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नए कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक,कमेटी का किया गठन

हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों पर किसान संगठनों ने ऐतराज जताया है और उन्होंने साफ कर दिया है कि कमेटी के सदस्य सरकार के कृषि कानूनों के पहले से ही पक्षधर है....

Supreme court bans new farm laws-constitutes committee

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों(new farm laws)पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अगले आदेश तक रोक लगा दी है और इन कानूनों पर विचार के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन भी करने का आदेश दिया (Supreme court bans new farm laws-constitutes committee)है।

इसका सीधा सा मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक नए कृषि कानून लागू नहीं होंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों पर किसान संगठनों ने ऐतराज जताया है

और उन्होंने साफ कर दिया है कि कमेटी के सदस्य सरकार के कृषि कानूनों के पहले से ही पक्षधर है। इसलिए किसान संगठन अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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किसान आंदोलन

मंगलवार को नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि इन कानूनों के लागू करने पर रोक लगाई जा रही है। कोर्ट के अगले आदेश तक नए कृषि कानून लागू नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने इन कानूनों के मूल्यांकन के लिए एक कमेटी का गठन किया है,जिसमें चार सदस्य शामिल (Supreme court bans new farm laws-constitutes committee)है।

नए कृषि कानून के लिए बनाई कमेटी में जो चार सदस्य शामिल है उनमें  हरसिमरत मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (पूर्व निदेशक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन), अनिल धनवत के नाम सदस्य के तौर पर सुझाए गए हैं।

गौरतलब है कि किसान संगठन तो कमेटी गठन के विरोध में थे लेकिन फिर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इसके लिए अंतरिम आदेश देगा।

सरकार और किसानों के बीच बीते 48दिनों से नए कृषि कानूनों पर गतिरोध जारी है और किसान धरना-प्रदर्शन (Farmers Protest)कर रहे है।

हजारों किसान दिल्ली बॉर्डर पर अपना शांतिपूर्ण आंदोलन ( Kisan andolan ) कर रहे है।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है और आज सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों को लागू करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी और एक कमेटी के गठन का आदेश दिया जोकि दो महीने में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी।

सुनवाई के दौरान किसानों का पक्ष रख रहे वकील शर्मा ने बताया कि किसान संगठन सुप्रीम कोर्ट की ओर से कमेटी गठित किए जाने के पक्ष में नहीं हैं और वो कमेटी के समक्ष नहीं जाना चाहते हैं।

Supreme court bans new farm laws-constitutes committee

कोर्ट ने कहा कि ‘अगर किसान सरकार के समक्ष जा सकते हैं तो कमेटी के समक्ष क्यों नहीं? अगर वो समस्या का समाधान चाहते है तो हम ये नहीं सुनना चाहते कि किसान कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे।

एम एल शर्मा ने कहा कि ‘मैंने किसानों से बात की है. किसान कमेटी के समक्ष पेश नही होंगे. वो कानूनों को रद्द करना चाहते हैं. वो कह रहे हैं कि पीएम मामले में बहस के लिए आगे नहीं आए।’

इसपर CJI बोबडे ने कहा कि ‘हमें कमेटी बनाने का अधिकार है। जो लोग वास्तव में हल चाहते हैं वो कमेटी के पास जा सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘कमेटी हम अपने लिए बना रहे हैं, कमेटी हमें रिपोर्ट देगी।

कमिटी के समक्ष कोई भी जा सकता है. किसान या वो वकील के माध्यम से भी।’ CJI ने कहा कि चूंकि पीएम इस मामले में पक्षकार नहीं हैं, ऐसे में कोर्ट इसपर कुछ नहीं कह सकता है।

कोर्ट ने कहा कि ‘हम समस्या को सबसे अच्छे तरीके से हल करने की कोशिश कर रहे हैं. शक्तियों में से एक का इस्तेमाल कर हमें कानून को निलंबित करना होगा. हम समस्या का समाधान चाहते हैं।

हम जमीनी हकीकत जानना चाहते हैं इसलिए कमिटी का गठन चाहते हैं।’ CJI ने कहा कि ‘हम कानून को सस्पेंड करना चाहते हैं, सशर्त. लेकिन अनिश्चितकाल के लिए नहीं। हम कोई नकारात्मक इनपुट नही चाहते।’

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कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि ‘कोई भी ताकत, हमें कृषि कानूनों के गुण और दोष  के मूल्यांकन के लिए एक समिति गठित करने से नहीं रोक सकती है. यह समिति न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

समिति यह बताएगी कि किन प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए, फिर वो कानूनों से निपटेगा।’ CJI ने कहा कि ‘हम यह चाहते हैं कि कोई जानकार व्यक्ति ( कमेटी) किसानों से मिले और पॉइंट के हिसाब से बहस करें कि दिक्कत कहां है।’

बता दें कि इसके अलावा, ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाए जाने वाली केंद्र की अपील पर कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया है और कहा है कि वो इस मुद्दे पर सोमवार को सुनवाई करेगी।

 

 

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(इनपुट एजेंसी से भी)

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