
Gulzar Singh Case पंजाब में गुलजार सिंह मामले पर NCSC का बड़ा एक्शन, किशोर मकवाना ने परिवार से की मुलाकात; सरकार-पुलिस प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
Gulzar Singh Case Sangrur News: पंजाब के संगरूर जिले के तूरबंजारा गांव के गुलजार सिंह की मौत का मामला अब राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के सामने पहुंच चुका है।
Gulzar Singh Case नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले गुलजार सिंह की मौत और उससे पहले सामने आए आरोपों को लेकर आयोग ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। आयोग के चेयरमैन किशोर मकवाना (कौन है Kishore Makwana) ने संगरूर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की जमीनी स्थिति समझने की कोशिश की।
तारीख को लेकर एक जरूरी स्पष्टता: उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में NCSC ने 8 सितंबर को घोषणा की थी कि चेयरमैन किशोर मकवाना 10 सितंबर 2026 को संगरूर का दौरा करेंगे। इसलिए नीचे की रिपोर्ट को 10 सितंबर के दौरे/मुलाकात और आपके उपलब्ध प्रत्यक्ष विवरण के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक NCSC/PIB रिकॉर्ड में इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव और DGP से पांच दिनों में रिपोर्ट मांगे जाने की पुष्टि है। (Press Information Bureau)
Gulzar Singh Case : आखिर पूरा विवाद क्या है?
संगरूर के दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के गांव तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह ने कथित तौर पर इलाके में नशे की समस्या को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की जनसभा में सवाल उठाया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, गुलजार सिंह ने इलाके में नशे की बिक्री और अपने परिवार पर पड़ रहे उसके असर का मुद्दा उठाया था।
इसके बाद परिवार की ओर से पुलिस और स्थानीय स्तर पर दबाव तथा माफी मांगने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए गए। गुलजार सिंह ने जहरीला पदार्थ निगला और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके निधन से पहले का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें उन्होंने कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है। (Press Information Bureau)
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब अंतिम संस्कार के दौरान भी गांव में तनाव की स्थिति पैदा हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर विरोध किया और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति संभाली गई।

Petrol Diesel Price में आएगा उछाल या राहत? Crude Oil $100 पार! जेब पर पड़ेगा कितना असर?
Gulzar Singh Case NCSC ने क्यों लिया मामले का संज्ञान?
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को इस मामले में शिकायत मिलने के बाद आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत कार्रवाई शुरू की।
आयोग ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और DGP को नोटिस भेजकर मामले के तथ्य तथा अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट देने के लिए पांच दिनों की समयसीमा तय की गई है। (Press Information Bureau)
यह शिकायत भाजपा SC मोर्चा पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक शीतल अंगुराल की ओर से की गई थी। NCSC चेयरमैन किशोर मकवाना ने इसे गंभीर और संवेदनशील मामला बताते हुए निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया था। (Press Information Bureau)
NCSC की अब तक की कार्रवाई
| कार्रवाई | स्थिति |
|---|---|
| शिकायत प्राप्त | हां |
| NCSC ने संज्ञान लिया | हां |
| पंजाब सरकार को नोटिस | जारी |
| मुख्य सचिव से रिपोर्ट | मांगी गई |
| DGP पंजाब से रिपोर्ट | मांगी गई |
| रिपोर्ट की समयसीमा | 5 दिन |
| चेयरमैन का संगरूर दौरा | 10 सितंबर 2026 |
| पीड़ित परिवार से मुलाकात | दौरे का प्रमुख हिस्सा |
| मामले की जमीनी जांच | आयोग के दौरे का उद्देश्य |
Gulzar Singh Case संगरूर पहुंचे किशोर मकवाना, परिवार से मुलाकात के बाद क्या कहा?
किशोर मकवाना के संगरूर दौरे को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आयोग ने केवल दिल्ली में बैठकर रिपोर्ट मांगने के बजाय मामले की जमीनी स्थिति समझने के लिए स्वयं दौरा करने का फैसला किया।
दौरे की घोषित योजना के मुताबिक चेयरमैन पहले संगरूर पहुंचकर गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात करने वाले थे और इसके बाद पंजाब पुलिस तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी लेने की बात कही गई थी। (punjabkesari)
आपके उपलब्ध प्रत्यक्ष विवरण के अनुसार, परिवार से मुलाकात और पत्रकारों से बातचीत के दौरान मकवाना ने मामले को केवल एक परिवार की त्रासदी मानने के बजाय अनुसूचित जाति समाज की सुरक्षा और भय के माहौल से जोड़कर गंभीर चिंता व्यक्त की।
“यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं” — NCSC चेयरमैन का बड़ा संदेश
Gulzar Singh Case परिवार से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में किशोर मकवाना ने कथित तौर पर कहा कि यह केवल गुलजार सिंह के परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पंजाब में अनुसूचित जाति समाज के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने पुलिस-प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि किसी व्यक्ति को नशे के खिलाफ आवाज उठाने के कारण धमकियों या दबाव का सामना करना पड़ा है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परिवार और शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। किसी मंत्री, पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय करना जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है।

गुलजार सिंह नशे के खिलाफ क्यों उठा रहे थे आवाज?
