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ShivSena का असल बॉस कौन?उद्धव ठाकरे या एकनाथ शिंदे? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी,जानें किसने क्या कहा?

उद्धव ठाकरे(Uddhav Thackeray) की ओर से सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court)में कपिल सिब्बल बहस कर रहे है तो वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(Eknath Shinde)की ओर से हरीश साल्वे कोर्ट में मौजूद है।

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नई दिल्ली:शिवसेना पर किसका अधिकार(who-owned-ShivSena-hearing-today)है? उद्धव ठाकरे गुट या एकनाथ शिंदे गुट,सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई जारी है।

महाराष्ट्र की राजनीति(Maharashtra Politics)में शिवसेना के अस्तित्व पर खड़े हुए सवाल का निपटारा आज,बुधवार 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में चल रहा(Supreme-court-Uddhav-Thackeray-Vs-Eknath-Shinde-who-owned-ShivSena-hearing-today)है। शिवसेना पर किसका आधिपत्य है।

इस बाबत उद्धव ठाकरे(Uddhav Thackeray) की ओर से सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court)में कपिल सिब्बल बहस कर रहे है तो वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे(Eknath Shinde)की ओर से हरीश साल्वे कोर्ट में मौजूद है।

शिवसेना के मुददे चीफ जस्टिस ने पूछा कि हम जाना चाहते है कि अगर 2/3 लोग किसी राजनीतिक दल से अलग होते हैं तो क्या उन्हें नई पार्टी का गठन करना होगा?

सीजेआई ने कहा कि क्या नए ग्रुप को चुनाव आयोग के समक्ष रजिस्टर करना होगा?  या स्पीकर के पास जाना होगा? या उन्हें दूसरी पार्टी में शामिल होना होगा?

ठाकरे ग्रुप की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर वे नई पार्टी बनाते हैं तो उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष पंजीकरण कराना होगा, लेकिन किसी अन्य पार्टी में विलय होने पर पंजीकरण नहीं कराना होगा,

लेकिन मुद्दा संतुलन का भी है। 1/3 अभी भी पार्टी में शेष हैं।  2/3 यह नहीं कह सकते कि हम ही पार्टी हैं।

सिब्बल ने कहा कि बागी विधायकों ने न तो उन्होंने अलग पार्टी बनाई न किसी पार्टी में विलय किया! वो तो खुद को ही मूल पार्टी बता रहे हैं।

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संविधान में संशोधन कर दल बदल निरोधक कानून में कई अहम शर्तें जोड़ी गईं, जिसमें दो तिहाई सदस्य अलग होकर किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाएं या मूल पार्टी किसी अन्य पार्टी में विलय करें तो असंतुष्ट विधायक या सांसद अलग गुट बनाएं, तभी वो दल बदल निरोधक कानून के शिकंजे से बाहर रह सकते हैं।

सिब्बल ने कहा कि मूल पार्टी से अलग होने की भी स्थिति है।

प्रत्येक स्थिति के लिए कानून है और कानून कहते हैं कि उन्हें केवल एक अलग समूह के रूप में मान्यता दी जाएगी, लेकिन एक पार्टी के रूप में नहीं, लेकिन उनका दावा है कि वे राजनीतिक दल हैं, लेकिन यह सच नहीं है।

उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) के समक्ष यह बयान दिया है।

सीजेआई ने कहा कि क्या आपके मुताबिक  बैठक में शामिल न होना पार्टी की सदस्यता छोड़ना है। सिब्बल ने कहा कि ‘हां’ उन्होंने सदस्यता छोड़ दी है।

उन्होंने एक नया व्हिप नियुक्त किया है। उन्होंने एक नया नेता नियुक्त कर लिया है।

सिब्बल ने कहा कि आप पार्टी से चुनकर आए हैं, आपको उस राजनीतिक पार्टी की बात माननी चाहिए। बागी गुवाहाटी में बैठक कर कह रहे हैं कि असली राजनीतिक पार्टी हम हैं।

सिब्बल ने आगे कहा कि आज जो किया जा रहा है वह दसवीं अनुसूची का उपयोग दलबदल को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

अगर इसकी अनुमति दी जाती है, तो इस तरह का इस्तेमाल किसी भी बहुमत की सरकार को गिराने के लिए किया जा सकता है।  क्या यही है दसवीं अनुसूची का उद्देश्य?

