using-smartphone-late-night harm-your-health cause-symptoms ADHD
नई दिल्ली : इस समय पूरे भारत में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन जारी है l लोग घरों में बंद है l
अपना ज्यादातर वक्त लगभग सभी का मोबाइल पर ही बीत रहा है l
ऐसे में कई लोग रात-रात भर मोबाइल पर बैठे रहते है l
दिन-रात ज्यादातर लोगों का वक्त स्मार्टफोन पर ही कट रहा है l
ऐसे में सोने से पहले रात में स्मार्टफोन पर समय बिताना आज कल एक आम बात हो गई है
लेकिन क्या आपको पता है कि ये आम बात आपके लिए कितनी खतरनाक हो सकती है
और इसके परिणाम आपको बर्बाद भी कर सकते है। जानना चाहते है कैसे? चलिए बताते है।
रात में देर तक फोन पर चिपके रहने से आपके दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है
और आप अटेंशन डेफिसिट हाईपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) के शिकार हो सकते है।
दरअसल, जामा नाम की एक मैग्ज़ीन ने हाल ही में एक रिसर्च को प्रकाशित किया है
और इसके तहत खुलासा किया गया है कि जो लोग रात में देर तक मोबाइल चलाते है
उनमें एडीएचडी के लक्षण तकरीबन 10 फीसदी ज्यादा होने का खतरा रहता है।
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इस रिसर्च के अनुसार, आज का युवा, टीनेजर सोशल या डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल ज्यादा करता है
और गर्ल्स की तुलना में बॉयज में ये खतरा ज्यादा दिखता है।
इससे इनमें एडीएचडी के लक्षण 10 फीसदी ज्यादा पनपने लगते है।
खासकर जिन लोगों की केस हिस्ट्री पहले से ही डिप्रेशन की रही हो उनमें ये लक्षण और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकते है।
एडीएचडी के लक्षण क्या है।
एडीएचडी के लक्षणों में चीजों को याद रखने में परेशानी होना, आसानी से बैचेन हो जाना, व्यवस्थित होने में कठिनाई होना है।
लोगों को शांत होकर बैठने में परेशानी पैदा होने लगती है।
ऑल ऑफ सडन यानि अचानक से लोग कुछ भी कर बैठते है वो भी बिना परिणाम सोचे बिना।
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देर तक मोबाइल चलाने और डिजिटल प्लेफॉर्म्स पर ज्यादा समय बिताने से एडीएचडी के लक्षणों का खतरा बढ़ जाता है।
इसके कारण टीनेजर्स में स्कूल परफॉर्मेंस खराब और नेगेटिव इफेक्ट समेत कई तरह के जोखिम भरे प्रभाव पड़ सकते है।
जो लोग मोबाइल पर लेट नाइट तक चिपके रहते है उनमें नशाखोरी,
डेंजर एक्टिविटीज में दिलचस्पी और लीगल परेशानियों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
आप देर तक मोबाइल पर रहते है तो एडीएचडी के शिकार हो सकते है,बचें इससे
इस संबंध में डॉ. के.के. अग्रवाल (हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष) ने कहा है कि
स्मार्टफोन पर लोग देर रात तक फेसबुक,ट्विटर,इंटरनेट और कई अन्य तरह के एप्स को चलाने के एडिक्ट हो जाते है।
ऐसा होना आजकल आम बात हो गई है लेकिन इसके बेहद जोखिम भरे परिणाम देखने को मिल सकते है
जैसे- आपकी नींद पूरी न होना या अनिद्रा और नींद टूट जाने सरीखी समस्याएं।
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मेडिकल साइंस को एक नया स्पेक्ट्रम दिखा है जोकि लोगों के सोने से पहले स्मार्टफोन पर तकरीबन 30-60 मिनट बिताने के कारण नोटिस में आया है।
इसी तरह चलता रहा तो आज से 10 साल में ये आम सी दिखने वाली समस्या महामारी का रूप ले लेगी
और लोगों में रिंगजाइटी, ब्लैकबेरी थम्ब, नोमोफोबिया और सेलफोन एल्बो नामक बीमारियां दिखने लगेंगी।
इनमें से कुछ बीमारियां ब्लैकबेरी थम्ब, सेलफोन एल्बो, नोमोफोबिया और रिंगजाइटी नाम से जानी जाती हैं।
डॉ. अग्रवाल इन लक्षणों के गंभीर परिणाम बताते हुए कहते है कि गैजेट्स के कारण आपके माइंड के ग्रे मैटर के घनत्व में कमी आने लगती है।
आज के समय में अगर स्वस्थ रहना है तो टेक्नोलॉजी का हल्का-फुल्का इस्तेमाल करना चाहिए और पूरी तरह संयम बरतना चाहिए।
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कैसे बचें
- डॉ. अग्रवाल ने इसके लिए कुछ सुझाव दिए है उन्होंने कहा है कि इलेक्ट्रिक कर्फ्यू लगाए यानि सोने से 30 मिनट पहले आप किसी भी तरह के इलेक्ट्रिक डिवाइस या गैजेट का इस्तेमाल न करें।
2. सोशल मीडिया का इस्तेमाल हफ्ते में एक दिन न करें।
3. अपने स्मार्टफोन का प्रयोग केवल कॉल करने के लिए करें।
4. कंप्यूटर पर आप दिन नें तीन घंटे से ज्यादा समय तक न रहे।
5. अपने स्मार्टफोन पर टॉकटाइम को दो घंटे से ज्यादा समय तक सीमित करें।
6. अपने स्मार्टफोन की बैटरी एक से ज्यादा बार रिचार्ज न करें।
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