीं यह मामला-हिंदू पक्ष बोला

हिंदू पक्ष ने कहा कि यह मामला 100 साल से पुराना है और यह 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट के दायरे में नहीं आता है। ऐसे में इस केस की सुनवाई और सर्वे के लिए कोर्ट कमिशन के गठन पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

 

 

 

 आखिर लीक कैसे हो गई सर्वे रिपोर्ट-मुस्लिम पक्ष ने उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि आखिर सर्वे रिपोर्ट लीक कैसे हो गई।

इसके अलावा मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने सर्वे के लिए कोर्ट कमिशन के गठन को भी असंवैधानिक करार दिया। इसके अलावा उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का सुझाव दिया।

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिला जज के फैसले पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है, उनका 25 साल का लंबा अनुभव है और उन्हें सुनवाई करने देना चाहिए।

बेंच ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि शांति, सौहार्द और भाईचारा बना रहे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिला जज अनुभवी न्यायिक अधिकारी होते हैं, हम उन्हें आदेश जारी नहीं कर सकते।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब 6 जुलाई को सुनवाई

इस बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी शुक्रवार को ही सुनवाई होनी थी, लेकिन यह टाल दी गई। वाराणसी के अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सुनवाई की अगली तारीख छह जुलाई तय की।

इस केस में मूल वाद वर्ष 1991 में वाराणसी की जिला अदालत में दायर किया गया था, जिसमें वाराणसी में जहां ज्ञानवापी मस्जिद मौजूद है, वहां प्राचीन मंदिर बहाल करने की मांग की गई थी।

वाराणसी की अदालत ने आठ अप्रैल, 2021 को पांच सदस्यीय समिति गठित कर सदियों पुरानी ज्ञानवापी मस्जिद का समग्र भौतिक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था।


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