मीडिया रिपोर्टों में सामने आई जानकारी के अनुसार गुलजार सिंह अपने बेटे की कथित नशे की लत को लेकर परेशान थे। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि उन्होंने इलाके में कथित तौर पर खुलेआम नशे की बिक्री का मुद्दा उठाया था।
यही व्यक्तिगत पीड़ा कथित तौर पर उन्हें सार्वजनिक रूप से नशे के खिलाफ सवाल उठाने के लिए प्रेरित कर रही थी।
यह पहलू मामले को और संवेदनशील बनाता है, क्योंकि यहां नशे का मुद्दा सिर्फ कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह जाता, बल्कि एक परिवार की सामाजिक और आर्थिक त्रासदी से जुड़ जाता है।
जनसभा से शुरू हुआ विवाद, फिर क्या हुआ?
Gulzar Singh Case उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 6 सितंबर को दिड़बा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गुलजार सिंह ने नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने की कोशिश की थी।
रिपोर्टों में परिजनों की ओर से आरोप है कि उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने नहीं दी गई और बाद में पुलिस/स्थानीय स्तर पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया। इसके बाद उन्होंने जहरीला पदार्थ निगल लिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही और मौत के लिए कौन-से कारण जिम्मेदार थे, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।
मौत से पहले वायरल वीडियो ने बढ़ाई गंभीरता
NCSC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गुलजार सिंह की मौत से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने एक मंत्री और ग्राम पंचायत के कुछ सदस्यों के संबंध में गंभीर आरोप लगाए थे। आयोग ने इन्हीं आरोपों को गंभीर और संवेदनशील बताते हुए स्वतंत्र तथा उच्चस्तरीय जांच की जरूरत बताई। (Press Information Bureau)
यही वीडियो NCSC की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण बिंदु बना।
NCSC के सामने प्रमुख सवाल
| सवाल | जांच में महत्व |
|---|---|
| गुलजार सिंह ने नशे को लेकर क्या शिकायत की थी? | मूल विवाद |
| जनसभा में वास्तव में क्या हुआ? | घटनाक्रम की कड़ी |
| क्या उन्हें बाहर निकाला गया? | आरोपों की पुष्टि जरूरी |
| क्या बाद में माफी का दबाव था? | परिवार के आरोपों की जांच |
| पुलिस की भूमिका क्या रही? | प्रशासनिक जवाबदेही |
| वायरल वीडियो की सत्यता क्या है? | महत्वपूर्ण साक्ष्य |
| पंचायत के लोगों की भूमिका क्या थी? | जांच का हिस्सा |
| मौत से पहले और बाद में क्या हुआ? | घटनाक्रम की पूरी जांच |
अंतिम संस्कार को लेकर भी उठा विवाद
गुलजार सिंह की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार भी विवादों में आ गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव पैदा हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कराया जा रहा था और परिवार को अंतिम दर्शन तक पर्याप्त रूप से नहीं करने दिए गए। विरोध के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि प्रशासन और परिवार के बीच बातचीत के बाद मुआवजा तथा सरकारी नौकरी को लेकर आश्वासन दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
अब परिवार की ओर से अंतिम संस्कार के तरीके को लेकर लगाए गए आरोप भी NCSC की जांच के दायरे में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
परिवार की सुरक्षा का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?