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सिब्बल – अगर आप अयोग्य हो जाते हैं तो आप चुनाव आयोग के पास भी नहीं जा सकते।  आप आयोग में आवेदन भी नहीं कर सकते, इसमें चुनाव आयोग कुछ नहीं कर सकता।

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सिब्बल – अगर बागी नेता अयोग्य हो जाते हैं, तो सब कुछ अवैध हो जाएगा। सरकार का गठन, एकनाथ शिंदे का मुख्यमंत्री बनना और सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले भी अवैध हैं।

सिब्बल के बाद अब सिंघवी ने बहस शुरू की। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मुद्दा बहुत दिलचस्प है। उनके सामने एकमात्र बचाव विलय था, जो उन्होंने नहीं किया।

सिंघवी ने कहा कि शिंदे ग्रुप न सिर्फ महाराष्ट्र में अवैध तरीके से सरकार चला रहा है, बल्कि वो चुनाव आयोग तक पहुंच गए ये कहते हुए कि वो असली शिवसेना हैं।

सिंघवी – अभी मामला कोर्ट में लंबित है और शिंदे ग्रुप ने चुनाव आयोग में याचिका दाखिल की जो पूरी तरह से गलत है।

सिंघवी – दलबदल का संवैधानिक संकेत इतना गंभीर है कि उन्हें सरकार के रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। ये एक जहरीले पेड़ के फल हैं और इन्हें जारी नहीं रहने देना चाहिए। क्या दल-बदल कानून अभी भी लागू है या यह कुछ ऐसा है जो अभी कागजों पर है? अपने गलत कामों को सही ठहराने का एक ही तरीका है कि आप चुनाव आयोग की कार्यवाही को तेजी से ट्रैक करें और कुछ मान्यता प्राप्त कर लें।

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एक नाथ शिंदे गुट की तरफ से हरीश साल्वे ने बहस शुरू की

हरीश साल्वे – दलबदल विरोधी कानून उस नेता के लिए नहीं है जो अपनी ही पार्टी के सदस्यों का विश्वास खो चुका है और वो किसी तरह उन्हें बंद करके सत्ता में रखना चाहता है।

दल बदल कानून इस मामले में लागू नहीं होता। ये तब होगा जब वो पार्टी से अलग होते हैं। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। ये एंटी पार्टी नहीं इंट्रा पार्टी मामला है।

साल्वे ने कहा कि दल बदल कानून इस मामले में लागू नहीं होता,ये तब होगा जब वो पार्टी से अलग होते हैं।  

इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। यहां इंट्रा पार्टी मतभेद है यानी पार्टी के भीतर का मतभेद है।कई विधायक नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं तो इसे पार्टी विरोधी नहीं कहा जाएगा।  ये अंदरूनी मतभेद हैं।

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साल्वे- हम यहां एक ही पार्टी हैं। हमने कभी नहीं कहा कि एक नया राजनीतिक दल है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि 2 शिवसेना हैं । हम कह रहे हैं कि एक ही शिवसेना में दो गुट हैं।

एक नेता ने पार्टी के सदस्यों का विश्वास खो दिया है। हमनें केवल नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई है। हमने बस कहा कि आप नेता नहीं हो सकते। दो शिवसेना नहीं बल्कि दो अलग-अलग गुट हैं , जिसके दो अलग-अलग नेता हैं।

पार्टी के भीतर बदलाव हुए हैं। विभिन्न मुद्दों पर तथ्यात्मक विवाद है। दल-बदल विरोधी कानून का मूल आधार यह है कि जब आप अपनी पार्टी छोड़ते हैं।

