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Olympic में महिलाओं का जलवा जारी, अब महिला हॉकी टीम ने रचा इतिहास

भारतीय महिला टीम ने पहली बार ओलंपिक के नॉकआउट स्टेज में प्रवेश कर इतिहास रच दिया.

Tokyo Olympic 2020  indian women hockey reaches 1st olympic semifinal 

नई दिल्ली (समयधारा) : टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic 2020) में भारतीयों के लिए आज का दिन भी खुशियों से भरा रहा है l

भारत की महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए ओलिंपिक में सेमीफाइनल में कदम रखा है l

भारत ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया 1-0 से हराया l

भारतीय टीम की ओर से गुरजीत कौर ने 22वें मिनट में एकमात्र गोल किया।

भारतीय महिला टीम ने पहली बार ओलंपिक के नॉकआउट स्टेज में प्रवेश कर इतिहास रच दिया है।

भारतीय टीम पूल A  में 2 जीत (two wins) और तीन हार (three defeats) के साथ चौथे स्थान पर रही थी।

वहीं नीदरलैंड के बाद Hockeyroos के नाम से जानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम दूसरे नंबर पर रही है।

पूल B में वो अपने सभी रिकॉर्ड जीतों के साथ टॉप पर रही है।

Tokyo Olympic 2020  indian women hockey reaches 1st olympic semifinal 

Tokyo Olympic 2020 : 41 साल बाद हॉकी ओलिंपिक के सेमीफाइनल में भारत

Tokyo Olympic 2020 : 41 साल बाद हॉकी ओलिंपिक के सेमीफाइनल में भारत

भारत का अब तक का ओलिंपिक सफ़र 

भारत की पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 41 साल बाद ओलिंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचा l 

ग्रेट ब्रिटेन को 3-1 से क्वार्टर फाइनल में हरा भारत ने सेमीफाइनल में रखा कदमl  यह ऐतिहासिक जीत किसी भी मायने में कम नहीं है l 

इस जीत से भारत की एक और मैडल जीतने की आस जग गयी है l  

1980 के बाद यह पहला मौका है जब भारत हॉकी में सेमीफाइनल में पहुंचा है।

भारत के लिए विनिंग गोल 7वें मिनट में दिलप्रीत सिंह, 16वें मिनट में गुरजीत सिंह और 57वें मिनट में हार्दिक सिंह ने दागा

, जबकि ब्रिटेन के लिए 45वें मिनट में सैमुअल ने गोल किया।

ओलिंपिक में भारत को आखिरी पदक 1980 में मॉस्को में मिला था जब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने पीला तमगा जीता था।
उसके बाद से भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई
और 1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पांचवें स्थान पर रहने के बाद वह इससे बेहतर नहीं कर सकी ।
Tokyo Olympic 2020  indian women hockey reaches 1st olympic semifinal 
बीजिंग में 2008 ओलंपिक में टीम पहली बार क्वॉलिफाइ नहीं कर सकी और 2016 रियो ओलंपिक में आखिरी स्थान पर रही।
देश में हॉकी का ग्राफ लगातार नीचे चला गया। पिछले पांच साल में हालांकि भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में जबर्दस्त सुधार आया है जिससे वह विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंची।
इससे पहले, 

पी वी सिंधु ने चीन की खिलाड़ी को हरा कांस्य पदक जीता l

इस तरह से भारत की झोली में दूसरा पदक आ गया l कल की हार की निराशा से उबरकर सिंधु ने शानदार प्रदर्शन किया l 

वह देश की पहली ऐसे महिला खिलाड़ी है जिसने लगातार दो ओलिंपिक में पदक जीता और इतिहास रच दिया l 

पिछले रियो ओलिंपिक में उन्होंने सिल्वर मैडल जीता था l इस ओलिंपिक में कांस्य पदक जीत कर उन्होंने इतिहास रच दिया l 

सिंधु ने 21-13 और 21-15 से चीन की हे बिंग जियाओ खिलाड़ी को सीधे सेटों में हराया l  

Tokyo Olympic Live : पी वी सिंधु-पूजा रानी हारी

इससे पहले,

टोक्यो ओलिंपिक में भारत की तीसरें पदक की आस में एक गहरा धक्का लगा l

पूजा रानी चीनी बॉक्सर से हार गई l सिंधु भी सेमीफाइनल में हार गयी l 

Tokyo Olympic 2020  indian women hockey reaches 1st olympic semifinal 

इससे पहले, पर भारत की दूसरी महिला खिलाड़ी पी वी सिंधु ने आस जगा रखी है,

और वह अपने मैच में कड़ा मुकाबला कर रही है l   पर निराशा की बात यह है की TAI TZU ने पहला मुकाबला 21-18 से जीत लिया है l 

भारत की पी वी सिंधु ने पहले सेट में काफी कड़ी टक्कर दी थी पर अंत में वह लय बराबर नहीं रख पायी और उसे पहला सेट गँवा दिया l 

Breaking News : Tokyo Olympic में भारत को पहला पदक, मीराबाई ने जीता पहला पदक

Breaking News : Tokyo Olympic में भारत को पहला पदक, मीराबाई ने जीता पहला पदक

इससे पहले, 

भारत के लिए पहला मेडल मीराबाई चानू ने जीता था उसके बाद से अब तक एक भी मेडल भारत को नहीं मिला है। क्वार्टर फाइनल में पूजा रानी को हार मिली है।

भारत की ओर से 75 किलोग्राम वर्ग में पूजा रानी का ओलिंपिक सफर खत्म हो चुका है।

क्वार्टर फाइनल मुकाबले में पूजा रानी को चीन की खिलाड़ी ने 5-0 से हरा दिया है।

ये मुकाबला एकतरफा ही रहा। चीनी खिलाड़ी लि कियान तीनों राउंड में हावी रहीं।

Tokyo Olympic 2020  indian women hockey reaches 1st olympic semifinal 

इससे पहले भारतीय मुक्केबाज पूजा रानी (75 किग्रा) ओलिंपिक खेलों में पदार्पण करते हुए

शुरुआती मुकाबले में अल्जीरिया की इचरक चाएब को 5-0 से पराजित कर क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश किया था।

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तीस साल की भारतीय ने पूरे मुकाबले के दौरान अपने से 10 साल जूनियर प्रतिद्वंद्वी पर दबदबा बनाए रखा था।

वह कंधे की चोट से जूझती रहीं जिससे उनका करियर खत्म होने का भी डर बना हुआ था,

उनका हाथ भी जल गया था। वित्तीय सहयोग की कमी के बावजूद वह यहां तक पहुंची हैं।

उनके पिता पुलिस अधिकारी हैं जो उन्हें इस खेल में नहीं आने देना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि मुक्केबाजी आक्रामक लोगों के लिए ही है।

 

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