किशोर मकवाना ने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। आपके उपलब्ध विवरण के अनुसार, परिवार ने लगातार डर और धमकी की शिकायत करते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग की है।
यदि किसी पीड़ित परिवार को घटना के बाद भी भय में रहना पड़ रहा है तो यह प्रशासन के लिए अलग से गंभीर जिम्मेदारी बन जाती है।
इसलिए मामले में केवल मौत की जांच ही नहीं, बल्कि—
- परिवार की सुरक्षा
- गवाहों की सुरक्षा
- शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा
- उपलब्ध वीडियो/डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा
- पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता
जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।
विदेश भागे आरोपी को लेकर NCSC का रुख
आपके दिए विवरण के अनुसार, NCSC चेयरमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में यदि कोई आरोपी विदेश भागा है तो उसे कानून के दायरे में लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कराने की दिशा में कार्रवाई होनी चाहिए।
यह बात जांच के आगे बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि किसी आरोपी के विदेश में होने की स्थिति में सामान्य पुलिस जांच के अलावा अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
हालांकि किसी व्यक्ति को आरोपी मानकर अंतिम दोषी ठहराना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन पर बढ़ा दबाव
NCSC के नोटिस के बाद पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन के सामने अब मामले में विस्तृत जवाब देने की जिम्मेदारी है।
आयोग ने पहले ही पांच दिनों में रिपोर्ट मांगी है। (Press Information Bureau)
इस रिपोर्ट में केवल घटना का विवरण ही नहीं, बल्कि शिकायतों पर हुई कार्रवाई और आरोपों की जांच की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
सरकार से मांगी गई जानकारी का संभावित दायरा
| मुद्दा | प्रशासन को क्या स्पष्ट करना होगा |
|---|---|
| मौत की जांच | FIR/जांच की स्थिति |
| वायरल वीडियो | वीडियो की जांच |
| आरोपित व्यक्तियों की भूमिका | जांच की प्रगति |
| पुलिस कार्रवाई | कब और क्या कार्रवाई हुई |
| परिवार की सुरक्षा | सुरक्षा व्यवस्था |
| अंतिम संस्कार | घटनाक्रम की जानकारी |
| संभावित आरोपी | गिरफ्तारी/कानूनी कार्रवाई |
| आगे की कार्रवाई | समयबद्ध जांच |
पंजाब में नशे का मुद्दा फिर केंद्र में
Gulzar Singh Case गुलजार सिंह की मौत ने पंजाब में नशे के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
यह मामला इसलिए भी अलग है क्योंकि यहां एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी, नशे की समस्या, राजनीतिक कार्यक्रम, स्थानीय प्रशासन और अनुसूचित जाति अधिकार—सभी मुद्दे एक साथ जुड़े दिखाई दे रहे हैं।
NCSC का हस्तक्षेप इस मामले को संवैधानिक अधिकारों के नजरिए से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
क्या NCSC की जांच से पंजाब सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा?
Gulzar Singh Case निश्चित तौर पर आयोग द्वारा आधिकारिक रिपोर्ट मांगे जाने से मामले में संस्थागत निगरानी बढ़ी है।
लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि जांच का अंतिम परिणाम क्या होगा।
NCSC की भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा तथ्यों को सामने लाना, अनुसूचित जाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और संबंधित सरकार/प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पंजाब सरकार की रिपोर्ट में क्या जानकारी सामने आती है और आयोग उस पर क्या कार्रवाई करता है।
किशोर मकवाना के दौरे का महत्व
किशोर मकवाना का संगरूर दौरा कई कारणों से महत्वपूर्ण है।
पहला — परिवार की सीधी सुनवाई
आयोग ने परिवार से सीधे बात कर उनके आरोप और शिकायतें समझने की कोशिश की।
दूसरा — प्रशासन से जवाब
सिर्फ परिवार का पक्ष ही नहीं, बल्कि पुलिस और जिला प्रशासन से भी जानकारी ली जानी है।
तीसरा — मौके की स्थिति
घटना से जुड़े स्थानीय लोगों और परिस्थितियों को समझना जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
चौथा — SC अधिकारों का सवाल
अगर जांच में यह साबित होता है कि अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े व्यक्ति के साथ जातिगत भेदभाव, धमकी या उत्पीड़न हुआ, तो मामला और गंभीर कानूनी रूप ले सकता है।
मामले में आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजर NCSC की अगली कार्रवाई और पंजाब सरकार की रिपोर्ट पर है।
संभावित रूप से आगे इन बिंदुओं पर ध्यान रहेगा—
- पंजाब सरकार की रिपोर्ट।
- पुलिस जांच की प्रगति।
- वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच।
- परिवार की सुरक्षा।
- आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई।
- यदि कोई आरोपी विदेश में है तो कानूनी प्रक्रिया।
- NCSC की आगे की सुनवाई या सिफारिशें।
- परिवार को मिलने वाली सहायता।
Timeline: गुलजार सिंह मामले में अब तक क्या हुआ?
