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समयधारा के 5 बेमिसाल साल,धन्यवाद अपार, जो आप रहे सदा हमारे साथ

समयधारा.कॉम का मकसद है-बिना किसी लाग-लपेट के,भेदभाव रहित होकर, सटीक ख़बरें/लेटेस्ट ख़बरें/ब्रेकिंग न्यूज़/ओपिनियन सहित देश-विदेश व समाज की, खासकर भारतीय समाज की हर सच्चाई को निडरता से आपके सामने रखना l

Samaydhara 5th Anniversary-celebration-happy-birthday-samaydhara

नईं दिल्ली/मुंबई (समयधारा): देखते ही देखते आपके और हमारे बीच का साथ पांच साल के महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुँच गया l

ये पांच साल नहीं,बल्कि हमारी जिंदगी के वे महत्वपूर्ण पड़ाव है,जो हर दिन,हर पल,हर क्षण रोजाना हमें जीने की, कुछ नया करने की, साथ ही साथ आप तक सटीक ख़बरों को पहुंचाने की… एक नई ऊर्जा प्रदान करते रहे हैl

आज से करीब नौ साल पहले (वर्ष 2013) में रीना आर्य जी ने समयधारा की नींव रखी और फिर उसे एक डिजिटल न्यूज पोर्टल का जीवंत रुप 10 अक्टूबर 2016(Samaydhar birth anniversary 10 Oct 2016) को दिया।

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दोस्तों अपने अथक और साहसी प्रयासों से रीना जी(Reena Arya) ने कड़े संघर्षों के बीच अपने बिजनेस पार्टनर धर्मेश जैन(Dharmesh Jain) जी के साथ समयधारा.कॉम को सटीक ख़बरों के साथ आपके समक्ष पेश किया l

समयधारा.कॉम का मकसद है-बिना किसी लाग-लपेट के,भेदभाव रहित होकर, सटीक ख़बरें/लेटेस्ट ख़बरें/ब्रेकिंग न्यूज़/ओपिनियन सहित देश-विदेश व समाज की, खासकर भारतीय समाज की हर सच्चाई को निडरता से आपके सामने रखना l

Happy 5th Anniversary of Samaydhara:समयधारा.कॉम की 5वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं

इन पांच वर्षों में हमारे परिवार से कई लोग जुड़ें, कई हमारे साथ आज भी है, तो कई ऊँचाइयों की नई बुलंदियों को छूकर खुद का और हमारा नाम भी रोशन कर रहे है l

पर इन सब के बीच जो पाठक….नियमित रूप से हमारे साथ रहे, उनका योगदान समयधारा(Samaydhara) के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हैl

मुश्किलें तो बहुत आई थी सफ़र में, लेकिन एक तेरा साथ(हमारे पाठक) हमें अंजाम तक पहुंचा गया l

इस सफ़र में उन लोगों का योगदान भी बहुत है, जिन्होंने समयधारा को कई बार बंद करने की सलाह दे दी l

किसी ने कहा कि कोरोना का समय है। खर्चे ज्यादा हो रहे है, बंद कर दो, तो जिन्हें समयधारा ने फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचाया उन्होंने ही उसे खत्म करने के लिए भीतरघात लगाया।

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कोई सामने से, तो कोई पीछे से, इसे बंद करने की सलाह,षड्यंत्र रचता रहा। लेकिन जब हौंसलों मे हो उड़ान तो फिर कद देखना फिजूल है आसमां का।

इसी को चरितार्थ करते हुए रीना जी और धर्मेश जी ने समयधारा के वजूद को बनाएं रखने के लिए प्रयत्न जारी रखें।

रीना जी को कई लोगों ने समयधारा बंद करके अन्य बड़े,नामचीन ब्रैंड्स में काम करने की बिन मांगी सलाह भी डे डाली।

लेकिन कहते है न,ईश्वर सबसे ज्यादा मुश्किले उसी किरदार के सामने रखता है,जिसे उसे निखारना और संवारना होता है।

रीना जी आलोचकों की तमाम उलाहानाओं, उनके कटाक्षों को सकारात्मक तरीके से लेती गईऔर हर तरह की परेशानियों को झेलने के बावजूद समयधारा के वजूद को बनायें रखा l

न सिर्फ बनायें रखा, बल्कि इसे हथियार बनाकर समाज की सटीक ख़बरों को निरंतर आप तक पहुंचाए रखा l

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बीते वर्ष एक समय ऐसा भी आया…जब नकारात्मकता से भरे, धोखेबाज लोगों ने अपनों की शक्ल अख्तियार करके समयधारा.कॉम को तकरीबन हथिया ही लिया था,

