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Friday Thoughts: इतना भी मीठा न बनों की कोई नींबू की तरह निचोड़ दें

और इतना भी सख्त न बनों कि कोई दरख्त की तरह तुम्हें तोड़ दें।

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इतना भी मीठा न बनों की कोई नींबू की तरह निचोड़ दें

और इतना भी सख्त न बनों की कोई दरख्त की तरह तुम्हें तोड़ दें।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उनके बदले हुए तरीकों से जाना है मैंने,
कि अब उनके जरूरत का प्यादा नहीं हूं मैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उसे अपना दुख बताकर समय बर्बाद मत करना,
जो आपकी खामोशी समझने के काबिल नहीं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अगर तुम्हे कोई चीज पसंद नहीं है तो उसे बदल दो,

अगर उसे आप नहीं बदल सकते तो अपने नजरिये को बदल दो

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Dropadi Kanojiya

द्रोपदी कनौजिया पेशे से टीचर रही है लेकिन अपने लेखन में रुचि के चलते समयधारा के साथ शुरू से ही जुड़ी है। शांत,सौम्य स्वभाव की द्रोपदी कनौजिया की मुख्य रूचि दार्शनिक,धार्मिक लेखन की ओर ज्यादा है।

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