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 6 सितंबर 2026 | दिड़बा क्षेत्र में मंत्री की जनसभा और नशे को लेकर सवाल उठाने का मामला |
| 7 सितंबर | गुलजार सिंह की हालत बिगड़ी/इलाज का घटनाक्रम |
| 8 सितंबर | NCSC ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया |
| 8 सितंबर | अंतिम संस्कार के दौरान तनाव की खबरें |
| 9 सितंबर | NCSC चेयरमैन के दौरे को लेकर तैयारियां और राजनीतिक प्रतिक्रिया |
| 10 सितंबर | किशोर मकवाना का संगरूर दौरा/परिवार से मुलाकात |
NCSC के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, आयोग ने 8 सितंबर को नोटिस जारी किया और 10 सितंबर को चेयरमैन के संगरूर दौरे की घोषणा की थी। (Press Information Bureau)
NCSC चेयरमैन किशोर मकवाना कौन हैं?
किशोर मकवाना वर्तमान में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के चेयरपर्सन हैं। NCSC की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 1 मई 1965 को गुजरात के ढोलका में हुआ और उनकी शैक्षणिक योग्यता Psychology में M.A. है। (National Commission For Scheduled Castes)
गुलजार सिंह मामले में उनका हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि NCSC अनुसूचित जाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और हितों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करने वाला राष्ट्रीय संवैधानिक निकाय है।
अब सबसे बड़ा सवाल: गुलजार सिंह को न्याय कब मिलेगा?
इस पूरे मामले का सबसे अहम प्रश्न यही है।
गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियों, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस-प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अगर आरोप गलत हैं तो जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए। और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
यही कारण है कि NCSC का हस्तक्षेप इस मामले में महत्वपूर्ण बन गया है।
Gulzar Singh Case संगरूर से उठी आवाज अब दिल्ली तक पहुंची
गुलजार सिंह की मौत का मामला अब केवल तूरबंजारा या संगरूर तक सीमित नहीं रहा है। NCSC Chairman Kishor Makwana के संगरूर दौरे के बाद इस मामले में राष्ट्रीय स्तर की संस्थागत निगरानी शुरू हो गई है।
एक तरफ परिवार नशे और कथित दबाव की कहानी बता रहा है, दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं NCSC ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत पंजाब सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है। (Press Information Bureau)
अब असली परीक्षा जांच की निष्पक्षता, परिवार की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने की है।
गुलजार सिंह के परिवार को न्याय तभी मिलेगा जब आरोपों और दावों की राजनीतिक बयानबाजी से अलग, सभी उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो और जो भी व्यक्ति कानूनन जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई हो।
FAQ: Gulzar Singh Case & Kishor Makwana Visit
1. गुलजार सिंह कौन थे?
गुलजार सिंह संगरूर जिले के तूरबंजारा गांव के निवासी थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इलाके में नशे की समस्या को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे।
2. गुलजार सिंह की मौत कैसे हुई?
रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने जहरीला पदार्थ निगला था और इलाज के दौरान उनकी मौत हुई। मौत की परिस्थितियों और उससे जुड़े आरोपों की जांच जारी है।
3. NCSC ने इस मामले में क्या किया?
NCSC ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर मुख्य सचिव और DGP से पांच दिनों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। (Press Information Bureau)
4. किशोर मकवाना संगरूर क्यों पहुंचे?
NCSC के आधिकारिक बयान के अनुसार चेयरमैन किशोर मकवाना मामले की जमीनी स्थिति देखने, आरोपों की सत्यता की जांच करने और पीड़ित परिवार से मिलने के लिए संगरूर पहुंचे/दौरे पर हैं। (Press Information Bureau)
5. क्या NCSC ने पंजाब सरकार को रिपोर्ट देने का आदेश दिया है?
हां। आयोग ने मुख्य सचिव और DGP पंजाब को पांच दिनों के भीतर मामले के तथ्य और आरोपों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा है। (Press Information Bureau)
6. क्या गुलजार सिंह ने मंत्री पर आरोप लगाए थे?
NCSC के आधिकारिक बयान के अनुसार, मौत से पहले सामने आए वीडियो में एक मंत्री और पंचायत के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की सत्यता जांच का विषय है। (Press Information Bureau)
7. क्या अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद हुआ था?
हां। मीडिया रिपोर्टों में अंतिम संस्कार के दौरान तनाव और ग्रामीणों के विरोध की बात सामने आई है।
8. अब आगे क्या होगा?
अब पंजाब सरकार की रिपोर्ट, पुलिस जांच, परिवार की सुरक्षा और NCSC की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
आपको यह खबर कैसी लगी?
अगर आपको यह जानकारी पसंद आई है, तो इसे अपने WhatsApp दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।
ऐसी ही और ताज़ा खबरों के लिए 'समयधारा' (Samaydhara) से जुड़े रहें।







