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कोरोना से बचकर नवरात्र पर घर बैठे कैसे करे माँ की पूजा, पायें मनचाहा वरदान

कल होगा हिंदू नववर्ष यानी नवसंवत्सर 2077 का शुभारम्भ, नवरात्र में कैसे करें पूजा, घट/कलश स्थापना आदि

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नई दिल्ली (समयधारा) :  Navratri 2020– इस बार नवरात्र 25 मार्च से शुरू हो रहे हैं।

और यह 9 दिन यानि 2 अप्रैल 2020 तक रहेंगे l इस बार किसी भी तिथि का क्षय नहीं है।

03 अप्रैल को दशमी के साथ नवरात्रि का पारण होगा।

इस नवरात्र को  वासंतिक नवरात्र भी कहते हैं। इसी दिन हिन्दू नववर्ष यानी नवसंवत्सर 2077 का शुभारम्भ होगा।

नवरात्र (Navratri) के दिनों में मां आदि शक्ति के नौ रूपों का पूजन नौ दिन तक किया जाता है। हर दिन एक रूप की पूजा की जाती है।

सालभर में दो बार नवरात्र आते हैं। चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र।

शारदीय नवरात्र पितृपक्ष (श्राद्ध) के बाद सितंबर-अक्टूबर के महीने में आते हैं।

शारदीय नवरात्र की नौ दिन की पूजा के बाद दशहरा मनाया जाता है।

जबकि  चैत्र नवरात्र मार्च-अप्रैल के महीने में शुरू होते हैं l इस बार चेत्र नवरात्र पर भक्तों की भीड़ नहीं रहेगी।

क्योंकि कोरोना वायरस का काला साया नवरात्र पर बना हुआ है l

इस महामारी को देखते हुए शहर के सिद्धपीठ अलोपशंकरी, ललिता देवी और कल्याणी देवी के पट भक्तों के लिए बंद रहेंगे।

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पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का प्रवेश मंदिरों में नहीं होगा। भजन संध्या व देवी जागरण के कार्यक्रम भी नहीं होंगे।

इसलिए भक्त घर पर ही विधिविधान से कलश स्थापना करके आदि शक्ति से कोरोना से मुक्ति की कामना करेंगे।

इस बार चैत्र नवरात्र का आरंभ 25 मार्च बुधवार से होगा। इस दिन रेवती नक्षत्र पूरे दिन और प्रतिपदा संध्याकाल तक विद्यमान रहेगी।

Navratri 2020: नवरात्रि में इन देवियों की होती है पूजा : 

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चैत्र नवरात्र : कोरोना से बचकर नवरात्र पर घर बैठे कैसे करे माँ की पूजा, पायें मनचाहा वरदान
अष्टमी  के दिन माँ गौरी के पूजन के बाद 9 कन्याओं और 2 कंजक को भेाजन करवाया जाता है। हालांकि आप पूरे नौ दिन भी कन्याओं को भोजन करवा सकते हैं।
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पूजन सामग्री और पूजा की तैयारी-

  • शुद्ध रोली और कुमकुम
  • साबुत लौंग का जोड़ा
  • सुपारी
  • पान
  • अक्षत
  • पंच मेवा
  • शहद
  • ताजा दूध
  • ताजा जल
  • गंगाजल
  • कलश
  • आम के पत्ते
  • आल्ता
  • फूल
  • धूप, अगरबत्ती, कपूर
  • दीपक मिट्टी और पीतल का हो सकता है। रोजाना पंच दीपक जलाएं और संभव हो सके तो आटे का दीपक जलाएं। अखंड ज्योत के लिए देसी घी और बड़ा दीपक रखें।
  • रोजाना ताजा फल और ताजा फूल मालाएं लाएं। मां के चरणों में और घर की सुहागिन स्त्रि‍यां आल्ता लगाएं।
  • पकवान और मिष्ठान दूध और दही से बनाएं।
  • पूरे घर में अच्छी तरह से साफ-सफाईं करें।

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घटस्थापना-

नवरात्र के दिन घटस्थापना की जाती है। हर बार घटस्थापना का मुहुर्त समय अलग-अलग होता है। आपको निर्धारित समय पर ही घटस्थापना करनी चाहिए। चलिए जानते हैं घटस्थापना कैसे करें। पौराणिक कथाओं और शास्त्रोंनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। ये भी माना जाता है कि कलश के मध्य में दैवीय शक्तियां निवास करती हैं। इसलिए घटस्थापना की जाती है।

घटस्थापना के लिए सामग्री-

  • एक कलश (मिट्टी,सोना, चांदी, तांबा या पीतल) और इसकी ढकने वाली प्लेट।
  • अक्षत
  • सिक्के (चांदी, सोना या रूपया)
  • मिट्टी का कटोरा
  • जौ
  • शुद्ध जल (सामान्यस जल, गंगाजल)
  • पानी वाला नारियल इसके लपेटने के लिए लाल कपड़ा या मोली
  • इत्र (गुलाब जल या सुगंधित जल)
  • साबुत सुपारी
  • दूर्वा
  • पंचरत्न
  • आम के पत्ते
  • फूल माला

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घटस्थापना कैसे करें-

पूजा स्थ‍ल पर पानी डालकर कपड़े से साफ करें। इसके बाद गंगाजल छिड़के। इसके बाद नया या साफ लाल कपड़ा बिछाएं। थोड़े अक्षत रखते हुए गणेश जी का आह्वान करें। कलश के मुंह पर मोली बांधें और स्वास्तिक या ऊं बनाएं। नारियल पर स्वास्तिक या ऊं बनाकर मोली या लाल कपड़ा बांधे। कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, फूल, सिक्का डालें। कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और ऊपर से लाल कपड़ा बंधा नारियल रख दें। जौ के पात्र में मिट्टी पहले से डलवा लें और फिर इसमें पानी डालकर जौ बोएं। इसके बाद देवी-देवताओं से नौ दिन तक कलश में विराजमान होने का आह्वान करें।

दीपक, अगरबत्ती, धूप और कपूर जलाकर कलश की पूजा करें और कलश पर फूल और माला चढ़ाकर इत्र, मिठाई और पकवान का भोग लगाएं।

इस बार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 24 मार्च दिन मंगलवार को दोपहर 02 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है,

जो 25 मार्च दिन बुधवार को शाम 05 बजकर 26 मिनट  तक रहेगी। 

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अब जानियें पूजा करने का चौघड़िया मुहूर्त / घट/कलश स्थापना / पूजा टाइम आदि

  • चौघड़िया मुहूर्त सुबह 6:05am से 7:36am तक 
  • घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05am से 7:01am तक
  • अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44am से दोपहर 12:33pm तक 

भक्तों को घर में देवी के चित्र के सामने श्रद्धा भाव से आराधना करनी चाहिए।
साथ ही दुर्गासप्तशती व नवदुर्गा का पाठ परिवार के साथ करना चाहिए।
पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ माँ देवी की पूजा करें l 
Navratri 2019 : जानियें कब से शुरू होगी नवरात्रि-पूजा विधि-घट स्थापना 
 

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