लेकिन अदम्य साहस की पहचान बन चुकी रीना आर्य मैडम ने उन्हें खासा सबक सिखाया और बता दिया कि मेहनत से सींचे पेड़ को केवल माली ही संभाल सकता है। बाग में बैठने वाले मुसाफिर नहीं।

न सिर्फ समयधारा के लिए उन्होंने अपना सबकुछ त्याग दिया l बल्कि इसे ज़िंदा रखने के लिए वह उन लोगों से जा भिड़ी जो सामज के कई उच्च पदों पर विराजित है और समयधारा को हथियाना चाहते थे l

पुलिस,कानूनी लड़ाई सरीखी तमाम चुनौतियों से मुकाबला करते हुए समयधारा अपने अस्तित्व की लड़ाई निर्भीकता से लड़ती रही और उसके पाठकों ने, उसके शुभचिंतकों ने उसके वजूद को न केवल बनाएं रखने में अहम भूमिका निभाई बल्कि वापस उठ खड़ा होने की ताकत दिलाई। 

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एक लेखिका के लिए, एक एंकर के लिए, एक ऐसी मध्यमवर्गीय लड़की…जिसने कभी जिंदगी में व्यवसाय नहीं किया, उस लड़की के लिए समयधारा की स्थापना करके, उसे चलाना किसी भी तरह से आसान नहीं था l

डिजिटल वर्ल्ड में प्रतियोगिता व अपने प्रतिद्वंदियों से लड़ना और समयधारा के वजूद को बनायें रखना खाने का काम नहीं है l

सच में इन्होंने इन 5 सालों में समयधारा(Samaydhara 5th anniversary)के लिए जो किया, वह एक मिसाल के काबिल है l

चाहें भावनात्मक क्षति (माँ की मृत्यु ) हो या फिर कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक परेशानियां हो या फिर कार्यक्षेत्र में कुछ अपनों द्वारा ही पीठ में छुरा घोंपना हो, इन सब से लड़कर एक वीरांगना की तरह समयधारा को उन्होंने बनायें रखा l

परेशानियाँ तो जिंदगी में आएंगी बहुत… पर इन सभी परेशानियों से लड़कर उनका मुकाबला करके, जो जीत जाता है वही सिकंदर कहलाता है l

रीना मैडम न सिर्फ सिंकदर है, बल्कि वह उन महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है, जो अपने आत्मसम्मान और वजूद की लड़ाई लड़ना चाहती है, जो समाज में व्याप्त कीचड़/गंदगी को जड़ से खत्म करना चाहती है l

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वह अपने वजूद की एक अलग पहचान बनाना चाहती है l इसी कड़ी में हमारे साथ जुड़ीं ऐसी कई महिलायें जिन्होंने कलम के द्वारा रीना मैडम के साथ कदम से कदम मिलाया l 

उन सभी लेखिकाओं को समयधारा की ओर से तहे दिल से शुक्रियाl

वह सभी लेखक जिन्होंने दिन रात एक करके समयधारा के लिए काम किया l वह सभी टेक्निकल लोग, चाहें वो सर्वर वाले हो या फिर डेवलपर्स सभी लोगों का समयधारा आभारी रहेगा l

समय किसी के लिए नहीं रुकता और इसीलिए समयधारा भी कभी नहीं रुकी। समय की धारा के साथ सटीक ख़बरों की पतवार से समयधारा ने पिछले पांच सालों में अपनी एक अलग ही पहचान बनायीं है l

और आगे भी इसकी यह धारा सटीक ख़बरों व समय के साथ-साथ बहती रहेगी l आज समयधारा जो भी है वह केवल और केवल अपने पाठको,लेखकों और सहकर्मियों की बदौलत है।

उम्मीद है आपका और हमारा साथ ताउम्र ऐसे ही कायम रहेगा और हम आगामी वर्षों में ऐसी अनेकों वर्षगांठ सेलिब्रेट करेंगे।

 

समयधारा की पांचवीं वर्षगांठ की आप सभी को शुभकामनाएं।

Happy 5th anniversary of Samaydhara!

 

 

 

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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन www.samaydhara.com के को-फाउंडर और बिजनेस हेड है। लेखन के प्रति गहन जुनून के चलते उन्होंने समयधारा की नींव रखने में सहायक भूमिका अदा की है। एक और बिजनेसमैन और दूसरी ओर लेखक व कवि का अदम्य मिश्रण धर्मेश जैन के व्यक्तित्व की पहचान है।

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