किसी ने नहीं पाया कि अयोग्यता है। ठाकरे गुट अयोग्यता नोटिस आदि का दावा करता है, लेकिन अब तक किसी को भी अयोग्य घोषित नहीं किया गया है।

हमने केवल नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई है। हमने बस कहा कि आप नेता नहीं हो सकते।

दो शिवसेना नहीं, बल्कि दो अलग-अलग गुट हैं, जिसके दो अलग-अलग नेता हैं। साल्वे ने कहा कि दो वास्तविक पार्टी नहीं हो सकती। पार्टी में केवल एक लीडरशिप हो सकती है,  वो हम हैं।

साल्वे- चुनाव आयोग में जो कार्रवाई चल रही है उससे अयोग्यता का कोई लेना देना नहीं।

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वो सुनवाई अलग है और ये वाली सुनवाई अलग है।

CJI-चुनाव आयोग जाने का आपका उद्देश्य क्या है?

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साल्वे- BMC के चुनाव आने वाले हैं इसलिए वो गए हैं ताकि तय हो सके की असली पार्टी कौन सी है।

CJI: सबसे पहले कोर्ट कौन आया?

साल्वे-हम आये थे क्योंकि हाउस में स्पीकर कई सालों से नहीं थे।डिप्टी स्पीकर तुरंत फैसला नहीं ले सकते थे। कोर्ट ने अयोग्यता कार्रवाई पर रोक लगा दी ।

क्या मैंने राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ दी है? नहीं,सिर्फ इसलिए कि मैं बाहर किसी पार्टी की बैठक में नहीं आया, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अब पार्टी का सदस्य नहीं हूं

साल्वे – अयोग्यता पर हमारा मामला अलग था। डिप्टी स्पीकर के खिलाफ मोशन मूव किया गया था।

साल्वे- वे चाहते हैं कि अध्यक्ष से सभी शक्तियां छीन ली जाएं और सुप्रीम कोर्ट को दलबदल ट्रिब्यूनल बनाना चाहते हैं। यह अभूतपूर्व है। यह वह जगह नहीं है जहां परीक्षण होना चाहिए।

CJI ने साल्वे से कहा- जिस तरह से आपकी दलीलें आगे बढ़ रही हैं, आप कह रहे हैं कि आपने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, फिर सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता पर रोक लगा दी।

साल्वे- नहीं, ऐसा नहीं है।

CJI – हम यह नहीं कह सकते कि अब सब कुछ निष्प्रभावी हो गया है, इन मुद्दों पर स्पष्ट फैसला लेना है।

शिंदे गुट के लिए एनके कौल ने बहस शुरू की।

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CJI  ने पूछा – आप पहले यहां चले आए,  हमने कर्नाटक केस में कहा था कि ये मामले हाईकोर्ट जाना चाहिए

शिंदे गुट के लिए एन के कौल ने बहस शुरू की

CJI- फैसले में हमने कहा था कि पहले स्पीकर को तय करने दें,  उसके बाद अदालत समीक्षा कर सकती है

CJI ने शिंदे गुट से पूछा- आप पहले कोर्ट आए और समय मिल गया , लेकिन अब आप कहते हैं कि ठाकरे गुट अदालत में नहीं आ सकता, जो कुछ वो कह रहे हैं वो अब निष्प्रभावी हो गया है।

साल्वे- हम ये नहीं कह रहे हैं।

CJI ने कहा कि मान लीजिए कोई विधायकों के खिलाफ शिकायत पर स्पीकर अयोग्यता कार्रवाई करता है तो कोई विधायक जवाब में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास नोटिस जारी कर देगा। इस मुद्दे को तय करना होगा। पहले आप अदालत आएं और अब केस को निष्प्रभावी बता रहे हैं।
साल्वे – हम ये नहीं कह रहे हैं।

साल्वे – हमने पार्टी नहीं छोड़ी है। किसी ना किसी को हमारे मामले को तय करना होगा। स्पीकर को इसे तय करने दीजिए।

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