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Loan Moratorium पर सुप्रीम कोर्ट के बोल-RBI के पीछे न छुपें,लोगों की दुर्दशा के बारे में भी सोचना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट : आप बैंकों को Interest लेने से रोक सकते थे, लेकिन आप ने RBI के पीछे छिपना मुनासिब समझा और बैंकों को मनमाने तरीके से ब्याज वसूलने दिया, आपको आम आदमी के बारे में भी तो सोचना चाहिए था.

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नई दिल्ली : एक तरफ कोरोना का कहर तो दूसरी तरफ लोन मोरेटोरियम खत्म होने के बाद की स्थिति l 

देश में कई लोगों के रोजगार का अता-पता नहीं है l

कई लोगों को सैलरी नहीं मिल रही है तो  कई लोगों को सिर्फ आधी या उससे कम सैलरी मिल रही है l

इस बीच लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium Scheme) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

मोरेटोरियम पर बैंकों द्वारा ब्याज (interest) वसूलने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि

आप रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पीछे नहीं छुपें और अपना पक्ष रखें कि आपने बैंकों को लोन मोरेटोरियम पर interest लेने से क्यों नहीं रोका।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह समस्या आपके द्वारा लगाए गए लॉकडाउन की वजह से पैदा हुई है।

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यह केवल व्यवसाय पर विचार करने का समय नहीं है, सरकार को लोगों की दुर्दशा के बारे में भी सोचना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा आपके पास आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster management act) के तहत पर्याप्त शक्तियां थीं

जिससे आप बैंकों को Interest लेने से रोक सकते थे, लेकिन आप ने RBI के पीछे छिपना मुनासिब समझा

और बैंकों को मनमाने तरीके से ब्याज वसूलने दिया। आपको आम आदमी के बारे में भी तो सोचना चाहिए था।

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इस पर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा

जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया।

संविधान पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से आपदा प्रबंधन अधिनियम पर रुख स्पष्ट करने और यह बताने के लिए भी कहा कि

क्या मौजूदा समय में ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज लिया जा सकता है।

आगरा निवासी गजेन्द्र शर्मा की इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि कर्ज की स्थगित किस्तों की अवधि 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगी।

उन्होंने इसके विस्तार की मांग करते हुए कहा कि जब तक इस मामले में कोई फैसला नहीं हो जाता,

ब तक Loan Moratorium Scheme खत्म नहीं करना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से बैंको की अधिसूचना से उस हिस्से को निकालने का निर्देश देने का आग्रह किया है,

Loan Moratorium अवधि के दौरान कर्ज राशि पर ब्याज वसूलने की बात कही गई है।

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