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लॉकडाउन में सैलरी पर कर्मचारी आहत! कर्मचारी-कंपनी आपस में सुलझाएं मुद्दा-SC

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को जारी रखते हुए कहा कि जो नियोक्ता अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं देते उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी...

नई दिल्ली: Full salary during Lockdown supreme court give relief to industries- लॉकडाउन में आपको पूरी सैलरी मिलेगी या नहीं। इसका फैसला आपके कंपनी मालिक के ऊपर छोड़ दिया गया है।

सुप्रीमकोर्ट(Supreme Court)ने शुक्रवार को लॉकडाउन में पूरी सैलरी मुद्दे (Full salary during Lockdown supreme court) पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मुद्दा नियोक्ता (Employer) और कर्मचारी (Employee) को आपस में बैठकर सुलझाना चाहिए।

कोर्ट के इस आदेश से उद्योगों को बहुत राहत मिली (give relief to industries) है लेकिन कर्मचारी कहीं न कहीं खुद को ठगा महसूस कर (employees upset) रहे है।

गौरतलब है कि सरकार ने 25 मार्च से लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (Nationwide Lockdown) के लिए 29 मार्च की अपनी अधिसूचना में कहा था कि नियोक्ताओं को 56 दिनों की पूरी सैलरी कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान देनी पड़ेगी और ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन समयधारा ने आपको अपनी 19 मई की पोस्ट के द्वारा पहले ही बता दिया था कि अब आपको लॉकडाउन में पूरी सैलरी नहीं मिलेगी

चूंकि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को पूरी सैलरी (full salary) देने वाली अपनी 29 मार्च की अधिसूचना को लॉकडाउन 4 (Lockdown4) लागू करते समय शामिल ही नहीं किया था।

देश में चौथे चरण का लॉकडाउन 18 मई से 31 मई तक लागू किया गया था।

शुक्रवार को लॉकडाउन में पूरी सैलरी (Full salary during lockdown) देने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन में पूरी सैलरी का मुद्दा नियोक्ता और कर्मचारियों को आपस में बातचीत करके सुलझाना चाहिए।

गौरतलब है कि अनलॉक (Unlock1) होने के बाद से अपने काम पर वापस लौटे ज्यादातर कामगारों ने शिकायत की है कि उन्हें लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान पूरी क्या आधी सैलरी भी नहीं दी गई

और वापस लौटने पर भी कई निजी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों को पूरी सैलरी मांगने पर या तो निकाला जा रहा है या फिर उन्हें 50-60 फीसदी सैलरी ही दी जा रही है।

लॉकडाउन में पूरी सैलरी (Full salary in Lockdown) देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के रूख से उद्योगों को भले ही राहत मिल गई (Full salary during Lockdown supreme court give relief to industries)है लेकिन कर्मचारी बहुत आहत हुए है।

तीन महीने से घरों में बिना काम के बैठे लोग अब घर का खर्चा, किराया, आगे चलकर बैंक ईएमआई (EMI) कैसे चुकाएंगे…सरीखे मुद्दे उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रहे है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने भी फुल सैलरी के मुद्दे पर अपनी बात से यूटर्न ले लिया और हलफनामे में इसे कर्मचारी व नियोक्ता के बीच का मसला बताकर पल्ला झाड़ लिया।

इसलिए केंद्र ने लॉकडाउन 4 (Lockdown4) की अधिसूचना में पूरी सैलरी वाले 29 मार्च के आदेश को शामिल ही नहीं किया गया था।

 

लॉकडाउन में पूरी सैलरी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमुख बातें

Full salary during Lockdown supreme court give relief to industries:

-इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को जारी रखते हुए कहा कि जो नियोक्ता(Employer)

अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं देते उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान पूर्ण सैलरी भुगतान का निर्देश देने वाली केंद्र की 29 मार्च की अधिसूचना को न समझकर कर्मचारी और नियोक्ता को आपस में बैठकर इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए।

-शीर्ष अदालत के इस फैसले से प्राइवेट इम्पलॉयर्स (Private employers), कारखानों और उद्योगों को बहुत बड़ी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जो निजी नियोक्ता लॉकडाउन के दौरान अपने श्रमिकों और कामगारों को पूरी मजदूरी या सैलरी देने में विफल रहे है सरकार उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाएगी।

-कोर्ट के फैसले के अनुसार राज्य सरकार के श्रम विभागों द्वारा वेतन भुगतान की सुविधा के संबंध में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच बातचीत होनी चाहिए।

-मजदूरों और कामगारों को 56 दिन के लॉकडाउन की मजदूरी के भुगतान के लिए आपस में बातचीत करनी होगी।

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्योग और मजदूर दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है इसमें विवाद नहीं हो सकता।

-50 दिनों के लिए मजदूरी के भुगतान के विवादों को हल करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

-कोर्ट ने कहा कि जो निजी नियोक्ता और उद्योग लॉकडाउन के दौरान भुगतान के लिए श्रमिकों के साथ बातचीत करने के इच्छुक हैं, कर्मचारियों के साथ बातचीत शुरू कर सकते हैं।

-उन्होंने कहा कि वे नियोक्ता (Employer) जो लॉकडाउन(Lockdown)के दौरान काम कर रहे थे, लेकिन पूरी क्षमता से नहीं, वो बातचीत में भी प्रवेश कर सकते हैं।

-साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि चल रही बातचीत के लिए कर्मचारियों को बिना किसी पूर्वाग्रह के काम करने की अनुमति दी जा सकती है।

गौरतलब है कि देश में लॉकडाउन के दौरान पूरी सैलरी न मिलने की शिकायत केवल निजी कर्मचारियों और मजदूरों की ही नहीं है

बल्कि दिल्ली,मुंबई और अन्य कई राज्यों डॉक्टर्स और अन्य कोरोना वॉरियर्स पूरी सैलरी न मिलने से खासे नाराज और परेशान है।

दिल्ली के कस्तूरबा अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे रेजिडेंट डॉक्टरों ने 16 जून तक 3 महीने (मार्च, अप्रैल और मई)  की पैंडिंग सैलरी का भुगतान न करने पर सामूहिक इस्तीफे की धमकी भी दी है।

 

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