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बिहार के मंत्री ने पीएम मोदी की तस्वीर पर मारे जूते, ‘डकैत’ और ‘नक्सली’ कहा, बढ़ा विवाद तो मांगी माफी

पटना, 2 मार्च:  बिहार के मद्य निषेध और उत्पाद मंत्री अब्दुल जलील मस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘डकैत’ और ‘नक्सली’ कहे जाने पर राज्य का सियासी पारा गर्म हो गया है। इस बयान को जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘अशोभनीय’ बताया वहीं मामले को तूल पकड़ता देख मंत्री ने भी खेद जताया है। परंतु, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंत्री की बर्खास्तगी पर अड़ी हुई है। इस मामले को लेकर बुधवार को दिनभर बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ, जिस कारण कार्यवाही नहीं चल सकी। मंत्री मस्तान का एक वीडियो वायरल होने के बाद राज्य की राजनीति गर्म हो गई। इस वीडियो में नीतीश सरकार के मंत्री द्वारा लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर जूते मारने के लिए उकसाने के बाद जूते मारते देखा गया तथा सार्वजनिक मंच से मंत्री ने प्रधानमंत्री को ‘नक्सली’ और ‘डकैत’ बताया। 

नोटबंदी के विरोध में पूर्णिया में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री मस्तान ने तब विवाद पैदा कर दिया, जब उन्होंने वहां एकत्र भीड़ से नोटबंदी के फैसले का विरोध करने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर जूते मारने को कहा। इसके बाद कुछ कार्यकर्ता बिना देर किए वहां प्रधानमंत्री की तस्वीर पर जूते मारने लगे। 

22 फरवरी को आयोजित इस कार्यक्रम में जूते मरवाने के बाद भी जब मंत्री का मन नहीं भरा, तब उन्होंने प्रधानमंत्री को नक्सली तक कह दिया। मस्तान ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “वह प्रधानमंत्री (पीएम) नहीं है, वह नक्सलाइट (नक्सली) है, उग्रवादी है, डकैत है और लोगों को तरह-तरह से सताने वाला है।”

इस वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा ने तेवर कड़े कर लिए। बिहार विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही बुधवार को जैसे ही प्रारंभ हुई, भाजपा सदस्यों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक शब्द कहने वाले मंत्री की बर्खास्तगी की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभी सदस्य सदन के मध्य आकर सरकार से मंत्री की बर्खास्तगी की मांग करने लगे। 

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सदस्यों से कई बार अपने स्थान पर जाने का आग्रह किया, परंतु जब वह नहीं माने तब विधानसभा की कार्यवाही पहली बार दोपहर 12 बजे तक और उसके बाद अपराह्न दो बजे और फिर गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। यही हाल विधान परिषद में भी देखने को मिला। 

विपक्ष की मांग है कि मुख्यमंत्री, अब्दुल जलील मस्तान को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें और कांग्रेस मंत्री पर निलंबन की कार्रवाई करे, वरना वे सदन नहीं चलने देंगे। 

इस मामले को तूल पकड़ता देख सत्ताधारी गठबंधन में शामिल सभी दलों ने इसे अफसोसजनक बताया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री के लिए बोले गए ऐसे शब्दों को अशोभनीय बताया। 

इस बीच इस मामले को लेकर जब विवाद बढ़ गया तब मस्तान ने भी खेद व्यक्त किया है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “मेरे या मेरे लोगों (कार्यकर्ताओं) के कुछ कहने पर किसी को भी ठेस लगी है तो उसके लिए ‘सॉरी’ बोलता हूं।” 

बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि मंत्री ने जो कहा और किया, वह खेदजनक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की हरकत नहीं होनी चाहिए। ऐसी बातें कहीं से भी सही नहीं है। 

बिहार के शिक्षा मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भी इस मामले पर खेद जताया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “स्वयं संबंधित मंत्री ने सदन के बाहर और भीतर इस घटना को लेकर खेद जता दिया है।”

उन्होंने कहा, “हम उस पार्टी से आते हैं जहां स्वयं राहुल गांधी ने लोगों को प्रधानमंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाने से मना किया था। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह और नीतीश कुमार के बारे में चुनाव के दौरान क्या-क्या नहीं कहा।” 

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, “हम दोनों सदनों को चलने नहीं देंगे।” उन्होंने मुख्यमंत्री से अब्दुल जलील मस्तान को मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा, “नीतीश कुमार में यदि थोड़ी सी भी नैतिकता बची है तो हम उनसे मांग करते हैं कि ऐसे मंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें। कांग्रेस को भी ऐसे मंत्री से इस्तीफा दिलवाना चाहिए।” 

भाजपा विधायक नितिन नवीन ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंत्री को बर्खास्त नहीं करते, सदन को नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री का नहीं पूरे देश का अपमान है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि मस्तान पर देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए तथा उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। 

–आईएएनएस

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