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अग्रिम जमानत याचिका क्या है ?

what is anticipatory bail.. all fact about Agrim Zamanat

कभी कभी हमें यह पूर्वानुमान होने लगता है कि हमारा विरोधी पक्ष हमें परेशान करने या हमसे बदला लेने के लिए

हमें किसी न किसी झूठे मुकदमें में उलझा सकता हैl ऐसी स्थिति में हम परेशान हो जाते हैं

और किसी न किसी तरह से मामले को नैतिक अनैतिक तरीके से मैनेज करने की कोशिश करने लगते हैंl

शायद आप जानते होंगे कि ऐसी परिस्थिति में अग्रिम जमानत एक बेहतर विकल्प होता हैl

भारत का कानून हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि वो किसी भी मुकदमे के दायर होने के पूर्व गिरफ्तारी से बचने के लिए

अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकता हैl मेरिट के आधार पर कोर्ट उसकी याचिका को स्वीकारती है या खारिज करती हैl

अग्रिम जमानत क्या होता है ?

अग्रिम जमानत किनअपराधों के लिए दिया जाता है ? अग्रिम जमानत की प्रक्रिया क्याहोती है ?

अग्रिम जमानत की याचिका कौन दायर करता है ?

इसतरह के सवाल अक्सर आपके दिमाग में आते होंगेl आज हम इसकीविस्तार से चर्चा कर रहे हैंl

गिरफ्तारी से बचने के लिए होता है इस्तेमाल

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वैसी परिस्थिती में जब किसी मामले के आरोपी को यह एहसास होता है कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है

तब वह अपने वकील के माध्यम से सीआरपीसी की धारा 438 में दिए गए अधिकार काप्रयोग करता हैl

इस धारा के तहत आरोपी कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर करता हैl

कोर्ट अगर इस याचिका को स्वीकृत करते हुए अग्रिम जमानत को मंजूरी दे देती है

तो अगले आदेश तक उसे कोई भी गिरफ्तार नहीं कर सकताl

अग्रिम जमानत याचिका एफआईआर दर्ज होने के पहले भी दायर की जा सकती है

अगर किसी भी व्यक्ति को यह आशंका है कि उसे फंसाने के लिए झूठा मुकदमा दायर होने वाला हैl

इसके बाद कोर्ट पुलिस को आदेश देती है कि आरोपी को सात दिनों के भीतर अगर एफआईआर हुआ है

तो उसकी कॉपी मुहैया कराई जाए ताकी वो अपने नियमित जमानत के लिए प्रयास कर सकेl

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मुकदमा दायर करने वाले को भी अधिकार

जब कोई भी आरोपी अग्रिम जमानत याचिका दायर करता है तो उसकी सूचना विरोधी पक्ष यानी अभियोजन पक्ष को भी दी जाती है

ताकी जिस दिन इस याचिका पर सुनवाई शुरु हो तो वो भी आकर अपना पक्ष प्रस्तुत रखे या इसका विरोध करेl

कोर्ट दोनों पक्षों की बात सुनती हैl अग्रिम जमानत के पक्ष में कानूनविदों द्वारा एक तर्क यह भी दिया जाता है कि

इससे फर्जी मुकदमों पर अंकुश लगता हैl इसमें कोई शक नहीं कि रंजिश की वजह से फर्जी मुकदमे भी खूब दायर किए जाते हैंl

अंतिम फैसला कोर्ट का

अग्रिम जमानत के मामले में कोर्ट याचिकाकर्ता को कई शर्तों में बांध देता है

जिसमें सबसे प्रमुख होता है कि वो बिना कोर्ट के आदेश से भारत नहीं छोड़ सकताl चूंकि अंतिम फैसला कोर्ट को ही करना होता है

इसलिए कोर्ट याचिकाकर्ता के रिकॉर्ड की भी समीक्षा करता है कि

इसके पूर्व भी उसके विरुद्ध कभी इस तरह का या कोई भी संज्ञेय अपराध का आरोप लगाया गया है अथवा नहींl

सभी बिंदुओं पर गहनतापूर्वक विमर्श के बाद ही कोर्ट अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाता हैl

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Reena Arya

रीना आर्य www.samaydhara.com की फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ है। रीना आर्य ने पत्रकारिता के महज 6-7 साल के भीतर ही अपने काम के दम पर न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपनी पहचान बनाई बल्कि तमाम चुनौतियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए समयधारा.कॉम की नींंव रखी। हर मुद्दे पर अपनी ज्वलंत और बेबाक राय रखने वाली रीना आर्य एक पत्रकार, कंटेंट राइटर,एंकर और एडिटर की भूमिका निभा चुकी है।

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